''अनुभवी लोगों से चर्चा कर समस्याओं के समाधान हेतु सार्थक साझेदारी करेगा महिला आयोग ''-प्रो. लाड कुमारी जैन - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

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''अनुभवी लोगों से चर्चा कर समस्याओं के समाधान हेतु सार्थक साझेदारी करेगा महिला आयोग ''-प्रो. लाड कुमारी जैन

प्रेस विज्ञप्ति :चित्तौड़गढ़ 
29 दिसम्बर, 2011 ।  सशक्त  महिला-सशक्त समाज देश के विकास में दोनों ही एक दूसरे के पूरक है।  देश  में महिलाओं का सशक्तीकरण होना आज की महती आवश्यकता और प्राथमिकता है यह बात राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. लाड कुमारी जैन ने प्रयास संस्था द्वारा आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कही। प्रो. जैन ने कहा कि मैं स्वयं जिलेवार दौरे कर महिला की समस्याओं से अवगत होने का प्रयास कर रही हूं। आयोग की मंशा है कि जिलेवार गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और अनुभवी लोगों से चर्चा कर समस्याओं के समाधान हेतु कुछ सार्थक साझेदारी हो सके। प्रो. जैन ने बताया कि नाता प्रथा, डायन प्रथा, लड़कियों की सुरक्षा, परेशान औरतों के लिए पुर्नवास जरूरत आदि को लेकर बहुत कुछ करने की  आवश्यकता है। धर्म में हिंसा वर्जित है जबकि कन्यावध जारी है। 

पूर्व व्याख्याता और समाजसेवी डॉ एस. एन. व्यास ने कहा कि मनुस्मृति में औरत को पूज्य माना है। राजस्थान में सामन्तवादी मानसिकता बहुत गहरी है। घर का कार्य करने में बहुत गरीमा है। शोध आलेख में स्पष्ट हुआ है कि संसार का विकास 60 प्रतिशत महिलाओं ने ही किया है। वरिष्ठ नागरिक मंच के डी. एस. जोशी  ने कहा कि पुरूषो के चरित्र पर निगाह रखनी चाहिए तथा इसके लिए चरित्रवान पुरूषों की ही आगे आना चाहिए। मेवाड गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि राजस्थान में लड़कों की प्रवृति अच्छी नही है.। पूर्व प्राचार्य एवं वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. के.सी. शर्मा ने कहा कि समानता में महिलाओं की स्थिति पुरूषों की तुलना में कमजोर है। 40  प्रतिशत श्रम में महिलाओं का योगदान परन्तु सम्पति पर हक मात्र 1  प्रतिशत है। 

संगोष्ठी के समापन में सामुदायिक स्वास्थ्य वैज्ञानिक एवं प्रयास सचिव डॉ. नरेन्द्र गुप्ता ने लिंग आधारित सामाजिक संवेदनशीलता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि चित्तौडगढ जिले में समस्त स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं का लिंग आधारित  संवेदनशीलता पर कई कार्यशालाएं आयोजित की है। समाज में महिला-पुरूष भेदभाव पुरूष तो बढाते है किन्तु प्रभावशाली महिलाएं भी लडके लडकियों में भेद करती है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भेदभाव ज्यादा है। लडकियों के मुकाबले लडकों के खानपान, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जाता है। डॉ0 गुप्ता ने कहा कि यह भेदभाव पुरूष प्रधान समाज होने से अधिका होता है। कई राज्यों में महिला प्रधान है वहां पर वंश लडकों से नही लडकियों से चलता है। लडके शादी के बाद सुसराल में ही रहते है। 

संगोष्ठी में जयपुर से एडवोकेट विमल चौधरी, पूर्व प्रधान राजेश्वरी मीणा, प्रयास निदेशक खेमराज चौधरी, रितेष लढढा, श्रीमती सुमन चौहान, श्रीमती नारायणी भील,स्पिक मैके के संयोजक जे.पी. भटनागर, माणिक  नवाचार से अरूण कुमावत, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अमर सिंह कानावत, महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेषक श्रीमती अंशु भटनागर, श्रीमती चन्द्रकान्ता व्यास, युनीसेफ से कुमार विक्रम, नेहरू युवा केन्द्र से गोपाल दास वैष्णव, मेवाड गर्ल्स कॉलेज की व्याख्याता सुश्री पायल दाधिच एवं छात्राएं, अर्पण सेवा संस्थान से श्रीमती संगीता त्यागी, प्रो. सी. एम. कोली, बोध शिक्षण से राजेन्द्र माथुर ने महिला  सशक्तीकरण पर अपने-अपने विचार व्यक्त कियें। इस संगोष्ठी में लगभग 40 महिला-पुरूषों ने भाग लिया।कार्यक्रम के अन्त में डॉ. नरेन्द्र गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त कर धन्यवाद ज्ञापित किया।
योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-

रामेश्वर शर्मा
प्रबंधक
प्रयास संस्था,आठ-विजय कोलोनी
 रेलवे स्टेशन रोड,चित्तौड़ गढ़
web: prayaschittor.org
Telefax: +91 1472 243788 / 250044
Mobile No. +91 9461637025
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