नई परिभाषाएं ढालती अशोक कुमार पटेल की कवितायेँ - अपनी माटी

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सोमवार, जनवरी 09, 2012

नई परिभाषाएं ढालती अशोक कुमार पटेल की कवितायेँ


भालू

जाड़े में सो गया भालू,

डरकर,रण-क्षेत्र छोड़कर,

प्रकृति ने दी खाल गर्म,

सो गया,फिर भी पर


संघर्ष भूल जीवन की जो,

वसंत प्रतीक्षा में रह नित,

जीवन यूँ ही व्यर्थ करते,

समय बीत जाता अतीत


संघर्ष के साधन सारे,

प्रकृति ने दिए प्यारे,

फिर भी समय से डरे,

जो,जग जीवन से हारे


अनुकूल समय,क्या प्रतिकूल

कूलों पर जो खड़े हो कर,

नदी के सूखने की आस में,

रह जाएँगे वे खड़े हारकर


शेर

गरजो मृगराज,हुंकार भरो,

जागो,जागो,निद्रा त्यागो,

जीवन की जड़ता हरो,

उर्जा से जग भर दो


साहस लहरों को पुकारो,

लहू सरोवर में जो सोये,

प्राणों के पौरुष को ललकारो,

जिसे भुलाकर जन खोये,


नहीं मात्र निज भूख की ही,

जन जग का भी ध्यान करें,

अत्याचारियों का कल बन वे,

संतों का भी सम्मान करें



सियार

सियार,तुम से कई यार मेरे,

धूर्त प्रीति की चादर ओढ़े ,

सरस वचनों से मन बहलाते,

विश्वास के जो बीज बो दें,


प्रसन्न वदन,कमल पंखुड़ियों से ,

खुलकर,जताते आत्मीयता ये जन,

पर, पीठ पीछे वक्र दृष्टि त्वरित,

कुढते,दोष गिना,डसते ये जन


पर हाँ,कठिन पहचान इनकी,

तुम से सियार,नहीं कटु स्वर,

मृदु वाणी से प्रिय बनते,और

तुम पिछड़ जाते,हर डगर


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


युवा रचनाकार अशोक कुमार पटेल का पहला कथा संग्रह 'मिलन ' शीर्षक से बोधि प्रकाशन से साल दो हज़ार ग्यारह में ही आया हैये संग्रह प्राप्त करने हेतु बोधि प्रकाशन से यहाँ mayamrig@gmail.com संपर्क कर सकते हैं.  उसका मुख्य पेज यहाँ साझा कर रहे हैं.साथ ही उस संग्रह के बारे में एक ज़रूरी टिप्पणी भी.हमारी तरफ से उन्हें शुभकामनाएं -सम्पादक 

उनका संपर्क सूत्र 
उनका ब्लॉग 

शिक्षा ..............बी एस सी (बायोटेक .)
संपर्क .............ashok.shani@gmail
                                        रूचि ................ कविता और कहानी लेखन 
                                        09098389331
                                        शहडोल( म प्र )

ashok.shani@rediffmail.com
है.
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