मालावी गीत:-आओ बेन आपण राखी मनावा - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

मालावी गीत:-आओ बेन आपण राखी मनावा


आओ बेन आपण राखी  मनावा
नाना के देवा ने मोटा से आशीष पावा
दुःख सुख में आड़े आने को वचन निभावा
दो दन की जिन्दगी दो पल साथ बीतावा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा

भावज सारू चुडिलो ने लुगड़ो मगावा
नाना भतीजा सारू झागल्यो झूल सिवावा
भाई होण सारू चम् चमाता जाकेट मंगावा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा

बणावा दाल बाटी ने ए लड्डू बाजार से मंगावा
चटनी धणा मिर्ची की ने खातो कचूमर बणावा
रांदा सब्जी आलू की ने चरखी दाल बणावा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा

टिक्को काड़ा भाई के  ने उनसे आशीष पावा
लम्बी ऊमर सारू देवी देवता के मनावा
भाई होण की आरती करी के मिठाई खिलवा
आओ बेन आपण  राखी  मनावा



 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

राजेश एस . भंडारी "बाबु"
104, महावीर नगर, इंदौर
फ़ोन 9009502734
rb@indoreinstitute.com
SocialTwist Tell-a-Friend

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here