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डा. मनोज श्रीवास्तव की कविता बीता साल नहीं याद करेंगे...

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011 | शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011


बीता साल नहीं याद करेंगे...

इस नए साल पर
बीते साल को नहीं याद करेंगे

नहीं याद करेंगे कि
लाख यत्नों के बावज़ूद
बहन के हाथ पीले नहीं करा सका,
और बरसों पहले भागे भाई को
खोजने-बुलाने की ज़हमत नहीं उठा सका,
अपने किसी कामुक बंधु को
एक दुध-मुँही का
सालों से शील भंग करते रहने से
नहीं रोक सका,
काफ़ी अरसे बाद जब
मुंडेर पर एक अदद गोरैया देख
हुल्लसित हुआ था,
मैं लगभग भूल गया था कि
अलसुबह क्या हुआ था--
एक बुढ़िया शौच जाते वक़्त बलाकृत हुई थी,
और लकड़सुंघवा एक बच्चे को भगाकर
निठारी की किसी गली में लेता गया था
जबकि लोगबाग जानबूझकर चुप्पी साधे हुए
ज़रूरी छेड़छाड़-लल्लो-चप्पो में व्यस्त थे
नितंब, वक्ष और गुलबदन पर
अपरिहार्य बतरस में आकंठ डूबे हुए थे

हाँ, क्यों याद करेंगे कि
महंगाई-भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आंदोलनों में
प्रतिभागियों को प्रायोजित किया गया था,
कोई नेता जेपी रोड से सीधे निकलकर
एक झोपड़पट्टी में सतुआ खाने क्यों गया था
जैसेकि उसे चुनाव जैसी कोई ज़रूरी बात
अचानक याद गई हो,
और वहाँ से निपटकर
वह चैन की सांस ले रहा था
क्योंकि उसने अपने
चहेते मिलावटखोरों और जमाखोरों को
अन्ना की रैली में शामिल होते देखा था
और जो बाबू अपनी जेब गर्म करने के बाद
इतना गर्म हो गया था कि
कि वह मजे से
उससे स्वार्थ की रोटियाँ सेंक रहा था
और प्लेटफार्म पर बैठकर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़
एक लज़ीज़दार भाषण दे रहा था

इस पहली जनवरी को
कतई याद नहीं करेंगे कि
बीते खूंसट साल में
क्या-क्या हुआ था--
कि एक गूंगे को
फ़ब्तियाँ कसने के ज़ुर्म में
हवालात में डाल दिया गया था,
राष्ट्रीय नाच-गानों की प्रतियोगिताओं में
हकलों, लंगड़ों, हचकों को
सम्मानित किया गया था,
पुलिस के यूनिफ़ार्म में चूहे
राजभवनों की नींव कुतर रहे थे,
और विदेशी बिल्लियाँ
उन्हें चट्ट करने के बजाय
उनकी सुरक्षा में तैनात थीं


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


डा. मनोज श्रीवास्तव 
आप भारतीय संसद की राज्य सभा में सहायक निदेशक है.अंग्रेज़ी साहित्य में काशी हिन्दू विश्वविद्यालयए वाराणसी से स्नातकोत्तर और पीएच.डी.
लिखी गईं पुस्तकें-पगडंडियां(काव्य संग्रह),अक्ल का फलसफा(व्यंग्य संग्रह),चाहता हूँ पागल भीड़ (काव्य संग्रह),धर्मचक्र राजचक्र(कहानी संग्रह),पगली का इन्कलाब(कहानी संग्रह),परकटी कविताओं की उड़ान(काव्य संग्रह,अप्रकाशित)

आवासीय पता-.सी.66 ए नई पंचवटीए जी०टी० रोडए ;पवन सिनेमा के सामने,
जिला-गाज़ियाबाद, उ०प्र०,मोबाईल नं० 09910360249
,drmanojs5@gmail.com)
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