Latest Article :
Home » , , , » ''दो संस्कृतियों का दामन थामे हैं राजस्थानी प्रवासी''-सांवरमल मोर

''दो संस्कृतियों का दामन थामे हैं राजस्थानी प्रवासी''-सांवरमल मोर

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, सितंबर 04, 2011 | रविवार, सितंबर 04, 2011

 फतेहपुर-शेखावाटी। 3 सितम्बर,2011

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के पक्ष में अगर सबसे मजबूती से खड़ें हैं तो वे हैं प्रवासी राजस्थानी बंधु। प्रवासी बंधु जहां भी गए अपनी भाषा और संस्कृति का दामन थामे रखा। उनकी यह विलक्षण बात रही कि उन्होंने न केवल अपनी संस्कृति का संरक्षण किया अपितु जहां रहे वहां की लोक-संस्कृति को भी अंगीकार किया। दो संस्कृतियों का दामन थामे जब प्रवासी अपने गांव-शहर आते हैं तो हमें गौरवान्वित कर जाते हैं। सही मायने में प्रवासी राजस्थानी ही साहित्य-संस्कृति के सच्चे वाहक हैं।

उक्त विचार शनिवार को स्थानीय पंचवटी उद्यान में धानुका सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित साहित्यिक आयोजन में समाजसेवी एवं सीकर के पूर्व जिला प्रमुख-विधायक सांवरमल मोर ने व्यक्त किए। मोर ने कहा कि हम जब भी भाषण देते हैं तो राजस्थानी से परहेज करते हैं जबकि यहां का लक्ष्मीनिवास मितल जब अपने शहर आता है तो राजस्थानी में भाषण देता है। मोर ने कहा कि खुशी की बात है कि प्रवासी राजस्थाानी साहित्य के प्रोत्साहन में लगे हैं परंतु उन्हें साहित्यकारों के आर्थिक संवर्धन की ओर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि एक ऐसा स्थाई कोष बने, जिसके माध्यम से विपन्नता में जी रहे साहित्यकारों की मदद की जा सके। उन्होंने इस कोष हेतु अपनी ओर से मुक्त-हस्त सहयोग देना का वादा किया।

मां सरस्वती के सामने दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुए कार्यक्रम में सूरतगढ़ के युवा साहित्यकार सतीश छिम्पा को वर्ष 2010 का एवं चूरू के रचनाकार कुमार अजय को वर्ष 2011 का श्रीमती बसंती देवी धानुका युवा साहित्यकार पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार सतीश छिम्पा को ‘डांडी सूं अणजाण’ और कुमार अजय को ‘संजीवणी’ पुस्तक पर प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप प्रत्येक को 11-11 हजार रूपये नगद, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद सांवर शर्मा ने कहा कि बात संस्कृति के अंगीकार की नहीं है बल्कि बात उनके स्वरूप को बचाए रखने की है। उन्होंने शिक्षा में बदलते लक्ष्यों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि आज मानदण्ड नये रूप में सामने आए हैं। ऐसी सूरत में हमें पुराने को बचाने हेतु संग्रहालय की ओर लौटना होगा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए साहित्य संसद के अध्यक्ष शिशुपाल सिंह नारसरा ने कहा कि साहित्य को समर्पित ऐसे आयोजनों से वातावरण निर्मित होता है वहीं युवा प्रतिभाओं को सम्मान से शक्ति प्राप्त होती है। 
कार्यक्रम में बैजनाथ पंवार, भामाशाह राधेश्याम धानुका, शंभूप्रसाद खेड़वाल, केसरी कांत केसरी, दुलाराम सहारण ने भी विचार व्यक्त किये।  धानुका सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी नरेन्द्र कुमार धानुका ने स्वागत भाषण देते हुए ट्रस्ट की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार डॉ. चेतन स्वामी ने किया।
इस दौरान आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि भंवर सिंह सामौर, गजानन वर्मा, रामगोपाल शास्त्री, सत्यनारायण इंदौरिया, काशीराम शास्त्री, गोविंद गहलोत, भागीरथसिंह झाझड़िया, सतीश शांडिल्य, सुनीता भड़िया, कुमारी संजना, श्याम उपाध्याय, नलिन सर्राफ, भंवरलाल महरिया, कपिल देवराज आर्य आदि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्र में बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं नागरिक उपस्थित थे। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

दुलाराम सहारण
राज्य के चूरू  जिले में प्रमुख रूप से सक्रीय सामाजिक संस्थान प्रयास के अध्यक्ष है और एक प्रखर संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.वे पेशे से वकील हैं.
,drsaharan09@gmail.कॉम
चुरू,राजस्थान
9414327734
SocialTwist Tell-a-Friend
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template