'मीरा की कविता का स्त्री पाठ' में कवि-कथाकार अनामिका - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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'मीरा की कविता का स्त्री पाठ' में कवि-कथाकार अनामिका


हिन्दी साहित्य सभा
हिन्दू कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय



दीपक सिन्हा स्मृति व्याख्यानमाला

' मीरा की कविता का स्त्री पाठ'

वक्ता- अनामिका, सुप्रसिद्ध कवि- कथाकार

समय-10.30बजे
दिनांक- 6 सितम्बर 2011
स्थान- महाविद्यालय संगोष्ठी कक्ष

समारोह में आपकी उपस्थिति प्रार्थित है.
 
रीतिका    डॉ. रामेश्वर राय 
महासचिव                      परामर्शदाता 
हिन्दी साहित्य सभा

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

पल्लव
युवा आलोचक और 'बनास' पत्रिका के सम्पादक
सहायक आचार्य,हिंदी विभाग,हिन्दू कोलेज,दिल्ली
pallavkidak@gmail.com 
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(मशहूर कवयित्री औऱ लेखिका अनामिका का ये कथन कि इंटरनेट ने स्त्रियों के बीच के संदर्भकीलित चुप्पियां दूर करने का काम किया है। स्त्री-भाषा जो कि अपने मूल रुप में ही संवादधर्मी भाषा है,जो बोलती-बतियाती हुई विकसित हुई है,एक-दूसरे के घर आती-जाती हुई,बहनापे के तौर पर विकसित हुई है,इंटरनेट पर स्त्रियों द्वारा लेखन,स्त्री सवालों पर की जा रही रचनाएं उसकी इस भाषा-संभावना को और विस्तार देती है,स्त्री-मुक्ति और संवादधर्मिता के स्पेस के विस्तार में इंटरनेट की भूमिका को नये सिरे से परिभाषित करती है।- सम्पादक  

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