विश्वास पत्रिया की कविता ..'कवि' - अपनी माटी (PEER REVIEWED JOURNAL )

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रविवार, जनवरी 15, 2012

विश्वास पत्रिया की कविता ..'कवि'

यकीन नहीं होता,
ये वही कवि है,
जो निडर था,
बेबाक था,
सशक्त माध्यम था,
सफल अभिव्यक्ति था,
प्रतीकों का धनी था,
संवेदनाओं से परिपूर्ण था,
जोश था कविताओं में,
मर्म था शब्दों में,
और कोमल भावनाएं भी,
पर
ये क्या हुआ उसे,
वो बदल क्यों गया?
या पहले था बदला हुआ?
अगर ये वही कवि है,
तो आज निराश क्यों है?
जीवन से हताश क्यों है?
इतना दुखी क्यों है?
वीर रस से लोगों का,
खुल खौला देने का दावा
करने वाला,
आज सहानुभूति का पात्र क्यों है?
यकीन हो भी क्यों आखिर?
असल में,
ये है वही कवि,
जो पढ़ा जाता है,
जो लिखता है,
गढ़ता है,
कविताओं को,
पर पढने सुनने वाले
अक्सर भूल जाते हैं,
कवि की ज़िन्दगी को,
जो एक इंसान भी है,
एक सादा इंसान,
उन्ही साधारण उतार चढ़ाव,
से ज़िन्दगी जी कर आया हुआ,
एक नदी की भांति निरंतर
अग्रसर, जीवन पथ पर,
जो सभी की तरह मुस्कराता है,
रोता है, देखता है, सुनता है,
भावनाएं महसूस करता है,
ये वही कवि है,
हाँ वही है,
जो आप में है,
मुझमे है,
सभी में है,
सादा इंसान,
एक सादा कवि.........लेखक.........'आपका दूसरा नजरिया'


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-
विश्वास पत्रिया
(18 वर्षों से अध्ययनरत रंगमंच की दुनिया बतौर विद्यार्थी अपने आप को गढ़ रहे हैं.भंवर पत्रिया,गोपाल आचार्य जैसे मंजे हुए गुरुओं से सीखना जारी है.इनकी रूचियों में रंगमंच, नाटक, कविता, शायरी, संगीत, मूर्तिकला, एवं भारतीय संस्कृति आदि शामिल हैं.)

पता- रंगोली, बी 315 , शास्त्री नगर, भीलवाडा, (राज.)
संपर्क - 98291 -72899 , 94685 -44555

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