गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर :विश्वभारती से मुंगेर तक - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर :विश्वभारती से मुंगेर तक

मुंगेर


गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती जिला जन सम्पर्क कार्यालय मुंगेर के तत्वावधन में सूचना भवन में 22 दिसम्बर को आयोजित की गयी। इस कार्यक्रम के बहाने रवीन्द्रनाथ टैगोर के साहित्य और दर्शन की वर्तमान में प्रासंगिकता तलाशनी थी। कार्यक्रम का उद्घाटन मुंगेर के जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण ने दीप प्रज्जवलित कर किया तथा अघ्यक्षता बंगला साहित्य के प्रखर विद्वान डा.बी.के. घोष ने की। अपने उद्घाटन संबोधन में जिला पदाधिकारी ने लोगों का आह्वान किया कि गुरूदेव के दर्शन को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा अपने साहित्य में जिस मानवतावादी दृष्टिकोण को उजागर किया है उसे जीवन में उतारें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्वांजलि होगी। 

 साहित्यिक बहस का शुभारंभ सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के उप निदेशक डा.रामनिवास पाण्डेय ने अपने विषय प्रवेश के माघ्यम से किया। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर के मुंगेर के रागात्मक रिश्ते को विस्तार से रेखांकित किया। साथ ही कहा कि उन्होंने गीतांजलि के कुछ छंद मुंगेर में रचे थे। इसी परिप्रेक्ष्य में बहस को आगे बढ़ाते हुए पत्रकार अवधेश कुंवर ने कहा कि कवि गुरू रविंद्रनाथ टैगोर एक उत्कृष्ट कोटि के कवि थे और उनकी कविता में उनके मनोभावों की उच्चता प्रकट हुई है। प्रसिद्व पत्रकार कुमार कृष्णन ने इस तरह के आयोजन के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया और कहा कि इस तरह के आयोजन से आम लोगों को प्रशासन से जुड़ने का मौका मिलता है। मुंगेर जामा मस्जिद के इमाम अब्दुला बोखारी ने कहा कि जिला प्रशासन का यह प्रयास काबिले तारीफ एवं सराहनीय है। उन्हें कवि गुरू को फारसी का भी विद्वान बताया और कहा कि दानिसमंद इंसान बहुत कम देखने को मिलता है। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ के पूर्व सचिव चंद्रशेखरम ने भारतीय साहित्य, भारतीय कला, भारतीय शिक्षा प्रणाली, भारतीय संगीत और राष्ट्रीय आंदोलन में रवींद्रनाथ के योगदान की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि यूनेस्को ने भारतीय राष्ट्रगान जन, गण, मन को विश्व को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान माना है। रवीन्द्रनाथ के मरनोपरांत उनके एक-एक गीत भारत और बांग्ला देश के राष्ट्रगान बन गए और उनके एक बंगला गीत का सिंहली अनुवाद आज श्रीलंका का राष्ट्रगान है। वहीं प्राघ्यापक शब्बीर हसन ने रवीन्द्रनाथ के कथा साहित्य के विभिन्न आयामों का विश्लेषण किया और कहा कि उनका साहित्य सामाजिक कुरितियों के खिलाफ था। समाजसेवी किशोर जायसवाल ने कहा कि रवीन्द्रनाथ ने अपनी कालजयी रचनाओं के माघ्यम से भारत को गौरवान्वित किया। संस्कृतिकर्मी में राजेश जैन ने कहा कि कवि गुरू साहित्य में सौंदर्यबोध के श्रेष्ठ कवियों में संसार के अग्रणी कवि रहे हैं। उनका प्रकृति से अनन्य लगाव ही शांति निकेतन और विश्व भारती के सृजन का कारण बना। 

      सूचना भवन में कवि गुरू रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा उकेरे गए चित्रों की एक प्रदर्शनी भी लगायी गयी और उनके उद्गारों को भी अभिव्यक्त करने वाले बैनर लगाए गए एवं उनकी नोबेल पुरस्कार प्राप्त रचना गीतान्जलि एवं उनके चित्रों पर पुष्पांजलि भी की गयी।बंगला भाषियों की स्थानीय संस्था उद्यन परिषद के अघ्यक्ष जे.पी.पॉल ने कविगुरू के 150वीं जयंती पर पीर पहाड़ी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने की मांग की और कहा कि प्रशासन कवि गुरू के नाम पर पथ का नामकरण एवं मूर्ति संस्थापित करने पर भी विचार करे। कार्यक्रम की अघ्यक्षता करते हुए बांग्ला साहित्य के उद्भट् विद्वान तथा रवीन्द्र साहित्य में डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले डा.बी.के.घोष ने कवि गुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर के जीवन के कई अनछुए पहलुओं को उद्घाटित किया और बताया कि कवि गुरू का मुंगेर एवं बिहार से आत्मिक लगाव के साथ पारिवारिक संबंध भी रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके जैसा विद्वान विश्व साहित्य में बिऱले हुए हैं। 

      धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उपनिदेशक जन-सम्पर्क डा.रामनिवास पाण्डेय ने इस आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और आगत व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनका यह प्रयास होगा कि कवि गुरू के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों पर एक विस्तृत परिचर्चा पुनः आयोजित हो। इस मौके पर पत्रकार नरेशचंद्र राय, अजाना घोष, कृष्णा कुमार, संजय कुमार, अरूण कुमार शर्मा, दीपक विश्वास, शापफे उल हक, शाहनवाज, मनीष कुमार, अभिषेक कुमार सोनी, सुनील कुमार पांडेय, सुनील कुमार जख्मी, धन्नामल, रामजी प्रसाद, जीवनकांत सहाय, हरि तथा उद्यन परिषद के सचिव अशोक मोइत्रा, कोषाघ्यक्ष शंकर दत्ता, शहर सचिव अशोक सिन्हा, अरविंद शंकर, बार काउंसिल के देवराज सिंह, कृष्ण चंद्र ओझा, रामचंद्र महतो आदि उपस्थित थे।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

सज्जन कुमार गर्ग
द्वारा हरिश्चन्द्र गर्ग
सदर बाजार मारवाड़ी मोहल्ला
पोस्ट-जमालपुर
जिला-मुंगेर
मो0-09931554140
garg.sajjan@gmail.com
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