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कलामंडलम गोपी जी चित्तौड़ में

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, सितंबर 08, 2011 | गुरुवार, सितंबर 08, 2011


पूरी तरह से मलयालम भाषा में होने वाले इस आयोजन को मैंने कई बार सजीव रूप में देखा है.कहीं न कहीं इस बात का ख़ास ध्यान रखा जाना चाहिए कि जो बच्चे बहुत आगे बैठ कर इसे देख पाए तो उनका भला हो सकता है.उनक के लिए यही बेहतर होगा क्योंकि इस नृत्य में बहुत अधिक रूप से प्रस्तुति का प्रभाव आँखों के अभिनय पर निर्भर करता है.कथानक पहले ही समझा दिया जाता है. एक तरह से नाट्य रूप में होने वाला अभिनय ही होता हैं. जहां कभी कभी बीच में भी संवाद होते हैं.


स्पिक मैके शाखा की चित्तौड़ इकाई द्वारा इस बार की विरासत आयोजन कड़ी में नौ सितम्बर का दिन दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथकली के नाम रहेगा.अपनी प्रकृति के अनुसार इस आन्दोलन में देशभर के नामचीन कलागुरु देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर हमारी विरासत का प्रचार प्रसार कर रहे हैं.प्राचार्य अश्रलेश दशोरा के अनुसार शुक्रवार को सुबह साढ़े आठ बजे सैंथी स्थित सेन्ट्रल अकादेमी सीनियर सेकंडरी स्कूल में होने वाले कार्यक्रम को लकर बच्चों में खासा उत्साह हैं.इधर प्राचार्य कर्नल एच.एस.संधू ने बताया कि दोपहर के तीन बजे सैनिक स्कूल में  ये आयोजन होगा.ख़ास तौर पर मुखौटे लगाकर किया जाने वाले इस नृत्य को गहरे रंगों का मेकअप  ज्यादा आकर्षक बनाता है.


स्पिक मैके के दक्षिणी राजस्थान समन्वयक जे.पी.भटनागर ने बताया कि इन प्रस्तुतियों हेतु केरल के गुरु कलामंडलम गोपी अपने दल स्थित प्रस्तुति देंगे.पुराणों की कहानियों को अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों के मानस पटल पर उकेरने में महारथ हासिल गोपी पहले भी नब्बे के दशक में चित्तौड़ आ चुके हैं.उन्नी सौ सैंतीस में जन्मे चाहोंत्तर वर्षीय ओपी ने इस नृत्य की शिक्षा गुरु रमणकुट्टी नैयर से ली है.अपने पिछले तीस साल के सफ़र में वे बहुत सशक्त नर्तक के रूप में उभर कर संस्था पुरुष बने हैं.वे ख़ास तौर पर भीम,अर्जुन और नल के अभिनय को करते रहे हैं.यहाँ कला मंडलम स्कूल का नाम है जहां से शिक्षित सभी कलाकार अपनी नाम के आगे ये शब्द जोड़ कर नाम बताते हैं.कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो गयी है. 


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


माणिक,
वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्.  'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.

उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.वे चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी  के रूप में दस सालों से स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर हैं.
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