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कविता समय -2 :धड़ेबाजी से विलग एक आयोजन

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on सोमवार, जनवरी 09, 2012 | सोमवार, जनवरी 09, 2012


समकालीन हिन्‍दी कविता पर संजीदा संवाद के उद्देश्‍य से गत वर्ष ग्‍वालियर से आरंभ हुई 'कविता समय' की शुरुआत इस वर्ष 7-8 जनवरी को राजस्‍थान की राजधानी जयपुर एक सार्थक और उल्‍लेखनीय अयोजन साबित हुई।  7 जनवरी को प्रात 11 बजे स्‍थानीय राजस्‍थान हिन्‍दी ग्रंथ अकादमी के सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए हिन्‍दी के वरिष्‍ठ कवि केदारनाथ सिंह ने इसे समकालीन हिन्‍दी कविता पर विचार-विमर्श का एक उल्‍लेखनीय अवसर बताया। उन्‍होंने कहा कि संवेदना और सोच के धरातल पर हिन्‍दी कविता निरन्‍तर आगे बढ़ी हैऔर आज उसने रचनाशीलता की नयी संरचनाएं और संभावनाएं विकसित कर ली हैं - यह उल्‍लेखनीय बात है कि भारतीय परिवेश में महत्‍वपूर्ण कविता गद्य की लय में अपनी एक सार्थक पहचान कायम कर चुकी है, जिसे दुनिया की किसी भाषा की कविता के समकक्ष रखकर देखा जा सकता है। आज की युवा कविता की ओर संकेत करते हुए उन्‍होंने क‍हा कि वह पश्चिम के दबाव से मुक्‍त होकर अपनी जमीन और लोक-संवेदना से संपृक्‍त अपना स्‍वयं का मुहावरा और फॉर्म खोज रही है और यह बात कविता ही नहीं आज की कहानी और अन्‍य साहित्‍य रूपों के साथ भी उसी तरह देखी जा सकती है। 

 उद्घाटन सत्र के बाद  'कविता लोकतंत्र और अन्‍य' विषय पर केन्द्रित चर्चा में जहां मंगलेश डबराल, हिमांशु पंड्या और नरेश सक्‍सेना ने शिरकत की, वहीं 'कविता का डार्क रूम - व्‍यक्ति, अस्मिता और विचारधारा' पर मोहन श्रोत्रिय, लीलाधर मंडलोई, मदन कश्‍यम और सविता सिंह ने अपने विचार प्रकट किये। इसी क्रम में सायंकाल में जवाहर कला केन्‍द्र के सभागार में जहां वरिष्‍ठ कवि इब्‍बार रब्‍बी और युवा कवि प्रभात को कविता समय -2 सम्‍मान से नवाजा गया वहीं इन कवियों के वक्‍तव्‍य और काव्‍य पाठ के साथ वरिष्‍ठ कवियों मंगलेश डबराल, अनामिका, तेजी ग्रोवर, लीलाधर मंडलोई, दिनेशकुमार शुक्‍ल, सी पी देवल, नंद भारद्वाज, नरेश चन्‍द्रकर, गोविन्‍द माथुर, हरीश करमचंदानी, सवाईसिंह शेखावत, सविता सिंह, प्रतापराव कदम आदि ने अपनी प्रभावशाली कविताओं का पाठ किया। इसी तरह अगले दिन के आयोजन में जहां '90 पार की हिन्‍दी कविता में प्रतिरोध के स्‍वर और उसके असर' पर विशाल श्रीवास्‍तव, राजाराम भादू और अनामिका ने अपने विचारपूर्ण वक्‍तव्‍य दिये वहीं युवा कवियों के काव्‍य-पाठ में संजय कुंदन, निरंजन श्रोत्रिय, तुषार धवल, कुमार अनुपम, अरुण आदित्‍य, प्रेमचंद गांधी, अनुज लगून, देवयानी,अर्पिता, दुष्‍यंत, प्रमोद आदि कवियों ने अपनी उर्जावान कवितां प्रस्‍तुत कीं।

इस अवसर पर पहले दिन जहां कविता समय एक में पुरस्‍कुत कवि चंद्रकान्‍त देवताले और युवा कवि कुमार अनुपम की कविताओं के संकलन और अगले दिन बोधि प्रकाशन के अनूठे प्रयास के रूप में लक्ष्‍मी शर्मा के संपादन में प्रकाशित स्‍त्री विषयक कविताओं के संकलन 'स्‍त्री होकर सवाल करती है' का लोकार्पण इस आयोजन के अतिरिक्‍त आकर्षण रहे। युवा कवि गिरिराज किराडू, अशोक कुमार पाण्‍डेय और बोधिसत्‍व के संयोजकत्‍व में कविता समय का यह अनूठा आयोजन हमारे इस विश्‍वास को और पुख्‍ता कर गया कि अब साहित्यिक संवाद के संजीदा और सार्थक प्रयत्‍न किसी राजकीय या व्‍यावसायिक सहयोग-समर्थन के मोहताज नहीं हैं। 



योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


नन्द भारद्वाज
कवि और राजस्थानी साहित्यकार 
(हमेशा से श्रेष्ठ लेखन के कलमकार जो हाल ही में अपने नए कविता संग्रह 'आदिम बस्तियों के बीच' से खासी चर्चा में है.)
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1 टिप्पणी:

  1. बहुत बढिया आयोजन्………स्त्री होकर सवाल करती है मे मेरी कवितायें भी सम्मिलित हैं।

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