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जल संसाधन प्रबन्धन महिलाओं की प्रभावी सहभागिता के बिना सम्भव नही

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, अक्तूबर 13, 2011 | गुरुवार, अक्तूबर 13, 2011


उदयपुर।
राज्य जल नीति जल संसाधन प्रबन्धन में महिलाओं की प्रभावी सहभागिता को रेखांकित करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ढाणी, गांव, कस्बे व शहरों तक कहीं भी महिलाओं की जल संसाधन प्रबन्ध में प्रभावी व अर्थपूर्ण सहभागिता नहीं है। जबकि पानी की कमी व पानी के दूषित होने के सर्वाधिक दुष्परिणाम महिलाओं को ही भुगतने होते है। यह सार ग्लोबल वाटर पार्टनरशिप, इण्डिया वाटर पार्टनरषिप के तत्वावधान में डॉ.मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट, तथा झील संरक्षण समिति के संयुक्त तत्वावधान में विद्या भवन पॉलिटेक्निक सभागार में आयोजित समग्र जल संसाधन प्रबन्धन कार्यशाला में उभरे। कार्यशाला में वाकल व बनास नदी बेसिन में स्थित इक्कीस गॉवों के  महिला स्वसहायता समूहो व आंगनवाड़ी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 

कार्यशाला में संभागी महिलाओं ने कहा कि वे राज्य जल नीति की भावनाओं के अनुरूप जल संसाधन प्रबन्धन के लिए अपनी भूमिका बढ़ायेगी। जल नीति के प्रावधान के अनुरूप महिला की जल प्रबन्धन में समझ व भूमिका को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर शिक्षण प्रशिक्षण के कार्यक्रम करने होगें। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय सिंह मेहता ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देने एंव योजना निर्माण से लेकर क्रियान्वयन, हर स्तर पर महिलाओं को जोड़ने से ही जल स्त्रोत का संरक्षण व प्रबन्धन हो सकता है। 

कार्यशाला के प्रारम्भ में जी.डब्लू.पी. इण्डिया के राजस्थान प्रतिनिधि व पॉलिटेक्निक के प्राचार्य अनिल मेहता ने राज्य जल नीति एवं समग्र जल संसाधन प्रबन्धन की अवधारणा को समझाया। राजस्थान की जल नीति में आई. डब्ल्यू. आर. एम. दृष्टिकोण को स्वीकार किया गया हैं। आई.डब्ल्यू.आर.एम. पर समस्त स्टेकहोल्डर्स की समझ व सहभागिता को बढाना तथा इस विषय पर उनकी क्षमता का संवर्धन करना अति आवश्यक हैं। मेहता ने कहा कि राजस्थान सरकार ने अब तक प्रभावी केवल इंजीनियरिंग उपायों के विपरीत समुदाय आधारित जल संसाधन प्रबन्धन को प्राथमिकता दी है ।इसी से राजस्थान एक जल स्वावलम्बी राज्य बनेगा।

डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव नन्द किशोर शर्मा तथा गांधी मानव कल्याण समिति के सचिव मदन नागदा ने संभागियों से ग्राम सभा में सहभागिता बढ़ाने पर विचार विमर्श किया।उन्होनें कहा कि नदी , तालाब, बाध, बावडी, कुओं के प्रबन्धन के ढांचे में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका बढ गई है वाटर यूजर संगठनों का गठन होगा जिसमंे महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व होगा । इस हेतु पंचायती राज संस्थाओं का समुचित सषक्तिीकरण किया जायेगा ।

 झील संरक्षण समिति के सचिव डॉ. तेज राजदान तथा सरोवर विज्ञानी डॉ. एल.एल. शर्मा ने जल जनित रोगो से बचने एवं घरेलू स्तर से लेकर सार्वजनिक स्तर पर जल स्त्रोतो को बचाने पर जानकारी दी। उन्होंने नारू रोग से बचाव पर विशेष मार्गदर्शन किया । अलर्ट संस्थान के निदेशक जितेन्द्र मेहता तथा प्रयत्न समिति के सचिव मोहन डांगी ने सिंचाई जल प्रबन्धन, जल वितरण समिति तथा वाराबन्दी पर व्यवहारिक मार्ग दर्शन किया। विद्या भवन आंगनवाडी केन्द्र की मुख्य संचालिका हरिबाला शर्मा तथा पहल संस्थान की संचालिका ज्योत्सना झाला ने कहा कि शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए तथा आजिवीका बढ़ाने के लिए जल को स्वच्छ रखना होगा तथा नदी , तालाब, बाध, बावडी, कुओं को बचाना होगा। 

क्या कहा महिलाओ ने - गालदर की रूपी बाई, गेजवी की पार्वती बाई, ओगणा की कालीबाई कोटडी की तारा देवी, पीपावास की शांति देवी, देवगढ़ की जमना रोत, तुलसीदास सराय की गगां बाई, फुटिया की सवी बाई, गोगला की गोपी बाई समेत संभागी महिलाओं ने कहा कि ग्राम सभा की बैठक का समय व स्थान अनुकूल होने से ही महिलाओं की सहभागिता बढ़ेगी। संभागी महिलाओं ने कहा कि हम में से आठ प्रतिशत महिलाऐं ही आज तक ग्राम सभा बैठक में गई है। स्वसहायता समुहों में भी पानी की समस्या पर सार्थक चर्चा नहीं होती। हेण्डपम्प व पनघट की योजना प्रभावशाली लोगों के घरों के पास बनती है। महिलाओं को दो से तीन किलोमीटर दूरी से पिने का पानी लाना पडता है। सिंचाई जल वितरण समितियों का गठन औपचारिकता मात्र है। तथा महिलाओं की इनमें कोई आवाज नहीं है। इस प्रक्रिया में उनके कन्धे, सिर व कमर में शारीरिक समस्याएं पैदा हो जाती है। कृषि कार्य में भी महिलाएं पूरा श्रम करती है। 

परिवार के किसी सदस्य के जल जनित रोग से ग्रसित हो जाने पर महिला पर ही उसकी पूरी देखभाल की जिम्मेदारी होती है। शौचालय की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से महिलाओं को घर से दूर शौच निवृति के लिए जाना पड़ता है, जहां वे कई बार असुरक्षित अनुभव करती है। व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए भी महिलाओं के लिए आवश्यक सुविधाएं नहीं होती है। महिलाएं प्रातः उठने से लेकर तक रात को सोने तक पानी के निरन्तर सम्पर्क में रहती है। दूषित पानी का सर्वाधिक दुष्प्रभाव महिला पर ही आता है। महिलाएं कुपोषण, अशिक्षा तथा रक्त की कमी जैसी प्रमुख समस्याओं से ग्रसित है।


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

नंद किशोर शर्मा

मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट सचिव
संपर्क सूत्र :-0294&3294658, 2410110 ,
msmmtrust@gmail.com,

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