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आकाश दीप की चुनिन्दा रचनाएं

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शनिवार, नवंबर 12, 2011 | शनिवार, नवंबर 12, 2011

मानव


अंधकूपों में बैठा मानव दल
उपेक्षा की दीवारों में पल

संतुष्ट हो पीता अहम् जल


पतंग

शिशुओं से पतंग नहीं उड़ा करते
लाख कोशिश कर भी वे हारते'

उड़ाने के दाव पेंच नहीं जो जानते


कर

मन को गुरु गिरि करो दीर्घ
उर को उर्वर भर शस्य शीघ्र

प्रेम घन को ललचा,जी भर के भीग'
-- 

तुम्हारा आगमन...

तुम्हारा  आगमन
शत कपोत ह्रदय आँगन में-
चूं,चूं चुगते दाने जग के,
निर्द्वंद,निस्पृह,निरा मग में

पाकर आहट तुम्हारी-
पुलक,पुलक उड़ते अम्बर में,
इच्छाओं के,स्वप्नों के पर ले;

शत पोत मानस सरिता में-
खड़े,अड़े,खोये अटके से,
पड़े मंझधार में भटके से;

प्रणय प्रेरित नव वात पा-
नव वेग,उमंग उल्लास धर,
खेलें रुधिर लहरों पर प्रेम भर

लहरें तीव्र उठें अनंत में-
भाव,चेतना भी डूबें उनमे’
तुम ही तुम हो आत्म,मन में


तितली

इन्द्रधनुष भरी पिचकारी से,
छिटक रंग भरे अंग तुम्हारे,
पुष्प पंखुरियों से निर्मित,
कृश कोमल पंख तुम्हारे,
ओ चिर चंचल,चल चितवन,
कुञ्ज कलि शाख भरे चमन,
में करती निःशब्द रमन,
धूप छाँह से अनजान तन,
अभी इधर,नहीं उधर,किधर,
भटक भटक भटकती नज़र,
उसी बाग में,उन्ही कलियों के,
काटती चक्कर कई पहर,
क्या अभीष्ट,क्या चाह मन में,
या अवश भटकना ही स्वभाव,
उस मानव मन के समान,
अस्थिर,अशांत जो डोलती नाव,
जिसे बहाकर भाव लहरें,
भटकाती विचारों के सागर,
और कभी तरस खा कर,
पटकती सुनसान तट पर.


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-  
आकाश दीप
ये आई.एस.एम् संस्थान,
धनबाद बिहार में बी.टेक के विद्यार्थी है.उनसे यहाँ akashdeep.ismu2008@gmail.com
सम्पर्क किया जा सकता है.
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27 टिप्‍पणियां:

  1. wah........................
    yuva kavi akash deep ki kuchh anya kavita padane ke liye dekhe
    .http://shrutisrijansanstha.blogspot.com/

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  2. कविताओं को पसंद करने के लिए आप सब का हार्दिक धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  3. akashdeep ko mai kafi waqt se jaanta hoon.maine inki aur bhi aprakashit rachnaye padhi hai in rachnao ki tarah vo bhi kafi chune wali hai.en rachnao ke prakashit hone ki kushi ke saath ye ummeed bhi karta hoon ki akashdeep ki aur bhi kavtain prakashit ho.
    aasha hai ki vo sabhi sahitya premiyon ke mann ko isi tarah bhate rahege

    उत्तर देंहटाएं
  4. shruti srijan sanstha akash deep ji ke ujjwal bhavishya ki kamna karti hai

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut hi khoobsurti se prastut ki gayee hain kavitayen ........

    keep it up

    उत्तर देंहटाएं
  6. akash deep one day you will touch the akash( sky)...your poem reflects this.......... we are proud of you dude...
    just continue ...keep it up..its only the beginning man.

    उत्तर देंहटाएं
  7. I don't understand hindi poetry completely...But this made me realised its importance:)

    उत्तर देंहटाएं
  8. ye kavita bahut hi khubsurti se likhi gai hai...aaj ke yug me ,jab angrezi me baat karne ko prathmikta di jati hai,akashdeep ke ye chand sarahniya hai!!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. bahut hi sundar kavitaen han.......saundarya ras se oat prot.......

    उत्तर देंहटाएं
  10. kavitaon me prakriti,kalpana aur saundarya ka adbhut sanyog hai...durlabh shabdawali se alankrit....

    उत्तर देंहटाएं
  11. kya baat hai ek dum se bhawnao ko choone wali hai .....

    उत्तर देंहटाएं
  12. jabardast to hamesha se hi likhta raha hai aakashdeep... aage mauka milna chahiye isko. hum sab ka farz hona chahiye ki aishe kawi ko jan manas tak pahuchaye.....

    उत्तर देंहटाएं
  13. Nishchay hi ye rachnaye man ko chhune wali hai ....yuva hote hue bhi shabdon ka chayan aur prastuti adbhut hai!! Hindi jagat me ubharte iss kavi ko unki inn rachnaon ke liye mai badhai deta hun aur aishi hi aur bhi kavitaon ki asha rakhta hun !!

    Akash Deep keep it on !!! its really awesome..:):):)

    उत्तर देंहटाएं
  14. I Love You Bro............ It s not just poem its Extra ordinary....................

    उत्तर देंहटाएं

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