नई संभावनाओं के साथ नए वर्ष का आगाज - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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नई संभावनाओं के साथ नए वर्ष का आगाज


प्रकाश झा की टीम मुंगेर योग विद्यालय में

वर्ष 2012 दस्तक दे चुका है और वर्ष 2011 कई खट्टी मीठी यादों को लेकर अलविदा हो रहा हैं अलविदा होने के साथ-साथ कई स्मृतियों को छोड़ गया। कुछ तो सुखद रही और कुछड को पीड़ा दे गयी। यदि साहित्यिक सांस्कृतिक सफरनामे को देखते हैंतो उस लिहाज से यह वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहा।मुंगेर अपनी समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के रक्षा कर अपनी गरिमा कायम रखने में आज भी सक्षम है। इसका एहसास विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से होता रहा है। साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्र की बात करें तो इसी की उपज भी श्रीकृष्ण मिश्र, बालकवि पंडित जगन्नाथ चर्तुवेदी, पंडित अवधभूषण मिश्रा, रामधरी सिंह दिनकर, नवलकिशोर धवल ने अपने कृतित्व से इस जिले को गौरवान्वित किया। जहां तक साहित्यिक सांस्कृतिक अवलोकन की बात होती है, तो बीते वर्ष के महत्वपूर्ण योजनाओं में साहित्य मंच द्वारा आयोजित सम्मान अर्पण सह लाला जगत ज्योति प्रसाद सम्मान समारोह रहा। जिसमें साहित्यिक पत्रिका नईधारा के सम्पादक शिवनारायण तथा जनपथ के सम्पादक अनंत कुमार सिंह को सम्मानित किया गया।

साहित्यिक आयोजनों की कड़ी में काव्य गोष्ठी एवं रचना गोष्ठी का आयोजन समकालिन साहित्य मंच की ओर से किया गया।समीक्षा गोष्ठि मनव्वर राणा ‘‘मोहाजिरनामा’’ रंजना श्रीवास्तव की कविता पुस्तक ‘‘जीवन-जीवन के बाद’’ माधव कौशिक की पुस्तक ‘‘अपने अपने चेहरे’’ अखिलेश तिवारी की गजल पुस्तक ‘‘आसमां होने को था’’ समकालीन साहित्यमंच के द्वारा आयोजित की गयी। इन गोष्ठियों में गजल तथा कविता पर चर्चा की गयी। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजना की चर्चा करें तो जिला प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस तथा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कवि सम्मलेनों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय साहित्यकारों तथा स्थानीय कलाकारों की भागीदारी महत्वपूर्णरही। इसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा आयोजित बिहार दिवस और मुंगेर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित दो दिवसीय मुंगेर स्थापना दिवस समारोह महत्वपूर्ण रहा।

बिहार दिवस पर आयोजित समारोहों में मुंगेर के पत्रकारिता जगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र को सम्मानित किया गया तो अन्य विद्या से जुड़े लोग भी सम्मानित किए गए। इसी तरीके से आयोजनों की कड़ी में दो दिवसीय स्थापना दिवस समारोह मुंगेर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इस आयोजन के मुख्य केन्द्र सांस्कृतिक कार्यक्रम, विचार गोष्ठि, कवि सम्मेलन रहे। इस अवसरपर जिले की स्मारिका ‘‘मुदगल’’ का प्रकाशन किया गया जो मुंगेर को समझने के लिए एक उपयोगी और सशक्त माध्यम बनेगा। स्मारिका का सम्पादन मुंगेर के जिला पदाधिकारी कुलदीप नारायण और सूचना जन सम्पर्क के उप निदेशक डा.रामनिवास पाण्डेय ने किया, वहीं विचार गोष्ठी में पत्रकार कुमार कृष्णन, चंद्रशेखरम एवं अन्य लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। 

सूचना जन सम्पर्क के उपनिदेशक डा.रामनिवास पाण्डेय अपने विभाग के विभिन्न आयोजनों के माध्यम से प्रशासन और आमलोगों के बीच बढ़ती संवादहीनता की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, जो लोकतांत्रिक शासन पद्धति में महत्वपूर्ण है। सूचना जन सम्पर्क द्वारा आयोजित प्रेस दिवस पर संगोष्ठी, गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जन्म दिवस पर संगोष्ठी महत्वपूर्ण रही। 

पुस्तक प्रकाशन में शहंशाह आलम की कविता पुस्तक ‘वितान’’ प्रमुख है। अन्य छोटी-मोटी पुस्तिकाएं प्रकाशित होती रही है। सम्मान पाने वालों में मुंगेर के चर्चित शायर अनिरूद्ध सिन्हा प्रमुख हैं जिन्हें मदर टेरेसा एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से गजल सम्राट सम्मान अंतर्राज्य सद्भावना मंच की ओर से दुष्यंत स्मृति सम्मान तथा सृजनात्मक साहित्यिक सामाजिक वाग्वैचित्रय मंच अररिया के द्वारा फनीश्वर नाथ रेणू स्मृति सम्मान दिया गया। यदि गोष्ठी की बात करें तो डा.शिवचंद्र प्रताप के संयोकत्व में आयोजित गंगोत्री की गोष्ठी अनेक समसामयिक विषयों पर होती रही। इसी प्रकार अंगिका के क्षेत्र में अंगिका रामायण का लेखन महत्वपूर्ण रहा विजेता मुद्गलपुरी इस काम को अंजाम दे रहे हैं। जिसके दो सर्ग प्रकाशित हो चुके हैं। इसी प्रकार सूचना जन सम्पर्क द्वारा आयोजित शनि बहार-शुक्रगुलजार कार्यक्रम प्रमंडल की प्रतिमा को मंच प्रदान करने तथा संरक्षण प्रदान करने का सशक्त माध्यम बना। इस आयोजन में कला की विविध विधाओं के कलाकारों को 10000/- रूपये की प्रोत्साहन राशि देकर उनकी हौसल आफजाई  की गयी। इसी प्रकार मुंगेर यों भारती द्वारा कई महत्वपूर्ण आयोजन किए गए। तो दूसरी ओर गंगा प्रदूषण के विरूद्ध जनमत बनाने में गंगा महाआरती महत्वपूर्ण साबित हुआ।

वहीं आयोजनों की कड़ी में घोरघट की लाठी महोत्सव महत्वपूर्ण रहा। यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण था। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस क्षेत्र की यात्रा की थी तो कठगोला के लाठी बनाने वालों ने बापू को लाठी भेंट की थी। इस आयोजन में संस्कृतिकर्मी बासुकी पासवान की अहम भूमिका रही पर आयोजन से लाठी बनाने वाले उपेक्षित रहे। तो नाट्य आयोजन में अंग नाट्य मंच का आयोजन महत्वपूर्ण रहा। प्रख्यात फिल्म निर्देशक प्रकाश झा की सहायिका अलंकृता द्वारा मुंगेर योग भारती का फिल्मांकन किया गया, जिसे बिहार के सांस्कृतिक धरोहरों पर बन रही वृत्त चित्र में शामिल किया जाएगा। इसमें योग आंदोलन जानकारी स्वामी सूर्य प्रकाश ने दी है। 

एक ओर यह वर्ष जहां उपलब्धियों वाला रहा तो दूसरी ओर प्रसिद्ध पत्रकार आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र, स्वतंत्रता सेनानी भोला राय और सूर्यनारायण पाठक का निधन पीड़ादायक रहा। नए वर्ष के संबंध में जमालपुर बड़ी दुर्गा स्थान, उदासीन आश्रम के महंत भगवती नंदन का मानना है कि नववर्ष का शुभारंभ आध्यात्मिक आयोजनों से हो तो पूरा वर्ष मंगलमय रहता है। वर्ष 2012 का दस्तक योग भारती में होन वाले कार्यक्रम तथा जिला प्रशासन के सौजन्य से होने वाले ‘बाल फिल्म महोत्सव’ से होगा। नए वर्ष का आगाज नई साहित्यिक तथा सांस्कृतिक संभावनाओं से होगा। यह वर्ष बिहार का शताब्दी वर्ष है। मुंगेर इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। इसके लिए तैयारियां चल रही है।


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


सज्जन कुमार गर्ग
द्वारा हरिश्चन्द्र गर्ग
सदर बाजार मारवाड़ी मोहल्ला
पोस्ट-जमालपुर
जिला-मुंगेर
मो0-09931554140
garg.sajjan@gmail.com
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