''सृजन मन से निकलता है। प्रयास करने पर रचनाओं का निर्माण नहीं होता''-कवि ओम पुरोहित कागद - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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''सृजन मन से निकलता है। प्रयास करने पर रचनाओं का निर्माण नहीं होता''-कवि ओम पुरोहित कागद


चूरू. 
राजस्‍थान साहित्‍य अकादमी, उदयपुर के 'लेखक से मिलिए' कार्यक्रम में रविवार को नगरश्री सभागार में हनुमानगढ़ के कवि ओम पुरोहित कागद ने कहा कि सृजन मन से निकलता है। प्रयास करने पर रचनाओं का निर्माण नहीं होता वे तो सायास आती हैं और बहती चलती हैं। एक मायने में कवि का सृजन मनोभावों का प्रकटीकरण ही होता है। हिन्‍दी साहित्‍य संसद की सहभागिता वाले इस आयोजन में बोलते हुए कवि ओम पुरोहित कागद ने कहा कि उनके लेखन में इतने उतार-चढाव रहे हैं कि उन्‍हें वे कई स्‍तरों में समझने की कोशिश करते रहते हैं। तीन कालखंडों में रचनाओं को विभक्‍त करते हुए अकादमी के सुधीन्‍द्र पुरस्‍कार से सम्‍मानित कवि कागद ने कहा कि जैसे उनके मन में भाव रहे वैसे रचनाओं के स्‍तर पर निर्वाह हुए।पुस्‍तक 'थिरकती है तृष्‍णा' से अपने अकाल चित्रों को जब कागद ने प्रस्‍तुत किया तो श्रोता भावविभोर हो गए। कागद ने पीलीबंगा पर केन्द्रित अपनी रचनाओं को पाठ कर साक्षात जींवतता प्रस्‍तुत की।

कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए साहित्‍यकार भंवरसिंह सामौर ने कहा कि रचनाकार जिन क्षणों को जीता है उन्‍हीं में घुलमिलकर सृजन करता है। कवि निज को प्रस्‍तुत नहीं करता अपितु वह तो सर्व को आकार देता है। तभी तो पाठक एवं श्रोताओं को लगता है कि कवि हमारी बात कह रहा है।मुख्‍य अतिथि के रूप में बोलते हुए बालिका महाविद्यालय चूरू के निदेशक सोहनसिंह दुलार ने कहा कि जहां विसंगति होती है कवि के प्रहार वहीं होते हैं और यही वजह कि कवि स्‍थानीयता की सीमाएं लांघ जाता है और सर्वदेशीय घोषित होता है।

कार्यक्रम में हिन्‍दी साहित्‍य संसद के अध्‍यक्ष और कवि प्रदीप शर्मा ने कहा कि राजस्‍थान साहित्‍य अकादमी धन्‍यवाद की पात्र है कि उन्‍होंने ऐसे कवि का नाम सुझाया जो कि वाद और विमर्शों से परे जन का कवि है।अतिथियों द्वारा मां सरस्‍वती की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण से शुरू हुए कार्यक्रम में हिन्‍दी साहित्‍य संसद के सचिव सुनीति कुमार शर्मा ने स्‍वागत भाषण दिया। कवि ओप पुरोहित कागद का साहित्‍यकार नीरज दइया द्वारा लिखित परिचय विरेन्‍द्र लाटा ने प्रस्‍तुत किया। धन्‍यवाद कार्यक्रम संयोजक विजयकांत शर्मा ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. सुरेन्‍द्र सोनी ने किया।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

दुलाराम सहारण
राज्य के चुरू जिले में प्रमुख रूप से सक्रीय सामाजिक संस्थान प्रयास के अध्यक्ष है और एक प्रखर संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.वे पेशे से वकील हैं.
,drsaharan09@gmail.कॉम
चुरू,राजस्थान
9414327734
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