डॉ. टी. महादेवराव की दो नई कवितायेँ - अपनी माटी (PEER REVIEWED JOURNAL )

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शनिवार, दिसंबर 10, 2011

डॉ. टी. महादेवराव की दो नई कवितायेँ


 समय की रेत 


रेत पर नहीं टिकती
देर तक कोई भी निशान
और कोशिश ऐसा करने की
फिर एक बार नाकाम हो गई

समय की रेत पर बची है
सिर्फ कुछ स्मृतियाँ
कुछ कड़वी कुछ मीठी
कुछ तटस्थ सी
लेकिन वक़्त की लहरें
अब भी आती हैं  लौट जाती हैं
रेत को भिंगाती हैं
नए चिह्न बनाती हैं

बच्चों के घरौंदे
पूजा के फूल और पत्ते
खाली बोतलें और कागज
सब कुछ ले जाता है समुद्र
अपने भीतर
और छोड जाता है रेत को
कैनवास पर लगे
खाली कागज की तरह

***************

कविता आदिम युग की ओर 

मुझे लौटना है आदिम युग में
जहां कपड़े थे ज्ञान था
ऐसा खान पान था
मोबाइल थी मोटर था
टीवी थी एफएम था
अब तो बहुत बहुत कुछ है
उस युग में जहां कुछ भी नहीं था

लोग थेदूर इन सुविधाओं से
पर कितने करीब थे दिलों के
वक़्त ही वक़्त था
हम भाषा के बिना
व्यक्त कर सकते थे अपने आप को
भावनाएं बांटी जाती आसानी से
जो चाहिए होता
मिल जाता था सरलता से
स्वांग था संवादहीनता थी
भूख हो प्यास हो या वासना
शरीर की आग
बुझाई जाती थी आसानी से
राजनीति थी कूटनीति ही
हर पल जीता था मनुष्य मनुष्य होकर
जन्म का हर्ष
मृत्यु की चिंता



वे स्थितियाँ मुझे
आज की विषाक्तता से
लगती हैं बेहतर और सुखकर
इसलिए मैं चाहता हूँलौट जाना
फिरसे उसी आदिम युग में
ताकि मैं अपने पूरे अस्तित्व को जी सकूँ
और मानव होने की नियति की मदिरा को
पूरी की पूरी पी सकूँ
लौट जाना चाहता हूँ फिर से आदिम युग में


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

डॉ. टी.महादेव राव
सचि – सृजन
09394290204                              mahadevraot@hpcl.co.in
प्रकाशित कृतियाँ-
जज्‍बात केअक्षर (गजल संग्रह)कवि‍ता के नाट्य-काव्‍यों में चरि‍त्र-सृष्‍टि‍ ( शोध प्रबंध)वि‍कल्‍प की तलाश में (कवि‍ता संकलन),चुभते लम्हे (लघुकथा संग्रह) के साथ साथ तेलुगु के वि‍चारोत्‍तेजक लेखोंका संकलन हि‍न्‍दी में अनूदि‍त एवं कश्‍मीर गाथा के रूप में प्रकाशि‍त।संप्रति‍- हि‍न्‍दुस्‍तानपेट्रोलि‍यम कॉर्पोरेशन लि‍मि‍टेडवि‍शाख रि‍फाइनरी में उप प्रबंधक -राजभाषा केरुप में कार्यरत।
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