''विश्‍वविद्यालय के विकास को देख मेरी छाती दुगुनी हो गई है।''-प्रो.नामवर सिंह - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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''विश्‍वविद्यालय के विकास को देख मेरी छाती दुगुनी हो गई है।''-प्रो.नामवर सिंह

हिंदी विवि के 14वें स्थापना दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम


महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विवि के चौदहवें स्‍थापना दिवस के अवसर पर विवि परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रख्‍यात आलोचक व विवि के कुलाधिपति प्रो.नामवर सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विश्‍वविद्यालय के तेजी से हुए विकास को देखकर मेरी छाती दुगुनी हो गई है। इस विकास का श्रेय जाता है कुलपति विभूति नारायण राय को। दूज के चाँद को उन्‍होंने चौदहवीं का चाँद बना दिया है। अपने कार्यकाल में ही इसे वे पूर्णिमा का चाँद बनायेंगे,ऐसी आशा है। उन्‍होंने कहा हिंदी को सर्वजन की भाषा बनाने के लिए यहाँ के शिक्षक और छात्रों को निरंतर प्रयत्‍न करना चाहिए। 
14 वें स्‍थापना दिवस के मौके पर जाने माने पर्यावरणविद और समाजसेवी राजेन्‍द्र सिंह ने कहा कि महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी काफी जिम्‍मेदारियाँ पूरी की हैं और उसके सामने अब भी अनेक ऐसे लक्ष्‍य हैं जिसे पूरा करना है। आज सबसे ज्‍यादा जरूरत इस बात की है कि देश के जो पारंपरिक संसाधन हैं उसका शोषण रोका जाए और उनका उपयोग देश के लोगों के लिए किया जाए। इसके लिए आज संघर्ष चलाने की जरूरत है। वैसे तो हिंदी प्‍यार की भाषा है लेकिन उसे अपने हक के लिए संघर्ष की भाषा बनना पड़ेगा। इस विवि ने हिंदी को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर गौरव दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। हिंदी विवि के सामने मैं एक प्रस्‍ताव रखना चाहता हूँ कि वह विभिन्‍न इलाकों में ग्राम स्‍वराज्‍य के लिए चल रहे आंदोलन को हिंदी में लिपिबद्ध कराए।

स्‍वागत वक्‍तव्‍य में कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विवि ने अनेक शिखर स्‍तर की उपलब्धियाँ हासिल की हैं कोलकाता और इलाहाबाद केंद्र खोले गए और आने वाले दिनों में मॉरीशस में भी केंद्र खालने की योजना है। अगली योजना में विवि के अंतर्गत चार नए विद्यापीठ खोलने की स्‍वीकृति मिल चुकी है,यह हमारे उत्‍साह को बढ़ाने वाला है। अब हम विश्‍वास के साथ कह सकते हैं कि हमारा विश्‍वविद्यालय उड़ान पर है। इस विवि को अंतरराष्‍ट्रीय यूँ ही नहीं कहा गया था इसके पीछे एक स्‍पष्‍ट अवधारणा है। दुनिया के 200 विश्‍वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है उनमें समन्‍वय करने का काम हमारा विश्‍वविद्यालय करने की कोशिश में है। श्री राय ने कहा कि दुनियाभर के देशों से लोग हमारे यहाँ हिंदी पढ़ने आ रहे हैं और यहाँ से ज्ञान समृद्ध होकर जा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमने वर्धाकोश की योजना पर काम शुरू कर दिया है। हिंदी में स्‍पेल चेक बनाने का काम चल रहा है और हम जल्‍दी ही समग्र हिंदी व्‍याकरण पर काम शुरू करने वाले हैं।स्‍वागत वक्‍तव्‍य में प्रतिकुलपति प्रो.ए.अरविंदाक्षन ने कहा कि विवि की शोध परियोजनाएं काफी लोकप्रिय हो रही हैं। हमारी कोशिश है कि 12वीं योजना में हिंदी सभी भारतीय भाषाओं का मंच बने।

इस अवसर पर मंचस्‍थ अतिथियों के हाथों हिंदी विवि के कैलेण्‍डर का लोकार्पण किया गया। साहित्‍य विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो.सूरज पालीवाल की वाणी प्रकाशन से प्रकाशित पुस्‍तक '21वीं सदी का पहला दशक और हिंदी कहानी'का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में विवि के डिबेटिंग सोसायटी की ओर से आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्‍कृत किया गया वहीं खेल विभाग की ओर से आयोजित बैडमिंटन,बॉलीवाल, क्रिकेट प्रतियोगिता के विजेता और उपविजेताओं को भी पुरस्‍कृत किया गया। मुख्‍य समारोह के पश्‍चात सांस्‍कृतिक कार्यक्रम में श्री श्री गोविंदजी नत संकीर्तन,मणिपुर की लोक नृत्‍य प्रस्‍तुति ने उपस्थितों को खूब रिझाया। संचालन साहित्‍य विद्यापीठ की रीडर डॉ.प्रीति सागर ने किया तथा कुलसचिव डॉ.के.जी.खामरे ने धन्‍यवाद ज्ञापन किया।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-प्रेस विज्ञप्ति 
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