मालवी गीत:'झम झम झम झम होई रे' - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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मालवी गीत:'झम झम झम झम होई रे'



सावन में आज तो झम झम होई रे
बेन बेटी ना को आयो दिवसों ,
अमली निचे फुन्दी फटाका होई रे
झम झम झम झम होई रे
सावन में आज तो झम झम होई रे
मोटो नानो ली आयो आणों
खेत पे जावा को मन नि होई रे
झम झम झम झम होई रे
सावन में आज तो झम झम होई रे
नवी लाड़ी को पेलो सावन ,
मन में मीठी मीठी कसक होई रे
झम झम झम झम होई रे
सावन में आज तो झम झम होई रे
बुवाई करी के हुई गया फिरि
तास पत्ती ने चोपड़ होई रे
झम झम झम झम होई रे
सावन में आज तो झम झम होई रे
नदी नाला सब पुर आई गया रे
खेत माळ सब राम्पाई रिया रे
झम झम झम झम होई रे
सावन में आज तो झम झम होई रे
तलाव की पाळ पे फासी गया पटेल बा
लाल्या ली के लोग   दोंडिया जाइ रे
झम झम झम झम होई रे
सावन में आज तो झम झम होई रे
दाजी बा ने बेच दीया खेत रे
कार में ठसक से जय रिया रे
झम झम झम झम होई रे


सावन में आज तो झम झम होई रे

 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

 राजेश भंडारी 'बाबू' 104,
 महावीर नगर ,इंदौर 
 फ़ोन-9009502734
 iistrajesh@gmail.com
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