''हास्‍य और व्‍यंग्‍य के बीच एक महीन सीमा रेखा होती है।''-डॉ.टी.महादेव राव - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

''हास्‍य और व्‍यंग्‍य के बीच एक महीन सीमा रेखा होती है।''-डॉ.टी.महादेव राव


हिन्‍दी साहित्‍य, संस्‍कृति एवं रंगमंच को समर्पित संस्‍था सृजन ने डाबा गार्डेन्‍स के पवन एनक्‍लेव मे हिन्‍दी व्‍यंग्‍य साहित्‍य चर्चा का आयोजन किया। अध्‍यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। स्‍वागत भाषण देते हुए डॉ टी महादेव राव ने व्‍यंग्‍य साहित्‍य चर्चा कार्यक्रम के उदे्दश्‍यों पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा कि व्‍यंग्‍य को साहित्‍य में विधा के रूप में मान्‍यता नहीं मिली जबकि वह हिन्‍दी साहित्‍य में भारतेन्‍दु हरिश्‍चंद्र के समय से आज तक पूरी शिद्दत के साथ विद्यमान है। नीरव कुमार वर्मा ने कहा जिनके लिये लिखा गया है, व्‍यंग्‍य उन पर परोक्षरूप से आघात करता है। हास्‍य और व्‍यंग्‍य के बीच एक महीन सीमा रेखा होती है। लेखकों को इस पर विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है।

सबसे पहले सीमा वर्मा ने अपनी कविता जीवन का सत्‍य और व्‍यंग्‍य में जिंदगी के हर पहलू में व्‍याप्‍त व्‍यंग्‍य पर अपने विचार व्‍यक्‍त किये। श्‍वेता कुमारी ने अपनी रचना फेस बुक के माध्‍यम से आज के मानव की बदलती व्‍यस्‍तता और प्राथमिकताओं पर व्‍यंग्‍यकसा। लेख हिन्‍दी साहित्‍य में हास्‍य व्‍यंग्‍यमें डॉ जी वी वी  रामनारायणा ने उदाहरण सहित विश्‍लेषण प्रस्‍तुत किया।

सीमा शेखर ने अपने लेख लूट सके तो लूट में  भ्रष्‍टाचार की अनंत व्‍यापकता पर सूक्ष्‍म मगर प्रभावी विश्‍लेषण प्रस्‍तुत किया। श्रीमती मीना गुप्‍ता ने लेख जब मैं इन्‍विजिलेशन में गई द्वारा परीक्षाकेंद्रों में व्‍याप्‍त घपले, अनैतिकता पर करारा व्‍यंग्‍य किया। मेरा भारत महान व्‍यंग्‍य कहानी प्रस्‍तुत की बी एस मूर्ति ने जिसमें आम आदमी की भ्रष्‍टाचार के कारण परेशानी को रेखांकित किया गया। अपनी व्‍यंग्‍य कविताएं पति- पत्‍नी’,‘मतदाता और नेता के माध्‍यम से सामाजिक व्‍यंग्‍य प्रस्‍तुत किया लक्ष्‍मीनारायणा दोदका ने।  बैंक अधिकारी के जीवन में आई व्‍यस्‍तता के कारण बिगडते सामाजिक संबंधों पर बीरेंद्र राय ने व्‍यंग्‍य लेख मेरा पेशा पढा। जी एस एन मूर्ति ने अफसर, पति–पत्‍नी विषयों पर व्‍यंग्‍य कविताएं प्रस्‍तुत की। 

कवि की व्‍यथा और अभी भी समय हैशीर्षक की दो कविताओं के माध्‍यम से शकुन्‍तला बेहुरा प्रस्‍तुत हुईं। शर्म तुम कहां हो शीर्षक अपने व्‍यंग्‍य में निर्लज्‍ज होते मनुष्‍यों की प्रवृत्‍ति पर करारा कटाक्ष किया डॉ टी महादेव राव ने ।  डॉ एम सुर्यकुमारी ने अपने व्‍यंग्‍य लेख सर पर बाल न होने पर भी में वृद्धावस्‍था में भी यौवन के सपने देखते  वृद्ध व्‍यक्‍तियों पर व्‍ंयग्‍य कसा। नीरव कुमार वर्मा की कहानी एम एन सी में सी टी सी में  आज की युवा पीढी और बहुराष्‍ट्रीय  कंपनियों पर व्‍यंग्‍य था।

सभी  रचनाओं पर विश्‍लेषणात्‍मक चर्चा की गई। सृजन संस्‍था द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रमों से लेखकों में लिखने की लगन बढ रही हैऐसा  सभी का मत था। इस कार्यक्रम में साहित्‍य अकादमी बाल साहित्‍य पुरस्‍कार विजेता श्रीमती पुण्‍यप्रभा देवी, डी सी शारदा, रामप्रसाद यादव, डॉ जी रामनारायण, मीनाक्षी देवी, विजय कुमार राजगोपाल, सीएच ईश्‍वर राव सहित कई अन्‍य भी सक्रिय रूप से सम्‍मिलित हुए। सृजन के सचिव डॉ टी महादेव राव के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम समाप्‍त हुआ।  


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-, डॉ.टी.महादेव राव,सृजन के सचिव के हवाले से 
SocialTwist Tell-a-Friend

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here