Latest Article :
Home » , , » गीत:-शमशिरो पे गर्दन रख दी

गीत:-शमशिरो पे गर्दन रख दी

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, सितंबर 02, 2011 | शुक्रवार, सितंबर 02, 2011



शमशिरो पे गर्दन रख दी आजादी की अंधयारो  में
भारत माँ चीत्कार रही हे सत्ता के गल्यारो में
भूखा श्रम हे भूखी धरती भूखा बैठा किसान हे
सोना उगलती भूमि को किया जालिमो ने वीरान हे
विकास के नाम पे लूट मची हे भ्रस्त हुआ प्रधान हे
भूमि बेच कर किसान बैठा दुखी होकर  मेंखाने में
शमशिरो पे गर्दन रख दी आजादी की अंधयारो  में
भारत माँ चीत्कार रही हे सत्ता के गल्यारो में ||
 
 
भ्रस्टआचार सदाचार हुवा हे  बेईमानी हुई जवान हे
लोकतंत्र घायल हुवा हे हिटलर हुवा दीवान हे
रास्ट्र वादी विदेशी  हुवा हे विदेसी बने  प्रधान हे
देश भक्तो पे डंडे बरसाए रात के अंधयारो  में
शमशिरो पे गर्दन रख दी आजादी की अंधयारो  में
भारत माँ चीत्कार रही हे सत्ता के गल्यारो में ||
 
 
सीमा पे शहीद हो रहे  भारत माँ के  जवान हे
कारागर में बिरयानी खाता आतंकवादी शेतान हे
भ्रष्ट नेताओ के बल पर ही  मेरा भारत महान हे
दुश्मन घुस कर बैठ रहा हे भारत की  सीमाओं में ,
शमशिरो पे गर्दन रख दी आजादी की अंधयारो  में
भारत माँ चीत्कार रही हे सत्ता के गल्यारो में ||


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

 राजेश भंडारी 'बाबू' 104,
 महावीर नगर ,इंदौर 
 फ़ोन-9009502734
 iistrajesh@gmail.com
SocialTwist Tell-a-Friend
Share this article :

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template