प्रेमचन्द्र के समय का किसान आत्महत्या नहीं करता था - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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प्रेमचन्द्र के समय का किसान आत्महत्या नहीं करता था


बांदा, 24 अगस्त, 2011 
प्रलेस इकाई बांदा व्दारा केदार शोध पीठ न्यास में मुंशी  प्रेमचन्द्र के कालजयी उपन्यास गोदान की 75 वीं वर्षगांठ  को लेकर एक बृहद आयोजन किया गया इस आयोजन की अध्यक्षता सागर वि0वि0 , भाषा विज्ञान के पूर्व अध्यक्ष  प्रो0 बी0 डी0 मिश्र ने की इस अवसर पर जे0एन0 कालेज के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा0 राम गोपाल गुप्त  ने गोदान पर अपना बीज वक्तव्य देते हुये कहा गोदान उपन्यास किसानों के दुखों की वह कहानी है किसान जीवन भर संघर्ष करते हुये भी उससे निस्तार नहीं पाता है होरी पांच बीधेे का खेतिहर किसान था  जो सूदखोरों और सामंतों के जाल में फंस कर खेतों में काम करने वाला  मजदूर बन कर रह जाता हैं

किसान के लिए अब भी वही स्थिति है व्यक्ति और शोषण के तरीके  बदल गये है , प्रेमचन्द्र के समय  का  किसान आत्महत्या नहीं करता था , आज की कुत्सित राजनीति ने समाज का आपसी संवेदनात्मक भाव और आपसी सद्भाव खत्म होजाने से उसे आत्महत्या ही आखिरी विकल्प नजर आता है। इस अवसर पर बोलते हुये  समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि एवं केदार शोध पीठ केसचिव  नरेन्द्र पुण्डरीक  ने कहा गोदान  के नायक  होरी  की मौत  समान्य मौत नहीं थी वह तत्कालीन सूदखोर एव सामन्ती  के व्दारा की गई हत्या थी , आत्महत्या थी वर्तमान समय में किसानों की आत्महत्याओं के भाविष्य  का संकेत था  जो प्रेमचन्द्र होरी के माध्यम से  गोदान  में कर गये थे

             प्रलेस इकाई के अध्यक्ष चन्द्रपाल कश्यप ने बोलते हुये कहा  होरी के लडके गोबर  का दूसरी जाति की विधवा स्त्री  से पे्रम  हो जाने के कारण  उस गर्भवती  स़्त्री  को गोबर  घर ले आता है होरी उसे घर से नहीं भगाते हैं  बल्कि  उसे गांव भर  के तीखी नजरों  और  बोलो को सह कर  रख लेते है आज खाप पंचायतो की तरह मृत्यु का लठठ लिये  उनके पीछे  नहीं  दौड़ता है , यह दृष्टि  जो गोदान के माध्यम से प्रेमचन्द्र ने हमें दी थी हम उसे अपने  जीवन और समाज में  नही ला सके इस अवसर पर बोलते हुये  प्रलेस इकाई  के सचिव योगेश श्रीवास्तव  ने कहा  कांगेस की राजनीति की पे्रमचन्द्र ने धनिया के माध्यम से जो आलोचना कराई  ळे वह गौरतलब है  ये हत्यारे हमारे गांव के मुखिया है गरीबों का खूंन चूसने वाले , सूद व्याज सवाई नजर नजराना  घूस घास जैसं भी गरीबों को लूटों जेल जाने से सुराज मिलेगा , सुराज मिलेगा धर्म  और न्याय से इस लुट का शिकार किसान पहले भी था और अब भी है  

इस अवसर पर बोलते हुये  डा0 रामप्रकाश गुप्त  ने कहा  गोदान में  होरी के लडके गोबर  में हम देश के मजदूरों के लक्षणों को  पाते हैं  जो गांव से भाग कर  शहर  में काम करने वाले युवाओं  की चेतना  उसमें दिखाई देती है इस अवसर पर प्रलेस इकाई के सरंक्षक सदस्य  जयकान्त शर्मा ने कहा  पे्रमचन्द्र गोदान के माध्यम से देश के किसानों को बर्बाद करने वाली ताकतों  की  पहचान आज से 75 साल पहले  की थी गोदान की संवेदनाये  हमे इसलिए  खींचती हैं  कि आज भी  किसान की स्थिति  वैसी ही है  बल्कि  उन्हें बेजार और बर्बाद करने की गति और तेज हुई हे। इस अवसर पर बोलते हुये  विशेष रुप से दिल्ली से आई हुई केदार नाथ अग्रवाल की नातिन  सुनीता अग्रवाल  ने पारिवारिक  के कारण  केदार जी  के आवास  केदार शोध पीठ  की को देखकर चिन्ता व्यक्त की  मकान के अन्दर जाने का रास्ता ट्क खडे़ करके बन्ंद कर दिया गया था यह देख कर उनकी आंखों में आंसू गये इस अवसर पर उन्होंने कहा मेरे नाना केदार नाथ अग्रवाल में देश दुनियां इतना मान सम्मान है लेकिन उनके परिजनों व्दारा उनके मकान की यह दुर्गति की जा रही  हैं इस अवसर बोलते हुये इस आयोजन के अध्यक्ष बी0डी0 मिश्र ने कहा आज 75 साल पहले की स्थितियां तो नहीं है  लेकिन दुखद यह है कि हमारे गांवों का जीवन  ठहरा ही क्यों रह गया इस पर गहन चिन्तन व विमर्श की जरुरत है      

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
योगेश श्रीवास्तव
प्रलेस इकाई  ,सचिव 

                                               डी029 डी0एमकालोनी
                                              सिविल लाइन बांदा -210001


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