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''आज प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण को खतरा बढ़ता जा रहा है''-ममता शर्मा

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on बुधवार, अक्तूबर 19, 2011 | बुधवार, अक्तूबर 19, 2011

बूंदी,राजस्थान
राजकीय महाविद्यालय, बूंदी में राजस्थान भूगोल परिशद के तीन दिवसीय 39वें राष्ट्रीय भूगोलवेत्ता सम्मेलन केशुभारंभ में मुख्य वक्ता प्रो.हनुमान सिंह यादव डीन बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल ने देश में आजादी के बाद अपनाए गये विकास मॉडल को पूजीवादी करार देते हुए कहा कि उससे देश में गरीब और अमीर के मध्य आर्थिक खाई बढती गई। देश का योजना आयोग प्रदेश के भूगोल एवं संसाधनों को ध्यान में रखते हुए प्रारूप तैयार करे तो विकास को सही दिशा मिल सकेगी। मुख्य अतिथि श्रीमती ममता शर्मा अध्यक्ष राष्ट्रीय महिला आयोग, ने कहा कि आज प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण को खतरा बढ़ता जा रहा है। सतत विकास तथा पर्यावरण सम्मत विकास समय की आवश्यकता है। विषिष्ट अतिथि जिला प्रमुख राकेश बोयत ने बताया कि योजना निचले स्तर पर बने तथा समयानुसार बदलाव लाने की आवश्यकता है। राज्य की वर्तमान सरकार इस दिशा में निरन्तर प्रयासरत है। प्रो.आर.एन मिश्रा भूगोल विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय,जयपुर ने राजस्थान में क्षेत्रीय विषमताओं को प्रभावित करने वाले कारकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। आयोजन सचिव डा.एन.के.जेतवाल ने तीन दिवसीय सम्मेलन के विशय ‘‘प्राकृतिक संसाधन एवं प्रादेशिक नियोजन राजस्थान के विशेष संदर्भ में’’ का प्रवर्तन किया। परिषद् के महासचिव डा.श्यामसुन्दर भट्ट ने परिषद्  का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बताया कि यह परिषद्भा रतीय भूगोल परिषद्से  भी पुराना संगठन है जो सन् 1965 से अनवरत भूगोल विषय शोध पत्रिका का निरंतर प्रकाशन कर रही है। परिषद् के संरक्षक प्रो.मोइनुद्दीन भी मंच पर विराजमान थे। प्राचार्य डा. डी.के. जैन ने अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा अतिथियों को स्मृतिचिन्ह भेंट किये। अतिथियों द्वारा स्मारिका तथा बूंदी के एटलस का विमोचन भी किया।

उद्घाटन सत्र के बाद अतिथियों द्वारा अभिनव कला दीर्घा में डा. ललित भारतीय के फोटोग्राफस व चित्र और चित्रकला विभाग के व्याख्याताओं तथा विद्यार्थियों के चित्रों के साथ डा.मणि भारतीय के कॉलाज की प्रदर्शनी का अतिथियों ने उद्घाटन एवं अवलोकन किया। सायंकाल को सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागियों विनेश सहित जयपुर के बाँसुरी वादक रमन तथा विभा श्रृंगी व ललित भारतीय के गायन ने समा बाँध दिया।दूसरे दिन प्रातः 9.00 बजे ‘भट्टाचार्य स्मृति व्याख्यान’ में मुख्य वक्ता के रूप प्रो.एच.एम.सक्सेना ने बताया कि भूगोल विषय  को स्थापित करने में प्रो.अरविन्द भट्टाचार्य जी के प्रयासों से अकादमिक स्तर पर पूरे प्रदेश  के महाविद्यालयों में भूगोल विषय  अध्ययन का विषय  बना ।

तीनों दिन चले तकनीकी सत्रों में देश भर से आये भूगोलवेत्ताओं ने प्राकृतिक संसाधन, कृशि, पर्यावरण अवक्रमण, क्षेत्रीय नियोजन, सतत् विकास, संसाधन संरक्षण, औधोगिक अवस्थितिकरण, पर्यटन विकास, प्रादेशिक नियोजन, वास्तशास्त्र , आर्थिक सामाजिक विकास, राष्ट्रीय मरूउद्यान की जैव विविधता, जनसांख्यिकीय संरचना एवं नगरीकरण का भोगोलिक विश्लेषण , समग्र विकास व मानव संसाधन पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये।प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों ने शंकर  राइस प्लांट, पर्यटन स्थल रामेश्वर  महादेव और सथुर के पास स्थित अरावली और विंध्य के मिलन से बनी ग्रेट बाउण्डरी फाल्ट लाइन का अवलोकन तथा उसके भौगोलिक कारकों का अध्ययन किया।

समापन समारोह के मुख्य वक्ता प्रो.आर.एन.व्यास ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग राह्स्त्रीय सम्पदा के निर्माण में होना चाहिए न कि  निजी क्षेत्र के उद्योगो के लिए व्यक्तिगत सम्पति बनाने के लिए। मुख्य अतिथि श्रीमान अशोक डोगरा कहा कि भूकंप और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर भले ही हमारा नियंत्रण नही हो लेकिन पर्यावरण प्रदुषण करते हुए एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रति खिलवाड़ करते हुए विकास की तूती बजाते जा रहे हैं- यह ठीक नही है। युवा भूगोल वेत्ताओं ने अपने षोध पत्र प्रस्तुत किये जिस पर ज्यूरी  ने गरिमा नंदवाना  को प्रथम और भारतेन्दु गोत्तम को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किये। तीनों दिन के कार्यक्रमों का संचालन डा.ललित भारतीय ने किया। अतिथियों का परिचय डा.राजीव शर्मा ने दिया।

राजस्थान भूगोल परिशद कार्यकारिणी का गठन- 
इसी श्रंखला में राजस्थान भूगोल परिशद की कार्यकारिणी गठन भी हुआ जिसमें संरक्षक के रूप में प्रो.मोइनुद्दीन, अध्यक्ष प्रो. हनुमान सिंह यादव, उपाध्यक्ष(स्कूल शिक्षा ) मणिमाला शर्मा तथा कॉलेज शिक्षा से डा.एमजेड खान, आयोजन सचिव डा मनोज कुम्हार, संयुक्त सचिव  के.सी.पहाड़िया, महासचिव डा.एसएस भट्ट, कोशाध्यक्ष डा.एसके.जांगिड़, सम्पादक सुखलाल हिरण, परिषद्  के सदस्य-प्रो.आर.एनमिश्रा, डा.एन.के.जेतवाल,डा.महेष गोड, डा.पूर्णिमा मिश्रा, सत्येदेव शर्मा , दिनेष कुमार जाखड़, आषुतोश बिरला, डा.एलसी. अग्रवाल तथा डा.काश्मीर भट्ट को चुना गया।
योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डॉ. ललित भारतीय
वर्तमान में बूंदी,राजस्थान राजकीय कोलेज में चित्रकला के असोसिएट प्रोफ़ेसर 
और स्पिक मैके के वरिष्ठ कार्यकर्ता,गीतकार के रूप में भी जाने जाते हैं.

lalitbhartiya@gmail.com
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