महिषासुर मर्दिनी का मंचन यादगार बन पड़ा - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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महिषासुर मर्दिनी का मंचन यादगार बन पड़ा

फोटो साभार 
स्टेट बैंक ऑफ़  बीकानेर और जयपुर की चित्तौड़ शाखा आर स्पिक मैके के तत्वावधान में सैनिक स्कूल के सभागार में गुरुवार शाम पांच बजे हुए छऊ नृत्य आयोजन में विद्यार्थियो को अचम्भे के साथ यादगार अभिनय देखने को मिला.यहाँ पश्चिमी बंगाल से चिनिदास महतो के निर्दशन में आए सत्रह सदस्यों ने आदमकद मुखौटे पहनकर जो मंचन किया,वो  बहुत बड़े प्रभाव के साथ सफलतापूर्वक  पूरा हुआ.शुरुआत में अथिति कलाकारों का अभिन्दन और दीपप्रज्ज्वलन बैंक के जनरल मेनेजर  एस.के.धाकड़ ,कलाकार चिनिदास महतो,स्पिक मैके संभागीय समानवयक जे.पी.भटनागर,सैनिक स्कूल वरिष्ठ अध्यापक यूं.एस.भगवती,वावानियुक्त प्राचार्य ग्रुप कप्तान डी.सी.सिकरोडिया ,हेडमास्टर कर्नल हुसैन ने मिलकर किया.

हमारे समाज में लोकप्रीय पौराणिक कहानी और कथानक वाले नाटक महिषासुर मर्दानी का मंचन इस प्रस्तुति में किया गया था.जाने पहचाने नाटक को एक नए अंदाज़ में देखने का ये अवसर सभी को भा गया.शुरू से लेकर आखिर तक मंचन ने सभी को बांधकर रखा.दर्शकों में अधिकाँश विद्यार्थी ही थे.मंचन में रंगबिरंगी वेशभूषा  के साथ ही शेर बने कलाकार के कुदाफान्दी वाले लेकिन कलात्मक करतब की बात हो या फिर एक और आकास्र्हन भैसे के ज़रिए मंचन का आगे बढ़ना .प्रस्तुति के मुख्य भाग में महिषासुर राक्षस और देवी कालिका की सेना में युद्ध मानचित हुआ.देशभर में प्रचलित छऊ नृत्य परम्परा में पुरुलिया क्षेत्र से निकले इस नृत्य का ये आयोजन स्पिक मैके की विरासत श्रृखला का एक भाग था.


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


माणिक
स्पिक मैके राष्ट्रीय सलाहकार 


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