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पुस्तक समीक्षा :-युवा पीढ़ी अपनी राह से भटक कर पश्चिम से भौतिकता की ओर आकर्षित हो रही है

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on बुधवार, जून 08, 2011 | बुधवार, जून 08, 2011


व्हाट इस इंडिया मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई की  भारतीय दर्शन से दुनिया कितनी प्रभावित है ,इस किताब ने दुनिया भर के महान फिलासफर से लेकर वैज्ञानिकों सहित जानी मानी विश्व प्रसिध्ध हस्तियों की भारतीय संस्कृति कला और जीवन जीने की प्रणाली को श्रेष्ठ और अनुकर्णीय   माना है , उन सभी के विचारों को एक ही किताब में संकलित कर सलिल जी, जो शिलोंग  मेघालय के निवासी हैंने एक ऐसा महान कार्य किया है जिसके माध्यम से आज के तथाकथित प्रगतिशील और आधुनिक माने जाने वाले लोगों की आँखें खुलेंगी समता,बंधुता,नैतिकता की स्वास्थ्य परंपरा हमारे रग रग में निहित है ,युवा पीढ़ी अपनी राह से भटक कर पश्चिम से भौतिकता की ओर आकर्षित हो रही है .

जीवन मूल्यों और आवश्यकताओं की परिभाषा बदल रही है ,ऐसे में ये किताब एक नसीहत समझें या चेतावनी किन्तु सत्य तो सत्य ही है इसी लिए क्योन फ्रेद्रिका जी ने कहा है कीआप भारतीय भाग्यशाली हैं जिनको ज्ञान विरासत में मिला ,मुझे आपसे ईष्र्या है ,ग्रीस मेरा देश है किन्तु मेरा आदर्श भारत हैनिश्चित ही उक्त महान फिलासफर ने समझाने में कोई कसर नहीं रखी समझाना हमारा काम है. हम भटक रहें हैं ,वेलन्ताइन डे धीरे धीरे हमारी जीवनशैली बन रहा है ,अंग्रेजी स्टाइल की वो संस्कृति जिससे खुद अंग्रेज ऊब रहें हैं हम उसे नवीनता मान कर अंधानुसरण कर रहें हैं ,एक ग्रीक लेखक महोदय ने लिखा है की दुनिया की कोई भाषा संस्कृत से ज्यादा सरल स्पष्ट नहीं हैं ,ये ग्रीक लेखक कह सकतें हैं हमारे यहाँ यदि कहा जाएगा तो उसे धर्म निरपेक्षता की दुहाई देकर चुप कर दिया जावेगा .

ये सच है भारतीय इतिहास आक्रमणकारियों -आक्रान्ताओं का शिकार रहा है ,सात पीढ़ियों के मुस्लिम शासन के बाद २०० वर्षों तक हमने अंग्रेजों की गुलामी भी सही ,देश आज़ाद हुवा किन्तु जिम्मेदार  लोग कहें या नीति निर्धारक कहें या शासन करने वाले लोग कहें किसी ने भी इन मूल्यों के प्रति अपनी सही और प्रगट आस्था नहीं जताई, केवल वोट के लिए एक नया सिधांत बना दिया गयाधर्मनिरपेक्षताइस शब्द को विकृत रूप में प्रयोग किया जाने लगा केवल वोट प्राप्त करने तथा एक वर्ग विशेष को प्रभावित करने के प्रयास में हमने तुष्टिकरण मात्र किया .भारतमाता की गोद में बहने वाली नदियाँ गंगा -गोमती  भी केवल जल प्रवाह करने वाली नदिया ही नहीं अपनी परम विशेषताओं के कारण इन्हें देव तुल्य दर्जा प्राप्त है ,इस किताब के लेखक  सलिल जी साधुवाद के पात्र हैं ,मेरी अपनी राय है कीव्हाट इस इंडियाको देश की संसद -विधान सभाओं सहित सभी स्कूल कालेजों में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना चाहिए ताकि आने वाली नस्ल को हम देश की वास्तविक और स्थापित मान्यताओं के साथ जोड़ सकें.


आधुनिक विज्ञान भारतीय वेद पुराण और उपनिषदों से ऊपर नहीं है ,बहुजन हिताय -बहुजन सुखाय के आधारबिन्दु हमारे प्राचीन साहित्य हैं . यथार्थ में आज की दशा और दिशा जिस पर हम चल रहें हैं वो निश्चित ही भटकाव कहा या देखा जा सकता है इसलिए भी मेरा ये स्पष्ट मत है की व्हाट इज इंडिया के लेखक सलिल जी ने इस किताब को लिख कर विश्व की हमारे प्रति सोच वो भी वास्तविक सोच को उजागर किया है इस किताब को एक अमूल्य धरोहर का दर्ज़ा दिया जा सकता है .किन्तु फ़िलहाल माननीय सलिल जी को कोटिशः बधाई .


समीक्षक 

विजय सोनी 
अधिवक्ता 
इंदिरा मार्केट 

दुर्ग (छत्तीसगढ़ ) 
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