डा. मनोज श्रीवास्तव की कविता...'यह समय' - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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डा. मनोज श्रीवास्तव की कविता...'यह समय'


यह समय...
 
एसएमएस से कतरी गई
भावनाओं के दौर में
शिव के वरदान से
हर शख्स भस्मासुर होगा
जो अपने ही सिर पर हाथ रखने की
फिर नहीं करेगा अक्षम्य गलती
और वह क्षण दूभर नहीं
जबकि हरेक का हाथ
हर दूसरे के सिर पर होगा
और इसका नतीज़ा साक्षात सामने होगा
यानी, पछताने का एक पल भी
मयस्सर नहीं होगा,
अरे हाँ, राजमकड़ियों के पाखंडतंत्र का
यही हश्र होगा

इतना पापोन्मुख समय है यह
कि एक बहु-प्रचलित धारणा के विपरीत
धर्म की आत्यांतिक हानि पर भी
कोई भगवान अवतरित नहीं होगा,
यह समय इतना हठधर्मी है कि
सहस्रों वर्षों बाद भी
विधाता नव-सृजन नहीं दोहरा पाएगा,
यह समय इतना बधिर है कि
परमेश्वर के दस आदेश
सुने जाने से पहले ही
चनककर, टूट जाएंगे, छितर जाएंगे,
यह समय इतना निर्मम है कि
उसके दमनचक्र पर
दिशाएं ठठाती जाएंगी,
यह समय इतना तिलस्मी है कि
एक ख़ौफ़नाक़ ज़ादुई करिश्मा के तहत
धर्मग्रंथों के कथ्य अचानक़ बदल जाएंगे
और लोग नए सिरे से
पढ़ेंगे, श्रुतगान करेंगे
उसमें वर्णित महायुद्धों में
महारक्तपात के गीत
जिनके नायक होंगे
बुद्ध, लाओ त्से, जान पाल और गांधी
जहाँ अविरल प्रवाहमान रक्त नदियों में
सुपरमैन की ख़्वाहिश लिए
बच्चे सुकून से नहाएंगे,
यह समय इतना बंजर है कि
सदाचार के शेष बीज भी
सदा के लिए कंडम हो जाएंगे,
पर, यह ऊसर समय उर्वर है
नेपोलियन, हिटलर और
गद्दाफ़ी की फ़सल के लिए
जबकि पंडे, मुल्ले, पादरी और गुरु
साझे में उनकी खेती करेंगे
जिनकी ग्लोबल मार्केटिंग के जरिए
वे अपनी अस्मिता महिमामंडित करेंगे

आह, यह शोख समय!
क्या आत्ममंथन के कटकघरे में
तुम्हें खड़ा करूं?
उफ़्फ़, यह दुष्कर दौर!
क्या तुम्हे परे रखने के लिए तुम्हे दुतकारूं?
हाय, यह आततायी आलम!
तुम्हारे आक्रमण से बचाव के लिए
सुरक्षा-कवच कहाँ से लाऊं?
क्या करें, क्या भूलें
क्या न करें, क्या न भूलें
तुमसे अछूता रहने के लिए
खुद को कहां आहूत करें!


योगदानकर्ता / रचनाकार का परिचय :-


डा. मनोज श्रीवास्तव 
आप भारतीय संसद की राज्य सभा में सहायक निदेशक है.अंग्रेज़ी साहित्य में काशी हिन्दू विश्वविद्यालयए वाराणसी से स्नातकोत्तर और पीएच.डी.
लिखी गईं पुस्तकें-पगडंडियां(काव्य संग्रह),अक्ल का फलसफा(व्यंग्य संग्रह),चाहता हूँ पागल भीड़ (काव्य संग्रह),धर्मचक्र राजचक्र(कहानी संग्रह),पगली का इन्कलाब(कहानी संग्रह),परकटी कविताओं की उड़ान(काव्य संग्रह,अप्रकाशित)

आवासीय पता-.सी.66 ए नई पंचवटीए जी०टी० रोडए ;पवन सिनेमा के सामने,
जिला-गाज़ियाबाद, उ०प्र०,मोबाईल नं० 09910360249
,drmanojs5@gmail.com)
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