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हिम्मत सेठ को विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on रविवार, अक्तूबर 09, 2011 | रविवार, अक्तूबर 09, 2011

माउण्ट आबू। 
राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी रूपाम्बरा कलकता द्वारा अपने 24 वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में लोकसभा के उपसभापति करिया मुण्डा, राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी कलकता के मानद अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. रत्नाकर पाण्डेय तथा राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी रूपाम्बरा के अध्यक्ष डॉ. स्वदेश भारती ने महावीर समता संदेश के प्रधान सम्पादक हिम्मत सेठ को हिन्दी भाषा को जन जन तक पहुंचने में दिये गये योगदान के लिए विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान 2011 से सम्मानित किया गया है। यह तीन दिवसीय राजभाषा सम्मेलन राजस्थान के पर्यटन स्थल माउण्ट आबू के अरियाना विलेज रिसोर्ट गांधी जयन्ती के अवसर पर 2 से 4 अक्टूबर 2011 को आयोजित किया गया है।


सम्मान स्वरूप अंग वस्त्र, रजत सम्मान पट्टिका व अभिनन्दन पत्र व स्मृति चित्र भेंट किया गया। उद्घाटन  समारोह के मुख्य अतिथि करिया मुण्डा ने हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने पर बल दिया व कहा कि मात्र राजभाषा बना देने से हिन्दी का विकास नहीं होगा। इसे जन जन की भाषा बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रतिदासी जैसा बर्ताव अब समाप्त होना चाहिए। इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व सांसद डॉ. रत्नाकर पाण्डे ने कहा कि मारिशस में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सचिवालय का कार्यलय खुल गया है। लेकिन वो किराये के भवन में चल रहा है। यह शर्म की बात है इसलिए मेरा करिया मुण्डा जी से निवेदन है कि लोकसभा में प्रस्ताव लेकर मॉरिशस में हिन्दी सचिवालय का कार्यालय खुल गया है। लेकिन वो किराये के भवन में चल रहा है यह शर्म की बात है कि इसलिए मेरा करिया मुण्डा जी से निवेदन है कि लोकसभा में प्रस्ताव लेकर मोरिशस में हिन्दी सचिवालय का कार्यालय भवन बनवाने के लिए अनुदान दिया जाये। 

डॉ. रत्नाकर पाण्डे ने कहा कि राज्यसभा में राजभाषा हिन्दी समिति तो काम कर रही है लेकिन लोकसभा में हिन्दी समिति का गठन नहीं हुआ है। करिया मुण्डा जी से निवेदन है कि वो इसमें रूचि लेकर मैडम सभापति से आग्रह करके जल्दी से जल्दी लोकसभा की हिन्दी राजभाषा समिति का गठन कराया जाये। इस समारोह में जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के संस्थापक स्व. जनार्दन राय नागर को भी उनके हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए उन्हें मरणोपरान्त विशिष्ट हिन्दी सेवा सम्मान 2011 प्रदान किया गया। माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेमेन्द्र चण्डालिया ने इस सम्मान को ग्रहण किया है। इस अवसर पर जनपद विभाग के पूर्व निदेशक पुरूषोत्म शर्मा व हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मलय पानेरी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर रूपाम्परा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. स्वदेश भारती ने सभी महमानों का स्वागत करते हुए बताया कि पिछले 24 सालों से लगातार महात्मा गांधी जयन्ती दो अक्टूबर को यह राज भाषा सम्मेलन आयोजित किया जाता है। सम्मेलन का संचालन राजस्थान के मूल निवासी व अभी भूवनेश्वर उड़ीसा से पधारे डॉ. शंकर पुरोहित ने किया तथा महाराष्ट्र से पधारी बहन डॉ. विद्या केशव चिटको ने भी आगन्तुको का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. प्रसन्न कुमार पाठसाणी ने भी समारोह को सम्बोधित किया। 
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