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नाट्य समारोह रंगांजलि में कहानी “कोर्ट मार्शल” की

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, सितंबर 04, 2011 | रविवार, सितंबर 04, 2011

उदयपुर, 4 सित.2011
डॉक्टर मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट  एवं सांस्कृतिक संस्था नादब्रह्म के संयुक्त तत्वाधान में रविवार सांय विद्याभवन ऑडिटोरियम में पण्डित हेमन्त पण्ड्या ‘दादू’ की स्मृति में हर वर्ष आयोजित होने वाले नाट्य समारोह रंगांजलि के अन्तर्गत शहर के रंगनिर्देशक शिवराज सोनवाल द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘कोर्ट-मार्शल’’ का सशक्त मंचन युवा उघोगपति हंसराज चौधरी के मुख आथित्य एव विजय एस. मेहता की अध्यक्षता मे किया गया। 

कहानी “कोर्ट मार्शल” की 
स्वदेश दीपक द्वारा लिखित कहानी है। एक सैनिक रामचंदर की, जिस पर अपने अफसरों में से एक की हत्या एवं दूसरे पर जानलेवा हमले का आरोप है। यह “कोर्ट मार्शल” रामचंदर पर चल रहा है। इस “कोर्ट मार्शल” की अध्यक्षता एक युद्ध अनुभवी कर्नल सूरत सिंह करता है। कर्नल सूरत सिंह अपने जीवन में कई बार जीवन-मृत्यु के संघर्श जैसे अनुभवों का साक्षी रह चुका है। किंतु कोर्ट-मार्शल का यह ट्रायल कर्नल सूरत सिंह को एक विचित्र स्थिति में डाल देता है जैसा उसने कभी नहीं सोचा था जो उसकी समझ से परे है। कोर्ट-मार्शल के दौरान सरकारी वकील एवं बचाव पक्ष के वकील की जिरहबाज़ी से कर्नल सूरत सिंह को यह अहसास होता है कि यह मामला/मुद्दा जितना दिखाई देता है, उससे कई बड़ा है। सनद रहे कि भारतीय सेना में किसी भी स्तर पर कोई जातिगत आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। ना ही इसकी अनुमति है किन्तु यह कोर्ट-मार्शल भारतीय पुरातन पंथी एवं सामन्तवादी दृश्टिकोण से ग्रसित कतिपय लोगों की सोच को सामने लाता है।

संविधान में हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिया गया है किन्तु कतिपय लोगों द्वारा यह सम्मान केवल इसलिये छीन लिया जाता है क्योंकि उसने नीची जाति में जन्म लिया। जातिभेद को मात्र सामाजिक अपराध/हिंसा नहीं कहा जा सकता, अपितु यह समाज एवं मानवता के विरूद्ध भी एक व्यापक पैमाने पर अपराध होता हैं। परन्तु फिर भी परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण एक अपराधी केवल नैतिक अपराध करने के कारण विजेता बन जाता हैं और उसके द्वारा पीड़ित व्यक्ति दोषी /अपराधी बन जाता हैं। प्रस्तुत नाटक में जो दोषी हैं, उसे बहुत बडी़ सजा दी जाती हैं, किन्तु असलियत में समाज को कटघरे में खड़ा किया गया है। उल्लेखनिय है कि रंगकर्मी स्व. श्री हेमन्त पण्ड्या ‘दादू’ की स्मृति में आयोजित नाट्य समारोह रंगाजलि पाँचवे वर्श में प्रवेश कर गया है, और इस अवसर पर प्रस्तुत नाटक ‘‘कोर्ट-मार्शल’’ में नादब्रह्म के युवा कलाकारों के दमदार अभिनय के बल पर, नाटक माहौल के सन्दर्भ में दृश्यात्मक बन पड़ा। 

नाटक के सबसे मुश्किल पात्र रामचन्दर के चरित्र को युवा कलाकार रवि सेन ने एक प्रताड़ित युवा सैनिक की वेदना को अत्यन्त प्रभावित ढंग से अपने अभिनय से व्यक्त किया। वहीं सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष के वकिल के चरित्र में क्रमशः अमित व्यास और नवीन जीनगर की बेहतरीन संवाद अदायगी देखते ही बनती थी। कर्नल सूरत सिंह के किरदार में अनिल दाधिच ने भी अपने उत्कृष्ट अभिनय का लोहा मनवाया। गवाहों के पात्र निभाने वाले शिबली ख़ान, यश खतुरिया, घनश्याम सिंह सोलंकी और विजय लाल गुर्जर ने भी अपने स्वाभाविक अभिनय से नाटक के प्रवाह को बनाये रखा। 

अन्य पात्रों में गजेन्द्र सिंह राजावत, रमेश नागदा, प्रशांत पुरोहित, पुश्पेन्द्र, अमित श्रीमाली ने अपनी भुमिकाओं के साथ न्याय किया। लगभग 2 घण्टे की अवधि के इस नाटक के हर दृश्य पर निर्देशक शिवराज सोनवाल के निर्देशकीय कौशल की छाप स्पश्ट दिखाई दी। दर्शकों के सामने एक ज्वलंत प्रश्न, एक बहस उठाते इस नाटक में प्रकाश परिकल्पना हेमन्त मेनारिया और संगीत संयोजन कुलदिप धाबाई का था। रेखा सिसोदिया, संदिप सेन और दिक्षांतराज सोनवाल ने भी इस नाटक में रचनात्मक सहयोग दिया। नाटक के मंचन मे प्रफुल्ल मेहता, प्रदीप पानेरी, सोहन लाल तम्बोली, अनिल मेहता सहित शहर के गणमान्य नागरिको ने भाग्य लिया ।

नाट्य समारोह के प्रारम्भ मे स्वतंत्रता सैनानी हुकुमराज मेहता एंव रंगकर्मी भवदत्त मेहता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई । नाट्य समारोह का संचालन एंव धन्यवाद ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने ज्ञापित किया।
पूरी फोटो

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


नंद किशोर शर्मा

मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट सचिव
संपर्क सूत्र :-0294&3294658, 2410110 ,
msmmtrust@gmail.com,



मूल रिपोर्टिंग:-
तेशसिह कच्छावा,कार्यालय प्रशासक
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