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दुर्ग चित्तौड़ में भजनोत्सव

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, अक्तूबर 10, 2011 | सोमवार, अक्तूबर 10, 2011


लोक संगीत एवं भजन गायकी के क्षेत्र में सुपरिचित छोटा उगमराज खिलाड़ी का 5 सदस्यीय कलाकार दल 11 अक्टूबर को प्रातः मीरा मन्दिर, चित्तौड़ दुर्ग पर लोक भजनों की प्रस्तुति करेगा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर के सौजन्य से आपको मीरा महोत्सव-2011 के लिए विशेष रूप से नामांकित किया गया है। इससे पूर्व दुर्ग पर प्रातःकाल में 11 अक्टूबर को ही प्रभात फेरी भी निकाली जाएगी। 

डॉ. रेनू निगम, दल 11 अक्टूबर को प्रातः मीरा मन्दिर, चित्तौड़ दुर्ग पर लोक भजनों की प्रस्तुति करेगा मीरा महोत्सव-2011 के अन्तर्गत उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद के सौजन्य से डॉ. रेनु निगम 11 अक्टूबर को प्रातःकाल 8ः30 बजे से चित्तौड़ दुर्ग के मीरा मन्दिर में आयोजित होने वाले भक्ति रसोत्सव में मीरा के भजनों और भक्ति संगीत की मधुर प्रस्तुतियाँ देंगी।

संगीत के क्षेत्र में कानपुर की डॉ. रेनू निगम का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। ‘सुरमणि’ और ‘संगीत रत्न’ से विभूषित डॉ. रेनू जी संगीत की तीनों विधाओं-सुगम, शास्त्रीय और लोकसंगीत की बहुमुखी गायिका हैं। राग-रागिनियों की रिमझिम में भीगे हुए आपके मृदु कंठ से ख्याल, ठुमरी, दादरा, भजन, लोकगीत और दिलकश गजलों के बोल श्रोताओं को तन्मयता के सागर में ऐसे डुबो देते हैं, जिसके आनन्द की अनुभूति सुनकर ही की जा सकती है।

वर्तमान में कानपुर के ए.एन.डी. पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में संगीतशास्त्र की रीडर के रूप में कार्यरत रेनूजी ने संगीत में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है, और ‘राष्ट्रीय एकीकरण में संगीत की भूमिका’ विषय पर आप डी.लिट्. उपाधि के लिए शोध कार्य कर रही हैं। अनेक सम्मानों से विभूषित डॉ. रेनू निगम ने संगीत की विधिवत शिक्षा पं. काशीनाथ बोडस और उस्ताद अफजल हुसैन खाँ निजामी से प्राप्त की। आकाशवाणी दूरदर्शन एवं स्टेज की एक सफल गायिका होने के साथ-साथ आप उत्तरप्रदेश संगीत नाटक अकादमी व संस्कृति निदेशालय तथा उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र इलाहाबाद से भी जुड़ी हुई हैं।

मीरा संगोष्ठी का आयोजन 11 एवं 12 अक्टूबर को
मीरा स्मृति संस्थान, चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में आयोजित मीरा महोत्सव-2011 के अन्तर्गत दिनांक 11 एवं 12 अक्टूबर को दोपहर 1ः30 बजे से गोरा-बादल स्टेडियम में बनाये गये कथास्थल मण्डप में मीरा संगोष्ठी का दो-दिवसीय आयोजन रखा गया है।मीराबाई के जीवन, काव्य एवं दर्शन विषय पर होने वाली इस संगोष्ठी में परमपूज्य बालव्यास श्री राधाकृष्णजी महाराज मीरा की भक्ति और दर्शन पर प्रवचन देंगे। मीरा संगोष्ठी में मीराबाई के जीवन, काव्य और दर्शन के विविध पक्षों पर वक्तव्य देने के लिए विक्रम विश्वविद्यालय उज्जेन के प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, डिब्रूगट (असम) के मीरा विशेषज्ञ श्री देवीप्रसाद बागड़ोदिया, मीरा एवं सन्त साहित्य के वरिष्ठ विशेषज्ञ श्री ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल (जयपुर), सुप्रसिद्ध समीक्षक, वरिष्ठ कवि अहमदाबाद के डॉ. किशोर काबरा, इतिहासकार एवं सुप्रसिद्ध चिन्तक श्री राजेन्द्रशंकर भट्ट (जयपुर), भक्ति-दर्शन के विशेषज्ञ भरतपुर के डॉ. कृष्णचन्द्र गोस्वामी, वैचारिकी त्रैमासिक पत्रिका (कोलकाता) के सम्पादक डॉ. बाबूलाल शर्मा आदि अनेक लब्ध-प्रतिष्ठ विद्वान साहित्यकार चित्तौड़गढ़ पधार रहे हैं।

मीरा महोत्सव के अन्तर्गत विद्वानों का सम्मान
दिनांक 10 से 13 अक्टूबर तक चित्तौड़गढ़ में मीरा स्मृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित किये जाने वाले मीरा महोत्सव-2011 में दिनांक 11 अक्टूबर की रात्रि में ‘नानीबाई का मायरा’ की संगीतमय कथा के साथ-साथ मीराबाई और सन्त-भक्तों पर पर साहित्य-साधना के लिए देश के विभिन्न विद्वानों को सम्मानित किया जाएगा। इस क्रम में वर्ष 2011 का मीरा सम्मान पुरस्कार जयपुर के श्री ब्रजेन्द्रकुमार सिहल, और श्री राजेन्द्रशंकर भट्ट, डिबू्रगढ़ (असम) के श्री देवीप्रसाद बागड़ोदिया, नई दिल्ली के डॉ. भगवतीशरण मिश्र, मेड़ता के श्री दीपचन्द सुथार को प्रदान किया जाएगा। अष्ट छाप के सन्त-भक्तों पर उत्कृष्ट साहित्यिक अवदान के लिए श्रीनाथ द्वारा के श्री भगवतीप्रसाद देवपुरा को ‘सन्त भक्त मीरा सारस्वत सम्मान’ से विभूषित किया जाएगा।महाकवि गुलब खण्डेलवाल मीरा काव्य पुरस्कार जोधपुर की डॉ. रेणु शाह को प्रदान किया जाएगा।इसके अतिरिक्त वर्ष 2010 की फोटोग्राफी/विडियोग्राफी के विजेताओं और वर्ष 2011 की मीरा निबन्ध प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

माणिक,
वर्तमान में राजस्थान सरकार के पंचायतीराज विभाग में अध्यापक हैं.'अपनी माटी' वेबपत्रिका सम्पादक है,साथ ही आकाशवाणी चित्तौड़ के ऍफ़.एम्.  'मीरा' चैनल के लिए पिछले पांच सालों से बतौर नैमित्तिक उदघोषक प्रसारित हो रहे हैं.

उनकी कवितायेँ आदि उनके ब्लॉग 'माणिकनामा' पर पढी जा सकती है.वे चित्तौड़ के युवा संस्कृतिकर्मी  के रूप में दस सालों से स्पिक मैके नामक सांकृतिक आन्दोलन की राजस्थान इकाई में प्रमुख दायित्व पर हैं.
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