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त्रिलोक सिंह ठकुरेला की बाल कविता

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on मंगलवार, दिसंबर 27, 2011 | मंगलवार, दिसंबर 27, 2011


  उपवन के फूल                     

हम उपवन के फूल मनोहर
सब के मन को भाते ।
सब के जीवन में आषा की
किरणें नयी जगाते


हिलमिल­हिलमिल महकाते हैं
मिलकर क्यारी ­ क्यारी ।
सदा दूसरों के सुख दें,
यह चाहत रही हमारी


कांटो से घिरने पर भी ,
सीखा हमने मुस्काना ।
सारे भेद मिटाकर सीखा
सब पर नेह लुटाना ।।


तुम भी जीवन जियो फूल सा,
सब को गले लगाओ ।
प्रेम ­गंध से इस दुनियाँ का
हर कोना महकाओ ।।


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


त्रिलोक सिंह ठकुरेला


(अभी तक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में, कविता, दोहे, 

गीत, नवगीत, हाइकु, कुण्डलिया, बालगीत, 
लघुकथा एवं कहानी प्रकाशित हो चुके हैं.प्रकाशित कृतियों में राजस्थानी ग्रंथागार, जोधपुर से 'नया सवेरा बालगीत संग्रह)' शामिल है.)



बंगला संख्या - एल-99, रेलवे चिकित्सालय के सामने, आबू रोड - 307026 (राजस्थान) मो.- 09460714267,trilokthakurela@gmail.com
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1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही सुंदर सरल रचना के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

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