''बढ़ते आर्थिक संबंधों के कारण हिन्दी का महत्त्व उजागर होने लगा है''-जापान के प्रोफेसर ताकेशि फुजिइ - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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''बढ़ते आर्थिक संबंधों के कारण हिन्दी का महत्त्व उजागर होने लगा है''-जापान के प्रोफेसर ताकेशि फुजिइ


नई दिल्ली.
हिन्दू कॉलेज की हिंदी साहित्य सभा का सत्र 2011 -12  का उदघाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमे देश-विदेश के हिन्दी विद्वान् उपस्थित थे. मुख्य  अतिथि जापान के हिंदी भाषा के विद्वान् एवं हिन्दू कालेज के पूर्व छात्र प्रोफेसर ताकेशि फुजिइ थे. उन्होंने जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय में हिन्दुस्तानी भाषा के विभाग और उसकी  उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हाल के वर्षों में बढ़ते आर्थिक संबंधों के कारण हिन्दी का महत्त्व उजागर होने लगा है. उन्होंने बताया कि  में 2008  में जापान में हिन्दी अध्ययन के सौ वर्ष होने पर हिन्दी भाषा के शताब्दी वर्ष मनाया गया. पिछले वर्ष भारत और जापान के बीच हुए आर्थिक सहयोग समझौते का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत और जापान के बीच सम्बन्ध और मजबूत होंगे.  टोकियो विश्वविद्यालय में प्रो. फुजिइ के सहयोगी डॉ.सुरेश ऋतुपर्ण ने जापान में हिन्दी अध्ययन-अद्यापन की अन्य गतिविधियों का परिचय दिया. आयोजन की अध्यक्षता कर रही सुप्रसिद्ध कथाकार एवं 'हिन्दी' की सम्पादक ममता कालिया ने पहले हिन्दू कालेज के अपने अनुभव सुनाये. उनका मत था कि भारत -जापान में सांस्कृतिक सामीप्य का श्रेय बुद्ध को दिया जाना चाहिए. उन्होंने अपने जापान प्रवास के संस्मरण भी सुनाये. आयोजन में जापान से आयीं इंदिरा भट्ट,नारायण कुमार,विनय विश्वास, ऋचा मिश्र , अरुणा गुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किये. समारोह में प्रो.  फुजिइ का ममता कालिया ने शाल ओढाकर अभिनन्दन किया. इससे पूर्व हिन्दी साहित्य सभा का उदघाटन हुआ. परामर्शदाता डॉ.रामेश्वर राय ने पदाधिकारियों का परिचय दिया. समारोह का संयोजन डॉ. हरीश नवल ने किया.

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
अनुपमा शर्मा 
मीडिया प्रभारी ,हिन्दी साहित्य सभा ,हिन्दू कालेज 

दिल्ली विश्वविद्यालय ,दिल्ली

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