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डा. मनोज श्रीवास्तव की कुछ रचनाएं 'मां और कविता' शीर्षक से

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on मंगलवार, नवंबर 15, 2011 | मंगलवार, नवंबर 15, 2011


--एक--झर-झर झर सकती है कविता
अनन्त और अथाह तक
भर सकती है सागर-महासागरडुबो सकती है
स्वयं में सारा ब्रह्माण्ड
,किन्तु बहुत थोड़ी रह जाएगी
मां के आंसुओं के सामने


--
दो--भावनाओं की बाढ़ बांध सकती है,स्नेह और आसक्ति की अविरल बरसात ला सकती है,अमन और दोस्ती का परचम लहरा सकती है,हांशायद मिटा सकती है कविता
देशों और दिशाओं के सारे भेद
,परबेशक! ठिगनी नज़र आएगी
ममता के सामने


--
तीन--अपने आंचल में विश्व-साहित्य समेट सकती है,भाषाओं की घुड़सवारी कर
असीम कल्पनाएं छू सकती है
,शब्दकोशों को अपना अनुचर बना सकती है,वैचारिक सीमाएं लांघ सकती है
और फलांग सकती है--
सुरताल और लय
,लेकिनकविता अबोध बालिका ही रहेगी जब मां की अंगुलियां थाम वह गली-चौबारे पार किया करेगी

--चार--
बहुत खुश हो सकती है कविता
,अपने ठहाकों और कहकहों से, दर्द का इतिहास धुंधला सकती है
अपने अट्टहास से,
अविच्छिन्न वसन्त ला सकती है
,परमां के मुस्कराते ही वह सिर झुका,उसके कदमों से लिपट जाएगी

--पांच--
वह रिझा-लुभा सकती है
 राजाओं और शहंशाहों को,अपने लालित्य का दीवाना बना सकती है उनको,अपनी ठुमुकन से मोल सकती है तख्तो-ताज़,हांकरिश्मा कर सकता है उसका अपराजेय सौन्दर्य,जो मां की दमक के सामने
तत्क्षण फीका पड़ जाएगा


--
छ:--
अरे! बेज़ुबां कविता
 !तुम कैसे गा सकोगी मां को,इतनी अल्हड़-अनगढ़ हो कि सीख भी नहीं पाओगी उससे शिष्टाचार के सबक,इतनी रूक्ष और शुष्क हो कि सलीके से दुलार भी न सकोगी हमकोइतनी बांझ हो
कि जन नहीं सकोगी
एक ऐसी दुनिया

--सात--
हां!
मां ने मुझे जना है
 और मैने तुमको,सोतुम मां की दोगुनी ऋणी हो!


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डा. मनोज श्रीवास्तव
आप भारतीय संसद की राज्य सभा में सहायक निदेशक है.अंग्रेज़ी साहित्य में काशी हिन्दू विश्वविद्यालयए वाराणसी से स्नातकोत्तर और पीएच.डी.
लिखी गईं पुस्तकें-पगडंडियां(काव्य संग्रह),अक्ल का फलसफा(व्यंग्य संग्रह),चाहता हूँ पागल भीड़ (काव्य संग्रह),धर्मचक्र राजचक्र(कहानी संग्रह),पगली का इन्कलाब(कहानी संग्रह),परकटी कविताओं की उड़ान(काव्य संग्रह,अप्रकाशित)

आवासीय पता-.सी.66 ए नई पंचवटीए जी०टी० रोडए ;पवन सिनेमा के सामने,
जिला-गाज़ियाबाद, उ०प्र०,मोबाईल नं० 09910360249
,drmanojs5@gmail.com)
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