‘‘ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना’’ - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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‘‘ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना’’


उदयपुर 


भारतीय फिल्म जगत के महान गायको की त्रिमूर्ति मो. रफी, मुकेश और किशोर कुमार का दस वर्ष के अन्तराल में एक साथ दुनिया से स्वर्गस्थ हो जाना संगीत जगत की अपूर्ण क्षति है। पचास से सत्तर के दशक तक आम लोगों के दिलों  में अपने गीतों से साम्राज्य करने वाले यह महान नायक अपने जीवन के साठ वसन्त भी नहीं देख पाये। भारतीय सिने संगीत के महान नायकों को डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘‘संगीतमय स्मरणान्जली’’ को भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. विश्वास मेहता ने संगीत प्रेमियों से खचा-खच भरे ओडिटोरियम में अविस्मरणीय बना दिया। किशोर कुमार को स्मरण करते हुये किशोर दा की आवास में ‘‘रातकली एक ख्वाब में आई........’’ और ‘‘छू कर मेरे मन को...........’’ सुनाकर श्रोताओं को आल्हादित कर दिया। ‘‘शमा है सुहाना सुहाना’’ और ‘‘कई बार यू भी देखा है’’ प्रस्तुत कर भरपूर दाद बटोरी। 

हर दिल अजीज मुकेश के गाये ‘‘ सारंगा तेरी याद में नैन हुये बैचेन...’’ ‘‘मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज न दो’’ ‘‘ जिस गली में तेरा घर न हो बालमा’’ तथा ‘‘चंदन सा बदन.......चन्चल चितवन’’ प्रस्तुत कर भरपूर तालिया बटोरी। ‘‘हुस्ने जाना इधर आ आईना हूँ  मैं तेरा ’’ सुनाकर लोगों को वाह-वाह करने को मजबूर कर दिया। और ‘‘ओ जाने वाले हो सके तो लोट के आना’’ सुनाकर मंत्र मुग्ध् कर दिया।संगीत मय स्मरणान्जली  मंें शायर डॉ. प्रेमभण्डारी, उद्योगपति जे.के. तालिया, म्यूजिक लवर क्लब के डॉ. विनय जोशी, संगीतज्ञ डॉ. राज शेखर व्यास, नाद ब्रह्म के हेमन्त मेनारिया, नाट्यक्रमी शिवराज सोनवाल सहित गणमान्य संगीत प्रेमीयों ने भाग लिया। स्मरणान्जली का का संयोजन करते हुए ट्रस्ट सचिव नंद किशोर शर्मा ने कहा कि संगीत मानव हृदय को सुकुन देते हुए सहृदय बनाता है। 

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


नंद किशोर शर्मा

मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट सचिव
संपर्क सूत्र :-0294&3294658, 2410110 ,
msmmtrust@gmail.com,
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