कितना ज़रूरी है हस्तक्षेप - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

कितना ज़रूरी है हस्तक्षेप


कितना ज़रूरी है हस्तक्षेप
व्यवस्था में इस दौर 
फटती पेंट के पिछवाड़े
लगे ठेगरे की मानिंद

सोचना निहायत ज़रूरी है 
अटरम-शटरम के आलम में
छानी हुई चाय की मानिंद
फिर बैखोफ लेना चुस्कियां 

कितनी ज़रूरी हो गयी है 
असल की पहचान और 
नक़ल को नकारना यूं
छाजले से कंकडों को पारना

कितना ज़रूरी है ऊंची उठती
हवेलियों को यथासमय छांगना
सौ गालियों को पारते 
शिशुपाल वधने की मानिंद


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-



माणिक,
वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्.  'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.

उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.वे चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी  के रूप में दस सालों से स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर हैं.
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