व्यंग्य:बिन बायो डेटा सब सुन - अपनी माटी Apni Maati

India's Leading Hindi E-Magazine भारत की प्रसिद्द साहित्यिक ई-पत्रिका ('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

व्यंग्य:बिन बायो डेटा सब सुन


आजकल हर तरफ बायोडेटा की बयार बह रही है । हर ऐरा, गैरा, नत्थूखैरा, नूरा-फकीरा, जमालिया, गंगू तेली और राजा भोज एक अदद बायोडेटा लेकर शहर में घूम रहा है । हर तरह के बायोडेटा बाजार में तैयार है । पुराना सिद्धान्त है डिमाण्ड और सप्लाई । सो चारों तरफ से बायोडेटा की सप्लाई आ रही है और जैसा कि आप जानते है एप्लाई-एप्लाई नो रिप्लाई विद आऊट सप्लाई ।  सो हजूर पाठकान आज बायोडेटा पर ही यह चिन्तन प्रस्तुत है । बायोडेटा केवल एक ही प्रकार के नहीं होते है । कई प्रकार के होते है । हर बायोडेटा पर वजन रखना पड़ता है । मेरिज बायोडेटा, जोब बायोडेटा, कारपोरेट बायोडेटा, पोलिटिकल बायोडेटा, सामाजिक बायोडेटा, साहित्यिक बायोडेटा, अण्डर वर्ल्ड बायोडेटा, फिल्मी बायोडेटा हर तरफ हर किस्म के बायोडेटा हवा में तैर रहे है । 

कल एक बायोडेटा दृष्टिपथ से गुजरा । एक साहित्यकार महोदय का था । प्रथम पृष्ठ पर सम्पूर्ण रंगीन चित्र और दूसरी और लेखक का सम्पूर्ण जीवन चरित्र । 21 धारावाहिक लिखे । चार विज्ञापन बनाये । दूरदर्शन-आकाशवाणी पर वार्ताएं पढ़ी । मगर फिर भी साहित्य के जंगल में अभी भी अरण्य रोदन कर रहे है । मैं सोचता हूँ , यदि ये व्यक्ति बायोडेटा बनाने के बजाय काम में मन लगाये तो उनका भी भला होता और समाज का भी । मगर कौन समझाये । एक अभद्र बायोडेटा बनाया स्वयं ही लिखा, छपाया, षष्टिपूर्ति के पावन पर्व पर बंटवाया और साहित्य, संस्कृति, कला, समाज, राजनीति में अमरता को प्राप्त हो गये । एक डॉन का बायोडेटा देखा । राज्यसभा की सदस्यता के लिए तैयार किया था । उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि वे पहले दस्यू थे, कई मर्डर कर चुके है और अब राज्यसभा हेतु बायोडेटा लेकर घूम रहे है । चुनाव के दिनों में बायोडेटा इतने बडे और शानदार होते है कि गांधी जी या सरदार पटेल देखते तो शरमा जाते । इन नेताओं के बायोडेटा में घपले, अपराध, हत्या, बलात्कार, कमीशनखोरी आदि का विस्तृत विवरण दिया जाता है और आपको यह जानकार प्रसन्नता होगी कि ऐसे ही लोग चुनाव लड़कर विधानसभा या संसद की शोभा बढ़ा रहे है । मेरिज के बायोडेटा को तो कहना ही क्या । एक सज्जन अपने सपूत के लिए बहू ढूंढ रहे थे, ऐसा बायोडेटा बनवाया कि आज तक बहू नहीं मिली है । एक कन्या का ऐसा बायोडेटा पढ़ा जिसे पढ़ने मात्र से वर पक्ष खिसियां गया क्योंकि लड़की का पैकेज व पढ़ाई ऊँची थी, भावी वर की स्थिति अत्यन्त साधारण वाली । बायोडेटा एक या दो पेज का तो पढ़ा जा सकता है मगर कभी-कभी दस से बीस पृष्ठों के बायोडेटा लेकर लोग आ जाते है । क्या करें पढ़ना पड़ता है । अब शहर मे ऐसी दुकाने खुल गई है जो अच्छा और कामयाब बायोडेटा बनाने का दावा करती है । हमारे यहां से बायोडेटा बनवाइये शादी पक्की या नौकरी पक्की या टिकट पक्का या फिर छोकरी पक्की ।

इधर एक लड़का गर्ल फ्रेण्ड को अपना बायोडेटा देना चाहता था । मगर गर्ल ने उस बायोडेटा को पढ़े बिना ही रद्दी की टोकरी में डाल दिया । उदास लड़का किसी अन्य की तलाश में भटकने लगा । मैं सोचता हूँ  ये बायोडेटा, संस्कृति का अन्तिम हल क्या है । क्या बिना बायोडेटा के जीवन नहीं चल सकता । मगर उपभोक्तावाद फ्रीइकोनोमी बाजारवाद शॉपिंग माल में बोडी और सोल मिलकर एक माल है और बोडी शोपिंग वाले चारों तरफ माल की तलाश में घूम रहे है । बायोडेटा चोर, उचक्के, गिरहकट, पाकेटमार, हत्यारे, मक्कार, बेईमान, गुण्डे, डॉन, बॉस तक लेकर घूम रहे है । आप सावधान रहियेगा मैंने भी अपना बायोडेटा बनवा लिया है । 


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


तीक्ष्ण व्यंग्यकार 

86, लक्ष्मी नगर,
ब्रह्मपुरी बाहर, जयपुर
फोन - 2670596ykkothari3@yahoo.com
SocialTwist Tell-a-Friend

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here