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राष्ट्रीय ’कला पर्व-क्रेयान्स’ टोंक,राजस्थान में जुटे 250 से अधिक चित्रकार

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, अक्तूबर 09, 2011 | रविवार, अक्तूबर 09, 2011

टोंक,राजस्थान 
सेंट सोल्जर महिला महाविद्यालय में 2 अक्टूबर को शुरू हुए राष्ट्रीय ’कला पर्व-क्रेयान्स’ में देश भर से जुटे 250 से अधिक चित्रकार और मूर्तिकारों ने नवाबों के शहर टोंक के नागरिकों को तीन दिन तक अचंभित व आनंदित बनाए रखा। वरिष्ठ चित्रकार ’कांतिचंद भारद्वाज’ ने सरस्वती पूजन के साथ इसका शुभारम्भ किया और विशिष्ट अतिथि बूंदी महाविद्यालय के पर्यटन शोध विशेषज्ञ तथा सुपरिचित कलाकार डाॅ. ललित भारतीय ने अपने उद्बोधन में ’ना रंग मज़हब का हो ना रंग नफरत का हो, रंग ऐसा भरो जिसके छींटों में बस प्यार ही प्यार हो’ पंक्तियों के सुमधुर गायन से आने वाले कलाकारों के कलापर्व में जुटने का उद्देश्य स्पष्ट कर दिया। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कोलाज चि़त्रकार डा. मणि भारतीय ने ऐसे कला संगमों की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया। मंचासीन अतिथियों में वरिष्ठ कलाकार गोवर्धन सिंह पंवार, श्याम सुन्दर राजानी और वरिष्ठ समाजसेवी डा. जे.सी. गहलोत और बाबूलाल शर्मा ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कलापर्व में दिल्ली, जबलपुर, गोवा, गुजरात के अलावा राजस्थान के बून्दी, भीलवाड़ा, गंगानगर, जयपुर, हनुमानगढ़, नाथद्वारा आदि अनेक जिलों से आये कलाकारों और विद्यार्थियों ने तीन दिन तक की लगभग सभी विधाओं में कलाकृतियां बनायीं। जयपुर से आये वरिष्ठ यथार्थवादी कलाकार रमेश भारतीय ने पुष्प चित्र, एनिमेटर अभिलाषा ने कृष्ण और गोपियों का सुन्दर चित्रण किया। डाॅ. ललित भारतीय ने पुष्प गुच्छ के साथ कलापर्व अंकित कर दिया तो भीलवाड़ा की अफसाना मंजूर ने फड़चित्र और लोकेश सोनी ने लोकदेवताओं के चित्र बनाये। बूंदी में चित्रकला की एसोसिएट प्रोफेसर डा. मणि ने कैनवास पर कागज फाड़कर चिपकाये और एक सुन्दर दृश्य चित्र बनाकर सबको हैरत में डाल दिया। उन्हें कोलाज कला में ललित कला अकादमी सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। गोवा, जबलपुर, आर्ट स्कूल जयपुर के कलाकारों ने अमूर्त चित्रों के माध्यम से कला के आधुनिक परिवेश को व्यक्त किया। वरिष्ठतम मूर्तिकार गोवर्द्धन सिंह पंवार ने विशेष प्रकार की मिट्टी से स्वयं एक नारी मूर्तिशिल्प का डेमो दिया और उनके विद्यार्थियों ने उनसे मुखौटे बनाने की कला सीखी। रामदेव मीणा ने पेपरमेशी से मुखौटा बनाया और टाट के कपड़े से उसे पगड़ी पहना दी। डा. अन्न्पूर्णा ने जलरंग से दृश्यचित्र और डा. मोनिका व कुशल मीणा ने अमूर्त चित्र बनाये। कलाकारों के साथ आये उनके विद्यार्थियों ने जो सृजन किया उसे तीन स्तरों में बाँटकर उनमें से कलाकृतियों का चयन कर सभी स्तर पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा सांत्वना पुरस्कार दिये गये।

4 अक्टूबर को समापन पर गोवर्द्धन सिंह पंवार, डा. रीटा प्रताप तथा एक युवा चित्रकार को विशिष्ट उपाधियों से और इनके साथ बूंदी की डा. मणि भारतीय व डा. ललित भारतीय, जयपुर के रमेश भारतीय, डा. मोनिका चैधरी, डा. अन्नूपूर्णा आदि को भी मुख्य अतिथि पूर्व समाज कल्याण मंत्री मदन दिलावर ने सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्य सचेतक महावीर जैन ने की। समापन समारोह में कई कलाकारों ने चित्रकारों के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किये और मंच पर विराजमान अतिथियों से मांग की कि सरकारी शिक्षा संस्थानों में चित्रकला में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँ और सरकारी भवनों पर कलाकृतियों को खरीद कर लगाया जाए। मंच से कला के विपणन को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया।

कलापर्व संयोजक डा. साधना सिंह और हनुमान खरेड़ा ने सभी कलाकारों और अतिथियों को धन्यवाद दिया और सभी कलाकारों और अतिथियों ने महाविद्यालय के निदेशक बाबूलाल शर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जो इस कलापर्व को पाँच वर्षों से आयोजित करवा रहे हैं। जुनेद तथा पुष्पेन्द्र को कलापर्व की संपूर्ण व्यवस्थाओं को सुचारू बनाये रखने में पूर्ण सहयोग देने के लिए कलाकारों ने विशेष आभार व्यक्त किया। शाहिस्ता खान के मंच संचालन और सुमधुर गायन ने तीन दिन तक कलापर्व की महफिल को संजोये रखा।सांध्यकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी कलाकारों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। डाॅ. ललित भारतीय, अभिलाषा भारतीय ने मधुर गीतों से और रमन के बाँसुरी वादन ने समा बांध दिया और महेश गुर्जर के नृत्य झूला-झूला ने उपस्थित श्रोताओं मे इतना जोश भर दिया कि सभी आगन्तुक कलाकार झूम उठे और स्वयं नृत्य करने लगे।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डॉ. ललित भारतीय
वर्तमान में बूंदी,राजस्थान राजकीय कोलेज में चित्रकला के असोसिएट प्रोफ़ेसर 
और स्पिक मैके के वरिष्ठ कार्यकर्ता,गीतकार के रूप में भी जाने जाते हैं.

lalitbhartiya@gmail.com
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