ज्योति चौहान की एक तुकांत मगर भावपूर्ण कविता - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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ज्योति चौहान की एक तुकांत मगर भावपूर्ण कविता

माँ करती  हूँ तुझे मै नमन 
माँ करती हूँ,  तुझे मै नमन
तेरी परविरश को  करती हूँ नमन
प्यासे को मिलता जैसे पानी,माँ तू है वो जिंदगानी ,नो महीनो तक सींचा तूने
लाख परेशानी सही तूने ,पर कभी ना तू हारी
धूप सही तूने और दी मुझे छाया
भगवान का रूप तू है दूजा
तेरे प्यार का मोल नही है कोई

तू मेरा हर दर्द महसूस करती
मीठी-मीठी लोरी गाती, सुबह बिस्तर से उठाती
टिफन बनातीयूनिफोर्म तैयार करती
रोज मुझे   स्कूल भेजती
मुझे क्या अच्छा लगतातुझे था पता
तेरी हाथ की रोटी के बराबरनही कुछ स्वादिष्ट दूजा
लाड प्यार से सदा सिखायातूने सच्चा ज्ञान
तू भोलीप्यारी न्यारीमेरी माँ
तू सुखद क्षण कीएक फुहार
तू तपती आग मे नरम छाँव-सी
तुम मुश्किलो मे हमेशा राह दिखातीं
तुम मेरी खास प्रिय मीत सी
ऐ माँ करती हूँ तुझे मै नमन

तेरे हर दर्द को महसूस मुझे अब करना
तेरे बुदापे का सहारा बनना
तेरी तपस्या को नही भूलना
तेरे हर ख्वाब को पूरा करना
तेरा मन नही दुखाना
तेरे आगे हर पल शीश झुकाना
तू  मेरा जीवन
पाकर हुई तुझे मै धन्य
नही हैं शब्द करूँ कैसे तेरा धन्यवाद,बस चाहिए तेरा आशीर्वाद,ऐ माँ तेरा धन्यवाद!
करती हूँ तुझको शत-शत प्रणाम

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

ज्योति चौहान

उत्तर प्रदेश की हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं.साथ एम एस सी,बी एड,बी एल आई एस सी और पी जी डी सी ए करने के बाद एक 
वहु राष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं . नोएडा में अनुसंधान और विकास विभाग में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं.इनका पता है :बी-२७,सेक्टर-२२नॉएडा-२०१३०१

9999815751, 0120-2440448
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1 टिप्पणी:

  1. jyoti ji kee kavita bahut prabhavit kar rahi hai... sundar kavita... ek samany si dainik charya ko kavita me prastut karna asaan nahi hota... behatreen bhav...

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