Latest Article :
Home » , » विशाखापटनम में वि‍वि‍ध वि‍धाओं की हि‍न्दी साहि‍त्यं चर्चा का आयोजन

विशाखापटनम में वि‍वि‍ध वि‍धाओं की हि‍न्दी साहि‍त्यं चर्चा का आयोजन

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, अक्तूबर 31, 2011 | सोमवार, अक्तूबर 31, 2011


विशाखापटनम की  हिन्दी साहित्यं, संस्कृति एवं रंगमंच को समर्पि संस्था “सृजनने दिनांक 30 अक्टूबर 2011 कोडाबा गार्डन्स् स्थित पवन एनक्लेव के प्रथम तल पर विवि विधाओं की हिन्दी साहित्यं चर्चा का आयोजन किया।कार्यक्रम की अध्यीक्षता डॉ. टी महादेव राव, सचिसृजन ने की जबकि संचालन किया सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने। स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम एवं सृजन संबंधी विवरण प्रस्तुत किया सृजन के संयुक्त सचि डॉ. संतोष अलेक्स  ने। सृजन ने हाल ही में दिवंगत हिन्दी के मूर्धन्य  साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल् तथा सृजन के वरिष्ठ  सदस्या, राजभाषा अधिकारी ओम प्रकाश एवं सृजन के समर्थक, हिन्दी कार्यक्रम अधिशासी आकाशवाणी रमण स्वामी को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पि की।  

कार्यक्रम में सबसे पहले श्रीमति मीना गुप्ता् ने दीपावली पर्व को अंधेरे पर उजाले की जीत बताते हुए कवितादीप पर्वसुनाया। साथ ही टीवी धारावाहिकों से प्रभावि वर्तमान जीवन शैली पर अपनी कवितामेरे घर आई सुनामीप्रस्तु की। श्रीमति श्वेता कुमारी ने स्त्री शक्ति की बढती उपलब्धियों का लेखा जोखा अपनी कवितानारीमें प्रस्तुत। विश्वीनाथाचारी ने अपनीधरती और आकाशकविताओं के माध्यम से प्रकृति की महत्ता् दर्शायी। अपनी व्यंग्य क्षणिकाओं, गीतहिन्दी से हिन्दुस्तानलेकर प्रस्तुत हुए जी. अप्पारावराजजिसमें भारत की महानता का बखान था।

जी. ईश्व वर्मा द्वारातमसो मा ज्योर्तिगमयमें दुर्जनों पर सज्ज नों के द्वारा द्विगुणि दीप जलाकर उजाला करने का आह्वान किया गया। पवन कुमार गुप्तार नेमां का दूधकविता पढी जबकि श्रीनिवास नेशिक्षकएवंमहान भारतकविताएं प्रस्तु्त कीं।  इसी क्रम में रामप्रसाद यादव नेमन क्यों  नहीं लगता?” औरलफ्जकविताएं पढी जिसमें मानवीय संबंधों में घटती आत्मीनयता एवं बढते भौतिकवाद की बिंबात्मतक प्रस्तुति थी। अपनी हास्य कहानीसेफ्टी डिवाइजमें मशीनों पर आश्रि मानव की कठिनाइयों का खुलासा प्रस्तुत किया तोलेटि चंद्रशेखर ने “मोटापाशीर्षक हास्य कविता में बी.एस. मूर्ति ने वर्तमान में मानव जीवन की विडंबना पर हंसाया।जे. एस. यादव ने द्रोपदी को बिंब बनाकर वर्तमान समाज में नारी की विडंबना एवं ग्रामीण जीवन से टूटकर एकाकी होते मानव की त्रासदी अपनी कविताओंकलयुग की द्रोपदीतथाजब से छुटा मेरा गांवमें पेश किया।मैं अबला कि तू अबलाकविता में वर्तमान समाज में पति पत्नीर के संबंधों, स्त्री शक्तिं का अच्छा खुलासा किया श्रीमती दीपा गुप्ता ने। बीरेंद्र राय नेचंदीले सपनेमें सपने और उनसे जुडी श्रृंखला और यथार्थ प्रस्तुत किया।

पर्यावरण प्रदूषण, प्रकृति के प्रकोप एवं ओजोन परत पर भावपूर्ण कविताबुद्धिशालीपेशकिया डॉ. एम. सूर्यकुमारी ने। विभिन्न  स्थितियों को बिम्बक बनाकर डॉ सन्तो अलेक्स ने अपनी कविताऑखेंपढी। एकाकी होते मानवीय संबंधों, विषम परिस्थिचतियों एवं क्षीण होते मानवीय मूल्यों  पर आक्रोश व्यूक्तक किया डॉ. टी. महादेव राव ने अपनी दो गजलों- “आओ जीने कातथाअजीब बशर हैंमें। नीरव कुमार वर्मा ने अपनी कहानीयादों के दायरेमें दो सहेलियों की मर्मस्पर्शी कथा प्रस्तु की।इस कार्यक्रम में कृष्ण  कुमार गुप्ता , विजय कुमार राजगोपाल, अशोक गुप्ता, सी एच ईश्वार राव आदि ने सक्रि हिस्सा, लिया। पढी गई प्रत्येक रचना पर चर्चा हुई जिसे सभी ने सराहा। सभी का मत था कि इस तरह के कार्यक्रमों से लिखने के लि प्रोत्साहन एवं प्रेरणा मिलती है। डॉ. सन्तो्ष अलेक्स  के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डॉ. टी.महादेव राव
सचि – सृजन

09394290204                              mahadevraot@hpcl.co.in
SocialTwist Tell-a-Friend
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template