ज़ल्द आ रही है महाराणा प्रताप पर दस्तावेज़ युक्त फिल्म - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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ज़ल्द आ रही है महाराणा प्रताप पर दस्तावेज़ युक्त फिल्म


उदयपुर 17 सितम्बर 2011
राजस्थानी आन-बान-शान व स्वाभिमान के महानायक, मेवाड़ की माटी के लाल और इस देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी महाराणा प्रताप पर पहली बार कोई फिल्म बनाई गई हैं।“महाराणा प्रतापः प्रथम स्वतंत्रता सेनानी” नामक यह फिल्म राणा प्रताप के अनछुए पहलुओं पर तो प्रकाश डालेगी ही, समग्र भारत के लोगों को राष्ट्र व संस्कृति की रक्षा के लिए भी प्रेरित करेगी। यह कहना हैं फिल्म के निर्माता-निर्देशक डॉ. प्रदीप कुमावत का है.।

डॉ. कुमावत ने बताया कि भारत के हजारों-हजार वर्षों के इतिहास में प्रताप ऐसे पहले महाराणा हुए हैं, जिन्होंने अपने धर्म व स्वाभिमान की रक्षा की खातिर अपना ऐश्वर्य अपने महल और तमाम सुख-सुविधाओं का त्याग कर जंगल-जंगल भटकना तो स्वीकार कर लिया, लेकिन पराधीनता को अंगीकार नहीं किया। ऐसे महानायक पर फिल्म बनाने का सपना उन्होंने वर्षों से संजो रखा था। लिहाजा सालों के शोध, अध्ययन, कड़ी मेहनत तथा कई लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग के बाद यह नायाब कृति अब बन कर तैयार हो गई हैं, जिसे शीघ्र ही रिलीज कर दिया जाएगा।

इस फिल्म में नारायणसिंह सिसोदिया (महाराणा प्रताप), कुलदीप चतुर्वेदी (अकबर), विजय सिंह पंवार (उदय सिंह), ममता सुखवाल (प्रताप की मां), धरा पालीवाल (भटियानी रानी) व राजेन्द्रसिंह राव (कृश्ण दास) मुख्य भूमिका में हैं।  इसके म्यूजिक डायरेक्टर डॉ. प्रेम भण्डारी हैं जिन्होंने अपने सुमधुर संगीत से फिल्म में जान डाल दी हैं। जहाँ तक गीतों का सवाल हैं अधिकतर गाने पारंपरिक हैं, लेकिन राजस्थान के मूर्धन्य कवि माधव दरक की जगप्रसिद्व रचना, “वो महाराणा प्रताप कठै.....” को भी फिल्म में सम्मिलित कर लिए जाने और मशहूर  गायक जगजीत सिंह, साधना सरगम, भूपेन्द्र व सांवरिया फेम शैल हाड़ा द्वारा अपनी आवाज दिए जाने से इसके सातों के सातों गीत गुनगुनाने योग्य बन पड़े हैं।

साथ ही प्रताप से पूर्व उनके पिता उदयसिंह ने किन परिस्थितियों में चित्तौड़ का त्याग किया, कैसे गोगुन्दा और उदयपुर को राजधानी बनाया इमाटी के और कैसे हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप ने मानसिंह के हाथी पर अपने चेतक से चढ़ाई कर भाले से वार किया जिससे महावत तो मारा गया परन्तु भयभीत मानसिंह होदे में जा छिपा। कुछ ऐसे ही प्रसंगो को फिल्म में बहुत ही प्रभावी ढंग से उकेरा गया हैं। सबसे खास बात यह  हैं कि इस फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर मुगल सेना के साथ युद्ध में महाराणा प्रताप को विजयी घोशित किया गया हैं, जिससे इतिहास की जानकारी रखने वालों के लिए यह फिल्म एक ऐतिहासिक इस्तावेज साबित होगी। कुल मिलाकर सामाजिक सरोकार की परम्परा में आलोक संस्थान की ओर से समाज को एक बहुत बड़ी देन होगी फिल्म “महाराणा प्रतापः प्रथम स्वतंत्रता सेनानी” ।


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
डॉ. प्रदीप कुमावत
(अलोक संस्थान,उदयपुर के निदेशक होने के साथ ही मेवाड़ के सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्ता,अभिनय में रुचिशील व्यक्तित्व हैं.)
Mob: 9414158880
website: http://www.alokschool.org
facebook: facebook.com/pratapthefilm
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