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श्याम गोइन्का को साहित्य गौरव सम्मान

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, अक्तूबर 13, 2011 | गुरुवार, अक्तूबर 13, 2011

तारानगर। 
राजस्थानी भाषा में विपुल मात्रा में साहित्य सृजित हो रहा है वहीं शोध तथा वैयाकरणिक फलक पर भी मेहनत की जा रही है। समकालीन भारतीय साहित्य में राजस्थानी साहित्य अपना अहम् मुकाम बना चुका है और यह हम सब राजस्थानियों के लिए गर्व की बात है। उक्त विचार राजस्थानी-हिन्दी साहित्यकार तथा कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्याम गोइन्का ने बुधवार शाम को अपणायत संस्थान की ओर से स्थानीय इंद्रलोक भवन में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि की हैसियत से व्यक्त किए। 

गोइन्का ने कहा कि राजस्थान की मिट़टी में ऐसी खासियत है कि यह संघर्ष का माद्दा अंदर भर देती है और व्यक्ति निरंतर संघर्ष के बाद भी निराश नहीं होता और अंतत विजय पथ की प्राप्ति करता है। राजस्थानी भाषा की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यही बात मान्यता आंदोलन के साथ एक दिन जुड़नी है। राजस्थानी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होकर रहेगी। गोइन्का ने कहा कि यह दीगर बात है परंतु वर्तमान में सबसे ज्यादा जरूरत है तो राजस्थानी साहित्य के संरक्षण की और घर होमकर साहित्य साधना करने वाले राजस्थानी साहित्यकारों के सम्मान की है। 

गोइन्का ने कहा कि मेरा मन राजस्थानी साहित्यकारों के प्रति श्रद्धा से झुक जाता है क्योंकि वे पहले संघर्षों को आत्मसात करते हैं, फिर लिखते हैं और अंतत आजीविका से कमाए गए पैसों से पुस्तकें स्वयं छपवाते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के संस्कार और पूर्वजन्म के किसी पुण्य के कारण ही मैं साहित्य से जुड़ पाया और जो कुछ करने का मन बना करने का प्रयास करता रहा हूं।कार्यक्रम के विशिष्टि अतिथि समाजसेवी रियाजत अली खान ने कहा कि साहित्य व्यक्ति को अमरता की ओर ले जाता है। जो साहित्य से जुड़ गया उसने तीक्ष्ण दृष्टि भी प्राप्त कर ली और यह प्राप्ति किसी मायने में कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने अंचल में सरस्वती और लक्ष्मी पुत्रों का संगम अनूठा हैं। यहां जो करता है वह मन से करता है और समाज उसे सम्मानित करता है। कार्यक्रम में प्रो. उम्मेद गोठवाल ने आतिथ्य प्रदान करते हुए कहा कि साहित्यकार मानवता का नक्शा बनाते हैं और उसको परिगणित मानव-समाज करता है।

इस अवसर पर अपणायत संस्थान की ओर से शॉल, श्रीफल, साफा, प्रतीक चिहन भेंट कर श्याम गोइन्का को साहित्यिक अवदान के लिए ‘साहित्य गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया। अपणायत संस्थान के अध्यक्ष विश्वनाथ भाटी ने संचालन करते हुए कहा कि कि गंजत्व दर्शन, नसबंदगी, लोढी मोढी मथरी, गादड़ो बड़ग्यो, बनड़ा रौ सौदागर, ठा नीं सा और अंवेर कृतियों के रचयिता श्याम गोन्इका साहित्य के गौरव हैं। कार्यक्रम में कमला गोइन्का फाउण्डेशन की ट्रस्टी ललिता गोइन्का और कैलाश जाटवाला का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष शिक्षाविद् बुधमल हंसावत ने मां, मातृभाषा और मातृभूमि की महत्ता को इंगित करते हुए कहा कि जो इनसे जुड़ा है वह समझिए सबसे जुड़ा है। 

मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वल और माल्यार्पण से शुरू हुए कार्यक्रम में संस्थान के देवकरण जोशी, जुगलकिशोर चाचाण, निर्वाण, रेखा चांदल दुलाराम सहारण, नरेन्द्र भाटी, जयहिंद सैनी, अशोक बच्छावत, राजकुमारी भाटी, रूक्किमणी देवी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में नगर के कृष्णकुमार सैनी, फूलाराम जांगिड़, श्यामबाबू सैनी, भगवानाराम सोलंकी, शुभकरण चंगोईवाला साहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

दुलाराम सहारण
राज्य के चूरू  जिले में प्रमुख रूप से सक्रीय सामाजिक संस्थान प्रयास के अध्यक्ष है और एक प्रखर संस्कृतिकर्मी के रूप में जाने जाते हैं.वे पेशे से वकील हैं.
,drsaharan09@gmail.कॉम

चुरू,राजस्थान
9414327734
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