कविता समय -2 ... रपट...पहली किस्त - अपनी माटी

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रविवार, जनवरी 08, 2012

कविता समय -2 ... रपट...पहली किस्त


कविता समय - ... रपट...पहली किस्त 

केदार जी ने सुबह ही समकालीन कविता और प्रतिरोध के स्वर को लेकर बेहद गंभीरता से बात शुरू कर माहौल बना दिया था. उसके बाद पहला सत्र था "कविता-लोकतन्त्र और अन्य". प्रतिभागी थे हिमांशु पांड्या , केदार नाथ सिंह, मैं, मंगलेश डबराल और इसका संचालन कर रहे थे गिरिराज किराडू  पूंजीवादी लोकतन्त्र में अन्य के साथ व्यवहार और कविता के परिसर के भीतर अन्य की स्थितियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि समकालीन युवा कविता नब्बे के दशक की कविता से आगे गयी है. मंगलेश जी ने इस पूरे अन्य की पहचान के कई स्रोत तलाशने का प्रयास किया तो मैंने इसकी वर्गीय पहचान के साथ-साथ सामाजिक संरचनाओं और भौगोलिक विभाजन तथा अवस्थिति को भी ध्यान में रखने की ज़रूरत पर जोर दिया, हिमांशु पांड्या ने इसके पहले राष्ट्र राज्यों के उदय के साथ अन्य के क्रियेशन की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से बताया...फिर बहस खुली और सविता सिंह, मदन कश्यप सहित अनेक लोगों ने इसमें गहन भागीदारी की.

इसके बाद का सेशन कविता पाठ का था और उसके तुरत बाद अगला सत्र था - "कविता का डार्क रूम : व्यक्ति,अस्मिता और विचारधारा" का सत्र था जिसमे भागीदार थे लीलाधर मंडलोई, मदन कश्यप, सविता सिंह और मोहन श्रोत्रिय और संचालन मैंने किया...चर्चा उतनी ही गंभीर हुईबस यह कि यह कार्यक्रम किसी एक संगठन से भले जुड़ा हो, लेकिन लोगों कि जुटा कर मेला करना तो कतई नहीं है. हम अपनी पहल को लेकर गंभीर हैं...अच्छा यह लगा कि प्रतिभागी भी इसी मानसिकता से आये थे.पहले वादे के रूप में हमने देवताले जी और अनुपम पर केंद्रित किताब भी छाप दी हैं.

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


अशोक कुमार पाण्डेय 
  • जन्म:-चौबीस जनवरी,उन्नीस सौ पिचहत्तर 
  • लेखक,कवि और अनुवादक
  • भाषा में पकड़:-हिंदी,भोजपुरी,गुजराती और अंग्रेज़ी 
  • वर्तमान में ग्वालियर,मध्य प्रदेश में निवास 
  • उनके ब्लॉग:http://naidakhal.blogspot.com/
  • http://asuvidha.blogspot.com
सदस्य संयोजन समिति,कविता समय
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