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मल्टीनेशनल कम्पनिया हमारी मित्र बनकर हमें लूट रही हैं

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, जून 12, 2011 | रविवार, जून 12, 2011


 आज समय के आगे देख सकनेकी जरूरत है। जब हम अपने वर्तमान में खड़े होंगे तभी समयके आगे देख सकेंगे। अपने समयके सच से जनता को रूबरू कराना मीडिया का काम है। कबीर औरबुद्ध अपने समय में रहकर समयके आगे की दृष्टि अर्जित करने वाले समय के प्रतिनिधि महापुरूष हैं।उपरोक्त उद्गार उपन्यासकार रवीन्द्र प्रभात के नागरिक अभिनन्दन तथालोक संघर्ष पत्रिकाके लोकार्पणके अवसर पर मुख्य अतिथि जन संदेश टाइम्स के सम्पादक डा0 सुभाष राय ने रामनगर तहसील केसभागार में इण्डियन एसोसिएशन ऑफ़ लायर्स, बाराबंकी की ओर से आयोजित समारोह में व्यक्त कररहे थे।

इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया की आलोचना करते हुए आगे उन्होंने कहा आज की आवश्यकता समाज में अपने शत्रु को पहचानने की है। मल्टीनेशनल कम्पनिया हमारी मित्र बनकर हमें लूट रही हैं औरअपना उल्लू सीधा कर रही है। आज कोई अपने देश का व्यक्ति हमें नहीं लूट रहा है। कहना होगा किआज की तारीख में मीडिया भी अपना यह कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पा रही है। क्योंकि मीडियाकर्मीआज केवल वहाँ पर एक नौकरी भर कर रहे हैं। उसकी अपनी मजबूरियां है। लोक संघर्ष तथा जनसंदेश जैसी पत्र पत्रिकाएं अपनी पहचान अपने शत्रु से कराती हैं इसलिए इन्हें पढ़ें। कवि कथाकार रवीन्द्रप्रभात की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा रवीन्द्र प्रभात इलेक्ट्रानिक मीडिया ब्लागिंग के इतिहास पुरूषबनने के साथ अपने ताजा उपन्यास ताकि बचा रहे लोकतंत्र के माध्यम से कथा जगत में भी अपनाहस्तक्षेप किया है। अपने नागरिक अभिनंदन के उपरान्त सभा को सम्बोधित करते हुए प्रख्यातकथाकार रवीन्द्र प्रभात ने कहा पत्रकारिता में एक व्यक्ति कभी विश्वसनीय नहीं बन सकता लेकिन एकव्यक्ति ऐसा होता है जो सूचनाओं के माध्यम से पूरा विश्व बन जाता है। इण्टरनेट और ब्लॉग ऐसी हीदुनिया है। ब्लॉग विश्लेषक के रूप में ख्याति आप लोगों के कारण है। आगे उन्होंने कहा आज शब्द भीमनोरंजन के साधन हो गये हैं। शब्दों को अब हम जीवन में नहीं उतारते इसलिए कविता फेल हो रही है।

इस अवसर पर उन्होंनेवटवृक्षपत्रिका के आगामी प्रेम विशेषांक की घोषणा के साथ यहाॅ के रचनाकारोंको इसमें शामिल होने का अनुरोध भी किया। सभा के विशिष्ट अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा सेपधारे विद्धान सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा, जब तक हम अपने सिर्फ अपने विषय मैं सोचना बन्दकरदूसरे के हित के विषय में नहीं सोचेंगे समाज में परिवर्तन लाना कठिन है। एक अन्ना हजारे या रामदेवसे क्या होना है? जब तक कि इनके पीछे जनता की ताकत हो। राजनीति आज हमारी दुश्मन बन गयीहै।


सभा के अतिथि प्रसिद्ध गजलकार कुंवर कुसुमेश ने लोक संघर्ष पत्रिका को बधाई देते हुए कहा किसामाजिक सरोकारों से सम्बद्ध सामग्री से लैस लोक संघर्ष पत्रिका तथा वटवृक्ष एक अच्छे और जागरूकसमाज के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।इस अवसर पर एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने कहा क्या आप जानते हैं भाजपा का राष्ट्रवाद इनका अपनाएजेण्डा है। क्या कांग्रेस के साम्प्रदायिक एकता का नारा इनका है। सभी राजनीतिक पार्टियों के पीछेकिसी किसी बहुराष्ट्रीय कम्पनी का हाथ है जो सत्ता में आते ही प्रत्यक्ष रूप से उन्हें लाभ देने लगती है। सभा की अध्यक्षता करतेहुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमर पाल सिंह ने डा0 श्याम सुंदर दीक्षित तथा अन्य अतिथियों को प्रतीक चिन्हें वअंक वस्त्र देकर सम्मानित किया तथा सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिकन साम्राज्यवादके विरोध के रूप में लोक संघर्ष ने निश्चय ही सराहनीय कार्य किया है।

कार्यक्रम का संचालन संयोजक अधिवक्ता बलराम सिंह ने किया। इस अवसर पर लोकसंघर्ष के प्रबंध सम्पादक रणधीर सिंह सुमन, उप सम्पादक पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, डा0 श्याम सुंदर दीक्षित , विजय प्रताप सिंह एडवोकेट, सैयद कमर अस्करी, प्रदीप सिंह, डा0 आलोक शुक्ला, अम्बरीश अम्बर, राजन सिंह, डा0 विनय दास, सुशील प्रधान, आनन्द सिंह, अरविन्द वर्मा आदि भी उपस्थित रहे।


पुष्पेन्द्र कुमार सिंह
उपसम्पादक
लोकसंधर्ष पत्रिका
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