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''अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त करना हिन्दी के विरोध का सूचक नही है।''-डा. लालचन्द कहार

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, सितंबर 15, 2011 | गुरुवार, सितंबर 15, 2011


बूंदी,राजस्थान 
राजकीय महाविद्यालय, बूंदी में हिन्दी दिवस कविता पाठ,निबंध प्रतियोगिता, गीत और व्याख्यानों के साथ समारोह पूर्वक मनाया गया। जिसमें मुख्य अतिथि राजमार्ग के सम्पादक बजरंग सिंह पांथी, मुख्य वक्ता कवि डा.हितेश व्यास, अध्यक्षता अंगद के सम्पादक मदन मदिर ने की। प्राचार्य डा. डी.के.जैन ने अतिथियों  का स्वागत किया तथा बताया कि हिन्दी भाषा हमारी सांस्कृतिक धरोहर व अखंडता की प्रतीक है, यह जन मानस के  हृदय में बसती है। इसे सम्पर्क भाषा के रूप में बढ़ावा मिलना चाहिए। कार्यक्रम का आरंभ गीतकार डा. ललित भारतीय ने अपने गीत में हिन्दी प्रेम की सरस अभिव्यक्ति कर हिन्दी की वंदना की।

मुख्य वक्ता डा. हितेश व्यास ने ‘हिन्दी उर्दू के अन्तर्संबंध’ पर  अपना शोध-पत्र पढ़ते हुए हिन्दी उर्दू की एकता के ऐतिहासिक सदर्भों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खुसरो से पहले भी हिन्दी में लिखा जाता रहा है। अकबर के यहां रोजमर्रा की भाषा रही है हिन्दी। साथ ही उन्होंने ‘हाशिया और पेज’ कविता पर दाद बटौरी। वक्ता के रूप में बोलते हुए डा. लालचन्द कहार ने कहा कि हिन्दी आज वैश्विक स्तर पर तीसरे नंबर की भाषा है। अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त करना हिन्दी के विरोध का सूचक नही है। बशर्ते हम हिन्दी का निष्ठा से प्रयोग करते रहें।

कार्यक्रम संयोजक डा. रमेशचन्द मीणा ने राजस्थान साहित्य अकादमी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा कहा कि हिन्दी के प्रचार प्रसार में अकादमी द्वारा किये जाने वाले प्रयास सराहनीय है। राजस्थान में जनजन तक पुहंचाने के लिए अकादमी द्वारा पत्रिका का प्रकाशन करने के साथ-साथ शोधात्मक कार्य तथा लेखक से मिलिए, प्रसार व्याख्यान आदि करवाकर भी हिन्दी का प्रचार कर रही है। लालचन्द कहार द्वारा हिन्दी के विश्व की तीसरे नंबर की भाषा बताये जाने पर प्रतिक्रिया में कहा कि भारत अपनी भाषा में काम न करने वाले देशों में कौन से पायदान पर आता है? कार्यक्रम में हिन्दी वर्तमान दशा और दिशा पर गर्मागरम बहस हुई जिसमें कोई हिन्दी के वर्तमान रूप से संतुष्ट दिखाई दिये तो किसी ने गहरी चिन्ता व्यक्त कर अंग्रेजी के बढ़ते वर्चस्व के प्रति सचेत रहने की बात कही।

मुख्य अतिथि बजरंग सिंह पांथी ने बताया कि दक्षिण में भी धड़ल्ले से हिन्दी बोली जा रही है।  हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है। इसी अवसर पर अकादमी द्वारा प्रायोजित ‘‘हिन्दी राष्ट्रभाषा के सामने चुनौतियाँ’’ विषय पर निबंध एवं कविता पाठ प्रतियोगिता के विजेताओं को अकादमी की ओर से अतिथियों द्वारा कुल 1500 रूपये के नगद पुरस्कार प्रदान किये गये। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान राजेश कुमार वैष्णव, हेमराज सैनी द्वितीय तथा तृतीय स्थान मुरारी लाल मीणा ने प्राप्त किया तथा कविता पाठ प्रति योगिता में प्रथम स्थान नैमिचन्द मावरी, द्वितीय दीपशिखा वर्मा, तृतीय स्थान राजेश कुमार वैष्णव ने प्राप्त किया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मदन मदिर ने कहा कि आम आदमी के द्वारा अंग्रेजी नही बोले जाने को ही उनका बड़ा योगदान बताया। उन्होंने उदाहरण दिया अन्ना हजारे का जो कहते हैं कि मैं अंग्रजी नहीं जानता मुझसे हिन्दी या मराठी में। आज हिन्दी दक्षिण भारती हो या मराठी सभी हिन्दी में बोल रहे है। सोनिया गांधी इटेलियन होते हुए भी हिन्दी बोल रही है। 

कार्यक्रम में विद्यार्थी, संकाय सदस्य- डा.बी.के.शर्मा, डा.एन.के.जेतवाल, डा.वंदना शर्मा, डा.राजेन्द्र माहेश्वरी, डा. सियाराम मीणा,  बी.एस आकोदिया, बी.के.योगी आदि तथा शहर के साहित्यकार  गणेशलाल गौत्तम,  गुलाचन्द पांचाल, सुनहरा राजस्थान के पत्रकार दिनेशविजयवर्गीय आदि उपस्थित थे। हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. विजयलक्ष्मी सालोदिया ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डॉ. ललित भारतीय
वर्तमान में बूंदी,राजस्थान राजकीय कोलेज में चित्रकला के असोसिएट प्रोफ़ेसर 
और स्पिक मैके के वरिष्ठ कार्यकर्ता,गीतकार के रूप में भी जाने जाते हैं.

lalitbhartiya@gmail.com
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1 टिप्पणी:

  1. 'अंग्रेजी का ज्ञान प्राप्त करना हिन्दी के विरोध का सूचक नही है।'---- रावण का साथ देना राम का सहयोग नहीं है।

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