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बड़ी-बड़ी इमारतों के दौर में किताबों की घटती दुकाने चिंताजनक -कवि-आलोचक नन्द भारद्वाज

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on गुरुवार, जनवरी 05, 2012 | गुरुवार, जनवरी 05, 2012

वरिष्ठ कवि मीठेश निर्मोही श्रीमती कांता वर्मा  राष्ट्र स्तरीय पुरस्कार से समादृत 

 कोटा-
हिंदी एवं राजस्थानी के प्रख्यात कवि,  आलोचक  व उपन्यासकार और 'अपनी माटी' वेबपत्रिका के सलाहकार नन्द भारद्वाज ने कहा कि ''जो रचनाकार श्रेष्ठ रच रहे हैंउनका सम्मान कर उनकी पहचान को आगे बढाया जाना  हमारे समाज का  गुरूतर दायित्व है । नन्द भारद्वाज महावीर नगर प्रथम कोटा स्थित "शिव वीणा साहित्य संस्थान" के प्रेक्षागृह् में आयोजित  श्रीमती कांता वर्मा राष्ट्र स्तरीय साहित्यकार सम्मान समारोह २०१०  को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज हम जिन  रचनाकारों  को पुरस्कृत  और  समादृत कर रहे हैं, साहित्य में उनकी अपनी  पैठ  और विशिष्ठ पहचान हैं ।   कोटा शहर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह ऐसा शहर है,जो कला, साहित्य एवं संस्कृति की दृष्टी से देश भर में अपनी अलग पहचान रखता है । एक ओर  यहां कुशल शब्दकारों की खान है  तो दूसरी तरफ शिव वीणा साहित्य संस्थान के ओर से किया जा रहा  अवदान भी रेखांकित योग्य है ।   इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि आज इन्सान ने बहुत तरक्की करली है, बड़ी- बड़ी इमारतें और शापिंग मॉल बना लिए हैं । ऐसे स्थानों पर हर कीमती चीज बेची जा रही हैं किन्तु वहां अच्छी किताबों की दुकाने कम ही देखी जाती हैं, निश्चय ही यह चिंता की बात है ।''
 
                  
समारोह के अध्यक्ष केंद्रीय  साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली से पुरस्कृत हिंदी एवं राजस्थानी के  प्रख्यात साहित्यकार  डॉ. भगवती लाल व्यास ने  समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान में हिंदी की समृद्ध काव्य परंपरा रही है, इसे समृद्ध करने वाले कवियों में मीठेश निर्मोही की भूमिका भी निसंदेह ही महत्वपूरण है श्रीमती कांता वर्मा सम्मान से पुरस्कृत उनकी काव्य कृति  "चिड़िया  भर शब्द" के अधिकांश कविताएँ स्मृतियों की कविताएँ हैं । आज निर्मोही  जोधपुर जैसे महानगर में बस गये हैं, किन्तु उनका कवि - मन   रचना कर्म  में रहते हुए  बार- बार अपने गांव की ओर  लौट कर  संवेदनाएं बटोर लाता  है । इस तरह हम देखते हैं कि  इन कविताओं में ग्राम्यबोद्ध के   नए एवं अनूठे बिम्ब रचे  गये हैं , वहीं लम्बी कविताओं की प्रबंधात्मकता  में समय और समाज के जीते जागते चित्र उपस्थित हुए हैं । इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि सुविधाएँ संवेदनाओं को मृत बना देती हैं । बड़े महलों में सुविधाओं के बीच बैठकर अच्छा साहित्य लिखना मुश्किल होता है । श्रेष्ठ साहित्य तो छोटी जगहों और छोटी-सी कुटिया में टूटी कुर्सी- मेज पर बैठकर ही रचा जाता है  छोटी जगह पर रह कर  श्रेष्ठ साहित्य रचकर मीठेश निर्मोही ने अपने होने की सार्थकता सिद्ध करदी है ।  

             
समारोह के विशिष्ठ अतिथि डॉ. नरेन्द्र नाथ चुतर्वेदी ने अपने उदबोधन में कहा कि कांता वर्मा साहित्य सम्मान २०१०  का यह शुभ अवसर साहित्यारों के लिए प्रेरणाप्रद है । भारत का भविष्य प्रगति और संस्कृति में है । शिव वीणा  साहित्य संस्थान  परिवार का यह उपक्रम इस दिशा में सार्थक पहल के रूप में सदैव स्मृतियों में रहेगा । उन्होंने  कहा कि कवि परमात्मा से भी बड़ा होता है । वह भविष्य का चितेरा का कहलाता है वहीं वह कविता से नयी सृष्टि रचता है । पुरस्कृत काव्यकृति  की कविताओं को इस दृष्टि से रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि  "चिड़िया भर शब्द " की लम्बी कविताओं की अपेक्षा लघु आकर की कविताएँ भाव, भाषा, शिल्प और शैली की दृष्टि अधिक प्रभावकारी हैं ।
 
              
इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष गीतकार एवं अधिवक्ता शिव नारायण वर्मा ने अतिथियों का अभिवादन एवं पुरस्कृत साहित्यकारों को बधाई देते हुए  संस्थान के उद्देश्यों  एवं भावी योजनाओं के रेखांकित किया तथा  शासन  से कोटा  नगर में साहित्यकारों के आवास के लिए साहित्यकार कालोनी बनाये जाने की मांग की ।
 
              
इससे पूर्व समारोह के स्वागताध्यक्ष प्रो. राधेश्याम मेहर ने अतिथियों और  पुरस्कृत साहित्यकारों का वाणी से सम्मान किया तथा कहा कि यह सम्मान समारोह आयोजकों के उदार मन और हृदय की विशालता का निष्पक्ष एवं अहम् उदहारण है । इससे पूर्व साहित्यकार एवं संस्थान के सचिव श्री जितेन्द्र निर्मोही ने पुरस्कृत कवि श्री मीठेश निर्मोही के व्यक्तित्व एवं कृतित्व  को रेखांकित करते हुए कहा कि मीठेश निर्मोही हिंदी  एवं  राजस्थानी के प्रख्यात  काव्य -हस्ताक्षर हैं । उनकी पुरस्कृत काव्यकृति "चिड़िया  भर शब्द "संवादों की मानवीय संवेदनाओं से घनीभूत काव्य अभीव्यक्ति है , जिसमें कवि ने अपने आस - पास के परिवेश और सामाजिक सरोकारों को बड़ी खूबी से अभिव्यक्त किया है । संस्थान के अध्यक्ष गीतकार श्री शिव नारायण वर्मा ने "उत्कृष्ट समाज सेवी सम्मान" से अलंकृत अधिवक्ता  श्री महेश गुप्ता के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वे कोटा ही नहीं अपितु सम्पूरण राजस्थान इनकी समाज सेवाओं के आयाम से परिचित है,आपने मानवीय सेवाओं को सर्वोपरि समझा  और आम आदमी की समस्यों के निवारण में सदैव निर्णायक भूमिका निभाई । श्री अरविन्द सौरल ने" बाबू शिखर चन्द  जैन साहित्य सम्मान "से समादृत गीतकार श्री शिवराज श्रीवास्तव  को  संस्कार बद्धता का बहुआयामी लेखक बताया  वहीं गज़लकार और गीतकार  महेंद्र नेह ने "श्रीमती तारादेवी जैन साहित्य सम्मान"से अलंकृत  श्री शकूर अनवर को इंसानी जजबातों  का  सच्चा शायर बताया.।



श्रीमती कांता वर्मा  राष्ट्र स्तरीय पुरस्कार से समादृत कवि मीठेश निर्मोही  का वक्तव्य 
                 
   ''मेरे लेखन  के संदर्भ में  यह पुरस्कार विद्वज समाज की बड़ी स्वीकृति  है, एतदर्थ उन विद्वान् निर्णायक- समीक्षकों  एवं आयोजक संस्थान का आभार स्वीकार करता हूं , जिन्होंने मेरी काव्य संवेदनाओं को अंगेजा और मेरी काव्यकृति "चिड़िया भर शब्द " को   इस पुरस्कार के योग्य मानते हुए  चयन किया । इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि इस उम्र में मेरे लिए यह यह पुरस्कार प्रोत्साहन  तो नहीं है लेकिन इस पुरस्कार को प्राप्त करने के बाद मैं महसूस  करता हूं कि मेरा लेखकीय दायित्व और अधिक  बढ़ गया है । मैं मानता हूं कि यह पुरस्कार मुझे और भी अधिक श्रेष्ठ रचने की प्रेरना देता रहेगा । इस अवसर पर उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि भूमंडलीकरण के इस दौर में हम संवेदनहीन होते जा रहे हैं । समाज में निरंतर अलगाव बढ़ रहा है,विसंगतियां और  विद्रूपताएं निरन्तर पांव पसार रही हैं ,परिवार टूट- बिखर रहे हैं ।   समाज के लिए यह स्थिति  अत्यंत ही खतरनाक हैं आज इस  स्थिति को बदलने की जरूरत है । हम साहित्यकारों  से समाज को बहुत  आशाएं हैं ;लेकिन मेरी मान्यता  है कि कोई  भी रचनाकार सीधे- सीधे  हस्तक्षेप कर इन स्थितियों को नहीं बदल सकता ।  हम अपनी रचनाओं के माध्यम से  ही अपने पाठकों और श्रोताओं को मानसिक रूप से जागरूक कर  यथा स्थिति को बदलने के लिए उन्हें प्रेरित कर सकते हैं ,इस अवसर पर श्री निर्मोही ने अपने वक्तव्य के अतिरिक्त अपनी पुरस्कृत काव्य कृति से चुन्निदा कविताओं  का पाठ भी किया, जिसे भरपूर रूप से सराहा गया । 


जिन्हें सम्मानित किया गया:-


समारोह के  मुख्य अतिथि नन्द भारद्वाज, अध्यक्ष भगवती लाल  व्यास ,संस्थान के अध्यक्ष श्री शिवनारायण वर्मा एवं निदेशक  श्रीमती बीना जैन दीप तथा संस्थान  के सचिव जितेन्द्र निर्मोही  ने कवि श्री मीठेश निर्मोही को ग्यारह हज़ार रुपये नकद  राशि ,शाल ,श्रीफल  एवं सम्मान पत्र  भेंट  कर श्रीमती कांता वर्मा राष्ट्र स्तरीय साहित्य पुरस्कार  से समादृत  किया                                                                                                                                                                                                     
स्थानीय स्तर पर "उत्कृष्ट समाजसेवी सम्मान" से  सम्मानित समाज सेवी एवं अधिवक्ता  महेश चन्द्र गुप्ता, बाबू शिखर चन्द साहित्य सम्मान से समादृत साहित्यकार  शिव राज श्रीवास्तव व एवं श्रीमती तारादेवी जैन साहित्य सम्मान से समादृत शायर  शकूर अनवर को  क्रमश  ग्यारह सौ रूपये की नकद राशि, शाल ,श्रीफल  एवं सम्मान पत्र  भेट कर  समादृत किया  समारोह के प्रारंभ में समारोह के अतिथि -साहित्यकारों ने सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्वलित  कर  पुष्पहार अर्पित किये । समारोह के बाद  आयोजित काव्य गोष्टी में हरिवल्लभ वर्मा सहित  नगर के लगभग २ दर्जन  कवियों ने काव्यपाठ कर श्रोताओं को भाव विभोर किया । समारोह का सञ्चालन साहित्यकार विजय जोशी ने किया तथा अंत में संस्थान की निदेशक श्रीमती बीना जैन 'दीप' ने आभार व्यक्त किया । समारोह में नगर के गणमान्य नागरिक एवं साहित्यकार बहु संख्या में उपस्थित थे ।

योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-                             
श्रीमती बीना जैन 'दीप' 
निदेशक,शिव वीणा साहित्य संस्थान
 एम. पी. बी. 88,
महावीर नगर प्रथम, कोटा (राजस्थान)
चल दूरभाष-9413275804
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2 टिप्‍पणियां:

  1. कार्यक्रम की वाकई सजीव रिर्पोंग की गई है, अच्‍छी बात यह लगी कि सभी वक्‍ताओं के वक्‍तव्‍य का सार रूप में बेहतर प्रस्‍तुतिकरण हुआ है। अपनी माटी का यह योगदान सराहनीय है। मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. श्रीमती कांता वर्मा राष्ट्र स्तरीय साहित्य पुरस्कार समारोह२०१० ,कोटा की
    सजीव रिपोर्ट प्रकाशित कर अपनी माटी ने महत्वपूरण भूमिका अदा की
    है,एतदर्थ साधुवाद.
    - मीठेश निर्मोही

    उत्तर देंहटाएं

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