'आज का दौर कहता है कि मीरा से इतर भी देखना होगा'-बी.एल.सिसोदिया - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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'आज का दौर कहता है कि मीरा से इतर भी देखना होगा'-बी.एल.सिसोदिया

(देखते हैं कि ये नया संविधान बनने के बाद नयी कार्यकारिणी मीरा स्मृति संस्थान को कितना बदल पाती है-सम्पादक  )


सात अगस्त,2011
बी.एल.सिसोदिया
अपने विचारों,योग में रूचि और वकालात के साथ ही कामरेडी छवि के लिए पहचाने जानेवाले बी.एल.सिसोदिया आज मीरा स्मृति संस्थान के अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं.ये वही सिसोदिया जी हैं जो अपनी वकालात के चलते गांवों में घूम घूमकर नि:शुल्क कानूनी सलाहें देते रहे हैं. जिन्हें कई बार अपनी आन्दोलनकारी गतिविधियों के चलते जेल भी जाना पडा..इनका अधिकाँश काम खटीक और हरिजन जाति के समुदाय के बीच शिक्षा की अलख जगाने से लेकर कई सामाजिक मुद्दों पर उन्हें असल दिशा का ज्ञान देने में बिता हैं.बहुमुखी धाराओं के सिसोदिया के हाथों अब बागडौर हैं.चुनाव के ठीक बाद के उनके पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि सालों तक मीरा के नाम पर हुए सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन ही इसकी परिधि रहे हैं.मगर अब ज़माने में लगातार बदलती हुए विषम परिस्थितियों को देखते हुए हमें नगर के लिए कुछ इतर सोचना होगा.नयी कार्यकारिणी के साथ कुछ सोचे हुए नए आयाम हाथ में लेने का मन है.

सत्यनारायण समदानी 
चित्तौड़गढ़ में साल उन्नीस सौ इक्यानवे से मीरा के नाम की अलग जगाए मीरा स्मृति संस्थान ने अपने बदले हुए संविधान के मुताबिक़ पहली बार चुनाव प्रणाली के तहत तीन सालाना टेन्योर के लिए रविवार,सात अगस्त को निम्बाहेड़ा मार्ग स्थित इसके मूल कार्यालय में चुनाव आयोजित किए.काल अध्यक्ष को छोड़ कर सभी पदों पर मनोनयन से ही काम चल गया. अध्यक्ष जैसे पद पर अब तक पदेन  रूप में जिला कलेक्टर ही आसीन होते रहे हैं.पहले चुनाव में अध्यक्ष पद हेतु जाने माने वरिष्ठ अधिवक्ता बी.एल.सिसोदिया ने गीतकार अब्दुल ज़ब्बार को छियासठ के मुकाबले पांच मतों से हराया.सेवार्थ कार्य करने वाले ऐसे संस्थानों में इस तरह के चुनाव की नोबत को सदस्यों ने अचम्बे के रूप में देखा.



जे.पी.भटनागर 
लोकतांत्रिक परिपाटी के गैर सरकारी संगठनों में जहां सामान्य रूप से पदाधिकारी बदलते रहते हैं,मगर इस संस्थान में पिछले बीस सालों से सचिव रहे सत्यनारायण समदानी इस बार फिर निर्विरोध चुने गए.हरफनमौला खिलाड़ी की तरह काम करने वाले समदानी जी के काम का भार देख एकाएक किसी की हिम्मत इस पद के लिए फॉर्म भरने की नहीं हो सकती हैं.मगर बदले हुए संविधान में कोइ भी अब तीन सालों के दो टेन्योर से किसी एक ज्यादा पद पर नहीं रह सकेगा.





डॉ.ए.एल.जैन 
उपाध्यक्ष पद पर दोनों नाम मार्बल व्यवसाय से जुड़े लोगों के हैं जिनमें शिवनारायण मानधना और भागचंद मूंदड़ा हैं.सहसचिव पद पर स्पिक मैके आन्दोलन से जुड़े रहे दो ख़ास नाम शामिल हुए हैं जिनमें शिक्षाविद डॉ.ए.एल.जैन और वर्तमान में वर्तमान में स्पिक मैके राजस्थान के संभागीय समन्वयक जे.पी.भटनागर को चुना गया हैं.कोषाध्यक्ष सी.ए.अर्जुन मूंदड़ा के साथ ही सात कार्यकारिणी सदय भी चुने गए जिनमें दीपा साहनी,अनुराग जिंदल,कर्नल रणधीर सिंह,घनश्याम सिंह राणावत,प्रभु दयाल गौड़,उषा रांदड़,नवरतन पटवारी आदि शामिल हैं.अंत में सभी को मुख्य चुनाव अधिकारी एस.के.झा,सहायक चुनाव अधिकारी सी..एम्.रांका ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.साथ ही पौधारोपण भी किया गया.


 योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :--
माणिक,वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्.  'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.वे चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी  के रूप में दस सालों से स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर हैं.
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1 टिप्पणी:

  1. नव निर्वाचित सभे एपदाधिकारियों को हार्दिक बधाई और अशेष शुभ कामनाएं!

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