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'अपनी माटी' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल :सम्पादक:माणिक

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, जून 09, 2011 | गुरुवार, जून 09, 2011

दो पंक्तियों में मेरे बारे कहा जाए तो मैं आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव रखने वाला बन्दा होकर साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव रखता हूँ.

अकादमिक रेकोर्ड के अनुसार जन्म-एक जुलाई,उन्नीस सौ अस्सी में अपने ननिहाल हमीरगढ़,भीलवाड़ा में हुआहै.वहीं मूल स्थान जिसके नाम से मियन अपने आपको मानता हूँ वो स्थान राजस्थान के चित्तौडगढ जिले के निम्बाहेडा तहसिल में स्थित छोटे से गाँव अरनोदा है.माध्यमवर्गीय परिवार में मोहल लालजी-कंचन बाई के पुत्र के रूप में जन्म लेकर मैं बेहद खुश हूँ.

उन्नीस सौ पिच्चासी से निन्यानवे तक के सफ़र में सेकंडरी तक गाँव में ही चिमनी के उजाले में पढाई-लिखाई पूरी हुई.सीनियर सेकंडरी कला वर्ग से पास के कस्बे निम्बाहेडा में जैसे तैसे आर्थिक परेशानियों के चलते पूरी हुई. पताजी के पास पासी होते हुए भी उनकी मितव्ययता की आदत के चलते पढाई हो पाना कुछ मुश्किल था..सांवलिया जी ट्रष्ट द्वारा मिली प्रतिभावान छात्रवृति के भरोसे बाहरवीं और बाद में इधर-उधर की ट्यूशन के चलते हुई कमाई से  मास्टर बनाने वाला एक डिप्लोमा डाईट चित्तौड़ से ही पूरा किया.सांस्कृतिक-साहित्यिक अभिरुचि,स्कूली बालसभा से ही मुझमें जड़ें पकड़ चुकी थी.बाद में विद्या विहार नामक एक प्राइवेट स्कूल की हजार रुपये महीने पगार वाली ढाई साल तक की नौकरी और बाद में पांच साल तक अर्ध सरकारी नौकरी की.इस फक्कडपन और मस्ती के चलते भी कविताबाजी में दिन निकले.जीवन के कठिन समय के चलते -चलते ही २००२ बी.. और बाद में २००५ इतिहास में एम्.. किया.शुरुआत से अंत तक प्रथम श्रेणी के अंक लाने की आदत रही है.बोलता कम हूँ,सोचता ज्यादा हूँ.

कोलेज के दिनों में स्पिक मैके जैसे भव्य सांस्कृतिक छात्र आन्दोलन से झुडाव हुआ जो आज तक बहुत गहरे में पहुँच गया है.विवाहित जीवन के दायित्व निभाते हुए वर्तमान में चित्तौडगढ में उन्नीस सौ सित्तानवें से रह रहा हूँ.शहर की लगभग सभी सरकारी -गैर सरकारी संस्थाओं के समसामयिक आयोजनों में सक्रीय भागीदारी रही है.भीड़ में शामिल होने की आदत और जी हजुरी से दूर रहा हूँ.शहर में होते बदलाव और किले के इतिहास को जानने के साथ ही उनकी वर्तमान हालत पर अपनी बात कहना मेरी आदत रहा है.

वर्ष दो हज़ार ; से ही आकाशवाणी के चित्तौडगढ केंद्र से बतौर नैमित्तिक उद्घोषक प्रसारित हो रहा हूँ.ख़ास तौर पर साहित्यिक संस्थाओं से इन दिनों लगाव बढ़ा है.''अपनी माटी'' वेब पत्रिका के ज़रिए साथियों के साथ कुछ सृजनात्मक काम करने का दायित्व निभा रहा हूँ.यदा कदा अब भी कविता कर लेता हूँ.इन दिनों 'किले में कविता' के नाम से एक श्रृंखला लिख रहा हूँ.शायद किसी को पसंद आ जाए और वे इसे काव्य संग्रह के रूप में छाप दें. इसी गलतफहमी दिन निकल रहे हैं..बाकी हिंदी की पत्र पत्रिकाओं में गहरी रूचि रही है.बड़े और परम्परावादी कलाकारों से मिलने के सहज मौकों को छोड़ता नहीं हूँ . कभी कभार गुरुओं से मिलते वक्त कुछ सार्थक बातचीत के अंश साथियों के बीच भी बांटता हूँ.पत्र-पत्रिकाओं में छपा हूँ ,मगर ज्य़ादा नहीं.

अकादमिक तौर पर इतिहास में एम्.. और २००८ में वर्दमान महावीर खुला विश्व विद्यालय ,कोटा से संपन्न  शिक्षा स्नातक डिग्रीधारी हूँ.बाकी जीवन क्या है समझने का प्रयास कर रहा हूँ.देश भर में सांस्कृतिक यात्राओं की बहुत रूचि है.ठेठ गाँव और नदी-पर्वतों का एकांत बहुत अच्छा लगता है,जहां अक्सर मेरे लिए विचार जन्म लेने में सहूलियत अनुभव करते हैं.अभी सरकारी अध्यापक हूँ.बाकी कलावादी मित्रों के लिए वक्त निकलाना अच्छा लगता है.माता-पिता का एकलौता हूँ.शहर में बसे युवाओं की तरह मैं  भी कभी कभार अपने गाँव जाता हूँ जो आनंद और सुकून का जीवंत अनुभव देते हैं.

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                      Cell:-09460711896
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