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बाल साहित्य पर केन्द्रित सलूम्बर सम्मेलन की लम्बी रपट

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, सितंबर 30, 2011 | शुक्रवार, सितंबर 30, 2011


सलूम्बर 
साहित्यिक संस्था सलिला द्वारा राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के सहयोग से दो दिवसीय साहित्य सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ । बाल साहित्य पर केन्द्रित इस सम्मेलन में भाग लेने के लिये देश के कई प्रांतों से प्रतिनिधि बालसाहित्यकार एवं कवि आए। इनमें प्रमुखतः डा. राष्ट्रबंधु (कानपुर),  के. के. अस्थाना (संपादक, देवपुत्र, इंदौर), श्रीमती कल्पना जैन (संपादक, बच्चों का देश)  उदय किरौला (बालप्रहरी-उत्तराखंड) डा. रमाकांत शर्मा (जोधपुर), श्रीमती कुसुमलता सिंह (नई दिल्ली),  किशनलाल दाधीच,  गोविंद शर्मा (संगरिया),  अंजीव अंजुम (दौसा)  दीनदयाल शर्मा (टाबर टोली, हनुमानगढ), श्रीमती कुहेली भट्टाचार्य (नई दिल्ली), जयपुर से दिनेश ठाकुर, नई दिल्ली एन.बी.टी. से पंकज चतुर्वेदी उदयपुर से डा. भगवतीलाल व्यास, श्रीमती शकुन्तला सरूपरिया,  पुरूषोत्तम पल्लव, भोपाल से डा. महेश सक्सेना, श्रीमती प्रीति खरे,  प्रवीण खरे, जोधपुर से श्रीमती पद्मजा शर्मा,  दिनेश सिंदल, पटियाला से डा. दर्शन सिंह आशट, कानपुर से डा. शशि शुक्ला, सुशील पांडे, विष्णु मित्र, अनिल अवस्थी, अहमदाबाद से रजनी मोरवाल, भीलवाड़ा से श्याम सुदंर सुमन तथा रायपुर से सत्यनारायण सत्य, देशबंधु शाहजहांपुरी आदि उपस्थित थे।

24 सितम्बर को प्रातः प्रारंभ उद्धाटन सत्र में 
मुख्य अतिथि डा. रमाकांत शर्मा, अध्यक्ष माणिक आर्य (केन्द्र निदेशक, उदयपुर आकाशवाणी), विशिष्ट अतिथि गोविंद शर्मा, किशन दाधीच और  हरीश दोषी थे। इस सत्र में अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण के साथ असिलस अध्यक्ष ननदलाल परसारामाणी ने स्वागत वक्तव्य दिया। सलिला की संयोजिका और विख्यात साहित्यकार श्रीमती विमला भंडारी ने 7 दिवसीय इस कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए 21 वीं सदी का बाल साहित्य विषय पर होने वाले पत्रवाचन की रूपरेखा बताई। इसी सत्र में ‘हमारी पत्रिकाएं और बालसाहित्य की चुनौतियां’ विषय पर ‘बच्चों का देश’ की संपादक श्रीमती कल्पना जैन ने अपना पत्रवाचन किया। बाल साहित्य के दो पहलू होते है - 1. बच्चों पर लेखन 2. बच्चों द्वारा लिखा जाय। बालक जितना पुस्तकों के बीच रहेगा उतना ही वह साहित्य के प्रति आकर्षित होगा। बच्चों का गर्भ से ही सीखना प्रारंभ हो जाता है। 

उनके पत्र पर गोविंद शर्मा ने कहा कि हमारे प्रयास पाठकों को पत्रिकाओं के पास लाने का होना चाहिये। सत्र के अध्यक्ष डा. रमाकांत शर्मा एवं मुख्य अतिथि माणिक आर्य, डा. राष्ट्रबंधु ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस सत्र का संचालन श्रीमती रजनी मोरवाल ने किया।

दूसरे सत्र में 
‘सृजन के सरोकार और किताबों में बचपन’ विषय पर पत्र वाचन द्वारा किया गया। श्रीमती कल्पना जैन एवं  चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत पत्रों में व्यक्त विचारों पर श्रोताओं द्वारा अपना मत व्यक्त  किया गया।दूसरे सत्र में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तकों एवं श्रीमती विमला भंडारी द्वारा रचित बाल उपन्यास ‘सुनहरी एवं सिमरन’ व श्री सत्यनारायण ‘सत्य’ की ‘सही फैसला’ का विमोचन किया गया। नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से आए श्री पंकज चतुर्वेदी ने ‘छोटी चींटी के बड़ी दावत’, ‘विज्ञान और आप’, ‘चित्र ग्रीव’, ‘इसरो की कहानी’, ‘सुनो कहानी’ आदि पुस्तकों का लोकार्पण करवाया। उन्होंने सभी पुस्तकों की दो-दो तीन-तीन बाल पाठको से समीक्षा करवाई। अध्यापकों ने भी इन पुस्तकों पर अपने विचार व्यक्त किये। एक पुस्तक ‘छोटी चींटी की बड़ी दावत‘ की लेखिका इस विमोचन के लिये विशेष रूप से दिल्ली से आईं। लोकार्पण एवं समीक्षा की यह प्रक्रिया सभी को पसंद आई। पुस्तकों की समीक्षा करने वाले विभिन्न स्कूलो के छात्रों को बाद में एनबीटी की ओर से भेंटस्वरूप पुस्तकें दी गई। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर और नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नई दिल्ली तथा तनिमा की ओर से पुस्तकों एवं पोस्टरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

रात्रि में हाड़ी रानी के महल में पुष्पांजलि, पुरस्कार वितरण, सलिला की स्मारिका का विमोचन एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उदयपुर के सांसद रघुवीर सिंह मीणा, अध्यक्ष, राजस्थान के पर्यटन राज्यमंत्री श्री राजेन्द्र सिंह गुढा, विशिष्ट अतिथि, सलूम्बर की प्रधान शान्तादेवी मीणा, राजेन्द्रसिंह शेखावत, मनोहरसिंह कृष्णावत आदि उपस्थित हुए। जिनका स्थानीय लोक ढ़ोल नर्तकों द्वारा स्वागत किया गया। श्रीमती विमला भंडारी ने मान्य अतिथियों को हाडी रानी के महल का अवलोकन करवाया तथा प्रांगण में स्थापित विशाल हाड़ीरानी प्रतिमा पर सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों ने पुष्प अर्पित किए। मंच पर श्री जगदीश भंडारी ने माल्यार्पण कर मंत्री महोदय का स्वागत किया।

सलिल प्रवाह नामक स्मारिका का लोकापर्ण 
इसी समारोह साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। सम्मान की पहली कड़ी में डा राष्ट्रबंधु द्वारा स्थापित भारतीय बाल साहित्य संस्था कानपुर ने बाल साहित्य के रचनाकारों को सम्मानित/पुरस्कृत किया।  डा. राष्ट्रबंधु की यह संस्था पचास वर्षो से साहित्कारों को सम्मानित करती आ रही है। उन्होंने श्रीसुशील पाझडे, कानपुर, उदय किरौला, अल्मोड़ा, प्रीतिप्रवीन खरे, भोपाल, डाॅ. देशबंधु शाहजहांपुरी एवं कुहेली भट्टाचार्य को सम्मानित किया।विमला भंडारी के आयोजन में सलिला की ओर से भी देश के विभिन्न स्थानों के साहित्यकारों को सम्मानित पुरस्कृत किया गया। इनमें डा. राष्ट्रबंधु, गोविंद शर्मा, डा. दर्शन सिंह आशट, शकुंतला स्वरूपरिया, किशन दाधीच, कृष्ण कुमार आष्ठाना एवं वेदव्यास सम्मिलित है।

समारोह में सांसद मीणा और राज्यमंत्री श्री राजेन्द्र सिंह गुढा ने श्रीमती विमला भंडारी के आयोजन की प्रशंसा की तथा उनकी मांग पर आश्वासन किया कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार से इस महल के जीर्णोद्धार के लिये पर्याप्त राशि दिलवाएंगे तथा इसे पर्यटन के मान चित्र पर प्रमुख स्थान दिलवाएंगे। बाद में प्रारंभ हुए कवि सम्मेलन मे देश के हिन्दी एवं राजस्थानी के कवियों ने अपनी रचनाओं के पाठ से श्रोताओं का भरपूर मनोरंन किया। मंच से लगभग तीन दर्जन कवियों ने 3000-35000 श्रोताओं के बीच काव्य पाठ किया जो देर रात्रि तक चला। गजलकार दिनेश ठाकुर, गीतकार किशन दाधीच, पुरूषोत्तम ‘पल्लव’, दिनेश सिंदल, पद्मजा शर्मा, रजनी मोरवाल, दिवा मेहता, नीरज शर्मा, खुर्शीद नवाब, पं. नंद किशोर निर्झर, डा. शशी शुक्ल, उपेन्द्र ‘अणु’, दौलतराम मरणधर्मा कवियों के साथ श्रीमती शकुन्तला सरूपरिया ने अपने कुशल संचालन से श्रोताओं को बांधे रखा।

दूसरे दिन 
मुख्यअतिथि के रूप में राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक एवं साहित्यकार-पत्रकार श्री वेद व्यास मुख्य अतिथि थे। उन्होंने बालसाहित्य पर समय के अनुकूल अपने गंभीर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य हमारे जीवन की मुख्य धारा से विस्थापित हो चुका है। यह विलाप का समय नहीं है,बल्कि हमें चेतना की मशाल को आगे बढाना है। आज हमारा रचनाकार होना ही काफी नहीं है बल्कि हमें हमारे समाज, संस्कृति एवं अपनी जमीन को समझना आवश्यक है। उन्होंने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि “आज हम उलट बांसी के समाज में जी रहे हैं जहाँ एक व्यक्ति बीस रूपये में अपने दिन का गुजारा करता है। वहां हम उससे साहित्य की बात करना चाहते हैं लेखक आज समाज की किसी पीडा में सम्मिलित नहीं है। आज मुनाफे का समाज बनता जा रहा है और इसी कारण हमें यह नुकसान उठाना पड रहा है। 

देश में गरीब विरोधी सत्ता व्यवस्था है। उन्होंने मिडिया पर प्रहार करते हुए कहा कि मिडिया को देश और समाज से क्या लेना-देना। वह मुनाफे में मोक्ष को देखता है। उन्होंने बच्चों एवं बाल साहित्य पर टिप्पणी करते हुए कहा , आज हमने बचपन को बचपन के सपनों को एक मजाक बना लिया है। विदेशी टी.वी. चैनल्स ने बच्चों का अपहरण कर लिया है। बाल साहित्य में आज बच्चा सिर्फ संदर्भ के लिए रह गया है। यही हाल रहा तो बाजारवाद के इस युग में बाल साहित्य की और अधिक दुर्गति होगी। अतः आज समाज के संस्कार निर्माण का कार्य स्वयं साहित्यकार को करना है। बाल साहित्यकारों को लिखने से पहले विश्व के प्रमुख साहित्यकारों को पढना भी चाहिए। उ़न्होंने राजस्थान में बाल साहित्य की निरंतर रचना में लगे लेखकों में श्री गोविंद शर्मा, अंजीव अंजुम और दीनदयाल शर्मा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बालसाहित्य की रचनाकार के अलावा श्रीमती विमला भंडारी इतिहास लेखक भी हैं। 

‘सलूंबर का इतिहास’ नामक उनकी पुस्तक संदर्भ ग्रंथ के रूप में जानी जाती है। उन्होंने कहा कि हमें विश्व के इतिहास के साथ ही अपने गांव कस्बे का इतिहास भी पढना चाहिए। यह तभी संभव होगा कि लेखक प्रयास करें और सभी अपने गांव कस्बों का इतिहास लिखें, इसी सत्र में भोपाल से आई श्रीमती प्रीति प्रवीण खरे ने ‘मीडिया, समाज और बालसाहित्य’ विषय पर पत्रवाचन किया। उनके विशद विवेचन पर श्री दीनदयाल शर्मा आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। इस सत्र का संचालन बालसाहित्य के युवा हस्ताक्षर अंजीव अंजुम ने कुशलतापूर्वक किया तथा अंत में श्रीमती विमला भंडारी ने सभी को धन्यवाद दिया। उपस्थित साहित्यकारों ने भी सम्मेलन की सफलता के लिये उन्हें तथा सभी आयोजनों की सुव्यवस्था के लिये जगदीश भंडारी को बधाई दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री पंकज चतुर्वेदी, नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली ने की। विशिष्ट अतिथि श्री ऋषभदेव के कवि श्री उपेन्द्र अणु एवं श्री नाथद्वारा से पधारे कहानीकार श्री माधव नागदा रहे। इस अवसर पर समस्त सलिला परिवार सलूम्बर ने मुख्य अतिथि श्री वेद व्यास को स्मृति चिह्न, अभिनन्दन पत्र एवं सम्मान भेंट की।समापन सत्र से पूर्व बाल साहित्यकार सम्मेलन का तृतीय पत्र-वाचन सत्र भी पूर्ण हुआ। तृतीय सत्र में भोपाल मध्य प्रदेश की साहित्यकार श्रीमती प्रीती प्रवीण खरे ने ‘मीडिया, समाज और बाल साहित्य’ विषय पर अपना पत्र वाचन किया। सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पंजाबी बाल साहित्यकार दर्शन सिंह आशट थे। सत्र की अध्यक्षता ‘आज का बचपन’ बाल पत्रिका के सम्पादक श्री महेश सक्सेना ने की। इस सत्र के विशिष्ठ अतिथि श्रीमती कल्पना जैन जयपुर एवं श्री उदय किरौला अल्मोडा रहे।

राजस्थान साहित्य अकादमी, नेशनल बुक ट्रस्ट, तनिमा पत्रिका के नारी विषयक कोलाज एवं सलिला की ओर से आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी न केवल स्कूली बच्चों, शिक्षकों एवं अभिभावकों, साहित्यकारों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।इस दो दिवसीय सम्मेलन में राजस्थान के उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसंमद, जोधपुर, जयपुर, दौसा, हनुमानगढ़, सहित देश के विभिन्न राज्यों पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, गुजरात, नई दिल्ली से आये लगभग 65 साहित्यकारों ने भागीदारी की।

बच्चों की लेखन कार्यशाला का उद्घाटन 
उत्तराखण्ड से प्रकाशित बाल पत्रिका ‘बाल प्रहरी’ तथा सलिला की ओर से आयोजित 5 दिवसीय बच्चों की लेखन कार्यशाला के प्रथम दिन डा. राष्ट्रबंधु ने बच्चों को कविता लेखन के गुर सिखयें। बालप्रहरी के उदय किरौला एवं रतनसिंह किरमोलिया ने बच्चों को विभिन्न गतिविधियाँ करायी। कार्यशाला के प्रारंभ में उद्घाटन समारोह मुख्य अतिथि श्री कैलासदान सांदू, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई विभाग ने बच्चों को गणित के सरल टिप्स सिखाये। अघ्यक्षता करते हुए जड़ावचन्द जैन ब्लाक शिक्षा अधिकारी ने शिवाजी जीवन से जुड़ा प्रेरक प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर जयप्रकाश आगाल, जगदीश भंडारी, भगवती चैबीसा, मंयक भट्ट, ने अपनी रचनाएं सुनाई। विमला भंडारी ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज का बालक ही कल का नागरिक है। उच्च शिक्षा के साथ साथ साहित्यिक संस्कार पाकर ही बालक राष्ट्रनिष्ठ , कर्तव्यनिष्ठ एवं सच्चा नागरिक बन सकता है। इस पवित्र अनुश्ठान के लिएअभ्यागतजनों के प्रति आभार प्रकट किया।

अतिथियों का स्वागत विघालय के प्रधान संचालक लव व्यास ने किया। संचालन चन्द्रवीरसिंह भाटी ने किया।कार्यक्रम की समीक्षा उदयपुर के गीतकार  किशन दाधीच ने की। इस सम्मेलन की संयोजिका विमला भण्डारी ने समापन पर सभी को आभार ज्ञापित किया एवं कल से प्रारंभ होने वाली 5 दिवसीय कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। आभार राजस्थान साहित्य अकादमी से आये प्रकाश नेभनानी ने ज्ञापित कर इस सम्मेलन की समाप्ति की घोषणा की।

रिपोर्ट-रामेश्वर ‘उदास’,सलिला, सलूम्बर


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-



विमला भंडारी 

कहानीकार, इतिहासकार,बाल साहित्यकार होने

 के साथ ही जन प्रतिनिधि भी हैं.


  • भंडारी सदन, पैलेस रोड, सलूम्बर-313027
    • 9414759359Mobile
    • 2906230695Mobile
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