''सांभरिया की कहानियों के पात्र दया की भीख नहीं मांगते, वे अपने अधिकार की बात करते हैं /''-संजीव - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

''सांभरिया की कहानियों के पात्र दया की भीख नहीं मांगते, वे अपने अधिकार की बात करते हैं /''-संजीव


चूरू, 24 सितंबर,2011

हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक रत्नकुमार सांभरिया को उनकी पुस्तक ‘खेत और अन्य कहानियां’ के  लिए वर्ष 2011 का घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार प्रयास संस्थान की ओर से शनिवार को चूरू के सूचना केंद्र में आयोजित समारोह  प्रदान किया गया। प्रख्यात गणितज्ञ डॉ घासीराम वर्मा की अध्यक्षता में हुए समारोह में ख्यातनाम कथाकार-संपादक संजीव, साहित्यकार अजय नावरिया व अन्य अतिथियों ने उन्हें पुरस्कार स्वरूप शॉल, श्रीफल, प्रमाण पत्रा, प्रतीक चिन्ह व पांच हजार एक सौ रुपए का चैक प्रदान किया। 

समारोह के मुख्य अतिथि, प्रख्यात कथाकार एवं जनचेतना के प्रगतिशील मासिक ‘हंस’ के कार्यकारी संपादक संजीव ने इस मौके पर कहा कि रत्नकुमार सांभरियां की कहानियां शोषित समाज की संवेदना के साथ-साथ उनके आक्रोश को अपना आधार बनाती हैं। उन्होंने कहा कि सांभरिया के रचना संसार में आंचलिकता है और ये ठेठ गांव की भाषा में अपनी बात कहते हुए गांव के छोटे-छोटे डिटेल्स देते हैं। उन्होंने कहा कि कोई गांव की बात करता है तो उसमें क्या गलत है, जब हमें शहर की बातों से कोई गुरेज नहीं है। सांभरिया की कहानियों के पात्र दया की भीख नहीं मांगते, वे अपने अधिकार की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि कहानी यथार्थ को बदलने की पहली कोशिश करते हुए यथार्थ के समानांतर एक सृष्टि की रचना करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से लोगों की वैयक्तिक उन्नति तो हो रही है, लेकिन उन उन्नत लोगों को समाज की दशा बदलने के लिए भी काम करना चाहिए। उन्होंने साहित्यप्रेमियों का आह्वान किया कि वे अच्छे साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए काम करें। 

समारोह के विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात कथाकार एवं जामिया मिलिया इस्लामिया के सहायक प्रोफेसर अजय नावरिया ने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया दलित विमर्श से कहीं आगे दलित चेतना के लेखक हैं।एक ही समय में एक व्यक्ति वैयक्तिक भी होता है और सामाजिक भी लेकिन जब तक हम जातिवाद के पिंजरे बाहर नहीं निकलेंगे, एक आधुनिक और बेहतर समाज की संरचना हो ही नहीं सकती। समाज को बदलने के लिए हमें अपने जातिवादी संस्कारों व परंपराओं से बाहर आना ही होगा। उन्होंने कहा कि एक जाति के हित को जब तक दूसरी जाति का अहित समझा जाएगा, तब तक व्यवस्था में बदलाव की बात बेमानी है। क्रांति तभी होगी, जब सबके हित और अहित एक हो जाएंगे। उन्होंने कहा बुद्धिजीवी ही जब जातिवादी हो जाता है, तो वह पूरी कौम को नष्ट करने का षडयंत्रा रचता है। उन्होंने कहा कि भारत में सभी जातियों ने अपने अंदर भी एक अनोखा भेदभाव का ढंाचा बना रखा है। उन्होंने कहा कि  हिंदी के साथ यह बड़ी त्रासदी रही कि हमने बोलचाल की भाषा को छोड़कर कृत्रिम भाषा रचने का प्रयास किया।


समारोह के मुख्य वक्ता एवं जेएनयू के सहायक प्रोफेसर गंगासहाय मीणा ने कहा कि सांभरिया की कहानियों में आंचलिक पुट होने के बावजूद ये एक व्यापक फलक लिए हुए हैं और इनकी कहानियां डॉ अंबेडकर के मिशन को एक रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार को समाज में सही विचारधारा की स्थापना के लिए कार्य करते हुए वंचित व शोषित तबके के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि साहित्यकार को वैचारिक प्रतिबद्धता का निर्वहन करते हुए भी यथार्थ के साथ धोखा नहीं करना चाहिए। शोषण सिर्फ ताकत से नहीं होता है, उसके पीछे भी विचारधारा ही अधिक प्रभावी होती है। उन्होंने कहा कि साहित्य के जरिए समतामूलक समाज की स्थापना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा वह मूलमंत्रा है जो दलितों का जीवन बदल सकता है।  सम्मानित साहित्यकार रत्नकुमार सांभरिया ने प्रसन्नता जताई कि पुरस्कार के रूप में उनके साहित्य को मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि वे अपनी कहानियों में शोषित, गरीब व वंचित तबके को सम्मान दिलाने का प्रयास करते हुए ऐसे कमजोर वर्ग के पात्रों को चुनते हैं, जिनके हृद्य कमजोर नहीं हों। 

रत्नकुमार सांभरिया 
अध्यक्षता करते हुए डॉ घासीराम वर्मा ने कहा कि साहित्य में बहुत शक्ति है और साहित्य समाज का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार को समाज की विद्रूपताओं को उजागर करते हुए एक बेहतर समाज की स्थापना के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। संचालन करते हुए प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने बताया कि प्रयास से जुड़े रचनाकार देश की विभिन्न भाषाओं में लिखी गई दस चुनिंदा दलित आत्मकथाओं का अनुवाद राजस्थानी में कर रहे हैं। प्रो. भंवर सिंह सामौर ने अतिथियों का स्वागत किया। युवा साहित्यकार कुमार अजय ने सम्मानित साहित्यकार का परिचय दिया। समारोह में समारोह केंद्रित स्मारिका प्रयास-7 का विमोचन किया गया। इससे पूर्व दीप प्रज्ज्वलन कर अतिथियों ने समारोह का शुभारंभ किया। सुरेंद्र पारीक रोहित ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद थे। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

दुलाराम सहारण
राज्य के चूरू  जिले में प्रमुख रूप से सक्रीय सामाजिक संस्थान प्रयास के अध्यक्ष है और एक प्रखर संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.वे पेशे से वकील हैं.
,drsaharan09@gmail.कॉम
चुरू,राजस्थान
9414327734
SocialTwist Tell-a-Friend

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here