इतिहासकार रामशरण शर्मा नहीं रहे... - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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इतिहासकार रामशरण शर्मा नहीं रहे...


प्रो0 रामशरण शर्मा
  • प्रो0 रामशरण शर्मा नहीं रहे, कभी मिला नहीं उनसे, सिवाय एकाध सेमीनार में नमस्कार के....लेकिन लग रहा है कि कोई छांव उठ गयी सर से.....श्रद्धांजलि...--पुरुषोत्तम अग्रवाल 
प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो.रामशरण शर्मा का आज निधन हुआ।वे बड़े कद के इतिहासकार हैं।भारत के संवेदनशील मीडिया को इससे कुछ मतलब नहीं है।वह तमाशे की भाषा समझता है।15 महत्त्वपूर्ण पुस्तकों के प्रणेता इस इतिहासकार ने भारत के प्राचीन इतिहास की अनेक गुत्थियाँ सुलझाने में मदद की है।उन्हें नमन करता हूँ।-Ashutosh सिंह


इतिहास को पढ़ना सिखाने वाले विद्वान प्रो रामशरण शर्मा के निधन की खबर कई जगहों से कल मिली थी. एक सार्थक जीवन व्यतीत करके उन्होंने हम जैसों के लिए जो अपार ज्ञान और अचूक दृष्टि छोडी है उसमें वह हमेशा जीवित रहेंगे. मेरा अंतिम सलाम और श्रद्धांजलि.


इतिहासकार प्रोफ़ेसर रामशरण शर्मा का शनिवार की रात निधन हो गया.शर्मा पिछले ५ दिनों से पटना के एक निजी अस्पताल में भारती थे.आज शर्मा के निधन की खबर से देश के प्रबुद्ध लोगों के बीच शोक की लहर फ़ैल गयी.इनकी लिखी गयी प्राचीन इतिहास की किताबें देश की उच्च शिक्षा में काफी अहमियत रखती हैं.अबतक १२० से ज्यादा किताबें लिख चूके और देश विदेश के कई कालेजों में पढ़ा चूके आर एस शर्मा पटना विश्विद्यालय और दिल्ली विश्विद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष रह चूके हैं.रामशरण शर्मा केवल एक इतिहासकार ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन में भी उनका अहम् योगदान रहा है. आज भी रामशरण शर्मा के द्वारा लिखी गयी प्राचीन भारत के इतिहास को पढ़कर छात्र यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.बेगुसराई के रहनेवाले रामशरण शर्मा पटना के पाटलिपुत्र कालोनी में रहते थे और पिछले कुछ महीने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे.

प्रबुद्ध वर्ग प्रोफ़ेसर रामशरण शर्मा के निधन को शिक्षा और समाज के लिए अपूर्णीय क्षति बता रहा है.प्राचीन इतिहास से जोड़कर ह़र सम-सामयिक घटनाओं को जोड़कर देखने में शर्मा को महारथ हासिल थी.अयोध्या पर भी उन्होंने बहुत कुछ लिखा था जिसको लेकर देश भर में बहस छिड़ गयी थी. के जानेमाने इतिहासकार प्रोफ़ेसर रामशरण शर्मा का शनिवार की रात निधन हो गया.शर्मा पिछले ५ दिनों से पटना के एक निजी अस्पताल में भारती थे.आज शर्मा के निधन की खबर से देश के प्रबुद्ध लोगों के बीच शोक की लहर फ़ैल गयी.इनकी लिखी गयी प्राचीन इतिहास की किताबें देश की उच्च शिक्षा में काफी अहमियत रखती हैं.अबतक १२० से ज्यादा किताबें लिख चूके और देश विदेश के कई कालेजों में पढ़ा चूके आर एस शर्मा पटना विश्विद्यालय और दिल्ली विश्विद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष रह चूके हैं.

रामशरण शर्मा केवल एक इतिहासकार ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन में भी उनका अहम् योगदान रहा है. आज भी रामशरण शर्मा के द्वारा लिखी गयी प्राचीन भारत के इतिहास को पढ़कर छात्र यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.बेगुसराई के रहनेवाले रामशरण शर्मा पटना के पाटलिपुत्र कालोनी में रहते थे और पिछले कुछ महीने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे.प्रबुद्ध वर्ग प्रोफ़ेसर रामशरण शर्मा के निधन को शिक्षा और समाज के लिए अपूर्णीय क्षति बता रहा है.प्राचीन इतिहास से जोड़कर ह़र सम-सामयिक घटनाओं को जोड़कर देखने में शर्मा को महारथ हासिल थी.अयोध्या पर भी उन्होंने बहुत कुछ लिखा था जिसको लेकर देश भर में बहस छिड़ गयी थी. 
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