'अपनी माटी' वेबपत्रिका के जन संपर्क प्रबंधक अरुण चन्द्र रॉय - अपनी माटी Apni Maati

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'अपनी माटी' वेबपत्रिका के जन संपर्क प्रबंधक अरुण चन्द्र रॉय

अरुण चन्द्र रॉय हमारे देश में बहुत मार्मिक ढंग से  सच्चाई  को अपनी रचनाओं में समेटने वाले कवि  हैं-,जिन्हें ज्य़ादा अच्छे से''सरोकार'' पर पढ़ा जा सकता है.वैसे इनका विविधता पूर्ण लेखन और उसमें भी लगातार बने रहना तारीफ़ मांगता है.सम्पादक 

जन्म तिथि: 30-09-1972
जन्म स्थान : ग्राम रामपुर, जिला : मधुबनी , बिहार

(पेशे से कॉपीरायटर तथा विज्ञापन व ब्रांड सलाहकार. दिल्ली और एन सी आर की कई विज्ञापन एजेंसियों के लिए और कई नामी गिरामी ब्रांडो के साथ काम करने के बाद स्वयं की विज्ञापन एजेंसी तथा डिजाईन स्टूडियो का सञ्चालन. अपने देश, समाज, अपने लोगों से सरोकार को बनाये रखने के लिए कविता को माध्यम बनाया है)

मधुबनी जिले के एक छोटे से गाँव रामपुर में जन्म हुआ प्रारंभिक शिक्षा गाँव के प्राथमिक विद्यालय में हुई बाद में पिता के साथ धनबाद (अब झारखण्ड में) में रहना हुआ वहाँ डी0 0 वी0 स्कूल से १०+ किया धनबाद के पी0 के0 राय स्मृति कालेज से ग्रैजुएशन और फिर विनोबा भावे विश्विद्यालय हज़ारीबाग से अँग्रेज़ी में स्नातकोत्तर स्वर्ण मेडल लेकर पास किया उसके बाद ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग से एम0 बी0 0 (फाइनांस) उत्तीर्ण किया  

दिल्ली के भारती विद्याभवन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैज़ुएट डिप्लोमा पास किया धनबाद के स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का नियमित प्रकाशन एवं स्थानीय कवि सम्मेलनों में भाग लेते रहे एक महत्त्वपूर्ण लघु पत्रिका 'कतार' में कविता प्रकाशित हुई बाबा बटेसरनाथ उपन्यास को आधार बना कर लिखी एक कविता को जब स्वयं बाबा नागार्जुन ने पढ़ा तो उन्होंने कुछ इस तरह टिप्पणी की "अरुण तुम्हारी यह कविता मुझे उद्वेलित कर रही है. कभी सुविधानुसार तुम मेरे साथ एक सप्ताह रहो।" आजकल अपने विज्ञापन एजेंसी 'ज्योतिपर्व' का सञ्चालन.

अरुण चन्द्र रॉय  का ब्लॉग सरोकार 

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