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सुरेन्द्र अग्निहोत्री की कुछ कवितायेँ

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, अक्तूबर 03, 2011 | सोमवार, अक्तूबर 03, 2011


दंश


जब असंतोष बुदबुदा रहा था
तब कुटिलता से उसे अपने पाले में लाकर
परिवर्तन का इतिहास रूपान्तरण किया
आखिर जनशक्ति के प्रवाह में जाकर
जब उपेक्षाओं के दंश
पाताल से भी गहरे गड्ढों की शक्ल में सामने आए
स्वार्थ के इतिवृत्ति पर
खून और पसीना सिर्फ पानी माना जाए
रक्तरंजित खुरदरे समय में
लोकतंत्र को जिन्दा रखने जो आगे आए
आज उन्हीं को रौंद कर
तंत्र लोक पर हावी हो जाए
बोलने वालों के मुँह पर ताला
प्रशंसा गीत गाया जाए
समय के थपेड़ों से
वह भी नहीं बच पाए।

शिद्दत


चिलचिलाती धूप में
तपती हुई तारकोल की सड़क पर
हम सवारियां ही नहीं मजबूरियां भी
कड़कड़ाती सर्दी में, मूसलाधार वर्षा में
बड़ी शिद्दत से ढो रहे हैं
आप रहे कूलरों-एअर कंडीशनरों में
हमें फर्क नहीं पड़ता है
बेरोजगारी और बेकारी में
पेट की आग बुझाने के लिए
कुछ न कुछ श्रम तो कर रहे हैं
सिर छुपाने की चिंता नहीं
हमने रिक्शे को बना लिया घर
जनपथ से राजपथ लगाए तीन चक्कर
नहीं थे पैसो अन्यथा खरीद लेता थ्रीव्हीलर
पर मुझे शहर से क्यों खदेड़ रहे।
हम भी मानव हैं
क्यों जानवर बना रहे है।

तलाश 
उजड़ते कस्बे को छोड़कर
भाग रहे महानगर
रोजी-रोटी की तलाश में
पूरी होगी आशा में
अपनी जड़ों से छिटक जाते हैं
कंक्रीट के जंगल में भटक जाते है
याद करते गाॅव का बूढ़ा बरगद
और कोल्हू का बेल
जो जिन्दगी से खाता मेल
न कीर्ति का चतुर्दिक आकर्षण?
फिर भी कितनी उदासी छा जाती है
हंसी भी गायब हो जाती है।

पक्ष धरता
पक्ष धरता के स्त्रास
को अम्नन साट सिकता से समाप्त कर लेता हूं
करीब बहुत करीब के लोगों की निगाहे
मूलतः अपने सामाजिक बोध से विलग है
वे हमारे रिश्तो को पवित्रता से नहीं
स्वार्थ के तराजू से तोलते है
और अपने खाते में कम आते देख
आरोपो का नया खेल खेलते है
सामान्य व्यवहार-आचरण से
निजता के करीब रहने का अहसास देते
और अन्दर ही अन्दर
पूर्व कल्पित योजनाओं को आकार देते
वर्चस्वी राजनीति के खेल से
नियन्त्रित करना चाहते चेतना का बिन्दु!

धूल और धूप भरे रास्तों से
होता हुआ चुपचाप आया हूँ.
मैने शहरी अजनबीपन की अनुभूति
वर्षो तक वातानुकूलित कमरे में पायी है
नकली चेहरा झूठे दावों की
कलई खुलती खूब पायी है।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
कृति- 
उ0प्र0 सिनेमा से सरोकार
पुरस्कार
हंसवाहिनी पत्रकारिता पुरस्कार इलाहाबाद में रामेशवरम हिन्दी पत्रकारिता पुरस्कार 2007
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‘राजसदन’ 120/132
बेलदारी लेन, लालबाग,
लखनऊ
मो 9415508695
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