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''राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता नही मिलना दुःखद है''-देव कोठारी

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, जुलाई 29, 2011 | शुक्रवार, जुलाई 29, 2011

बारहवी शताब्दी से लेकर अब तक उपलब्ध राजस्थानी हस्तलिखित साहित्य की उपलब्धता राजस्थानी भाषा की समृद्धता की कहानी बया करती है राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित सर्व सम्मत प्रस्ताव के बावजुद राजस्थानी भाषा को संविधानिक मान्यता नही मिलना दुःखद है। उक्त विचार राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष देव कोठारी ने डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजिम संवाद में व्यक्त कियें।

 राजस्थानी भाषा संवर्ष समिति के प्रो. राजेन्द्र बारहट ने कहा कि केट परिक्षा में सात भाषाओं के विकल्प है किन्तु राजस्थानी भाषा का विकल्प नही होना प्रदेश के छात्रों के साथ ना ईसाफि दिखाता है। भाषा की मान्यता सृजन की मान्यता है राजस्थान की थाति की मान्यता है।  प्रो.जी. एस. राठौड़ ने कहा कि प्रत्येक प्रदेश की भांति राजस्थान की संस्कृति, साहित्य तथा सामाजिक प्रदेश की भाषा में बसती है।    राजनीतिज्ञ अर्जून देथा ने कहा कि बालक की प्रथम गुरू मां होती है किन्तु मां की भाषा को मान्यता के लियें तरसता देखना निराशा पैदा करता है। देथा ने राजस्थानी की मान्यता के लियें आम लोगों से जुडने की अपील की।

कामरेउ बी.एल. सिघवी ने राजस्थानी भाषा की मान्यता की जरूरत बतलाते हुये कहा कि देश की तमाम भाषाओं की सुरक्षा हो तथा भारत की अनेरता में एकता को बल मिलना चाहियें। गांधीवादी सुशिल दशोरा ने राजस्थानी भाषा की मान्यता की जरूरत बतलाते हुयें सरकार से आग्रह किया कि प्रदेश की भाषा को शीघ्र मान्यता मिले।  बजरंग सेना के कमलेन्द्र सिंह पांवर ने कहा कि भारत के विकसीत प्रदेशों की अपनी प्रादेशिक भाषा है उसी तर्ज पर राजस्थान की अग्रणी प्रदेश बनाने में राजस्थानी भाषा की मान्यता महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

यज्ञनारायण शर्मा ने राजस्थानी भाषा की मान्यता की जरूरत को समय की मांग बतलाया। संवाद में मोट्यार परिषद के प्रदेश महामंत्री शिवसिंह जोतवास ने राजस्थानी भाषा को अब तक मान्यता नही मिलने को निराशा जनक बतलाते हुयें प्रदेश वासियों की अपनी बोली की मान्यता के लियें आगे आने का आव्हान किया। चर्चा में नवीन व्यास, आनन्द झा, मोहनसिंह राठौड़, खुमानसिंह चुण्डावत, जनगदीश प्रजापत, लालदास पर्जन्य आदि ने भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापित करते हुयें मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृति पर प्रकाश डाला।


 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
नंद किशोर शर्मा
मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट सचिव
संपर्क सूत्र :-0294&3294658, 2410110 ,
msmmtrust@gmail.com,

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1 टिप्पणी:

  1. असल में हम राजस्थानियों का खून ठंडा है, अन्य राज्यों में तो लोग अपनी मांगें किसी न किसी प्रकार मनवा लेते हैं, राजस्थनी को मान्यता दिलाने के लिए केवल गोष्ठियों व एक दिवसीय धरनों से कुछ नहीं होने वाला है, बडे आंदोलन की जरूरत है

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